The Red Ink
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर असंतोष और संभावित टूट की चर्चाओं ने सियासी गलियारों का तापमान बढ़ा दिया है। पार्टी से निलंबित नेता रिजू दत्ता के दावों के बाद विपक्षी भाजपा ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। हालांकि TMC नेतृत्व इन अटकलों को खारिज करते हुए संगठन की एकजुटता का दावा कर रहा है।
TMC में ‘महाराष्ट्र मॉडल’ की चर्चा क्यों?
पार्टी से निष्कासित नेता रिजू दत्ता ने दावा किया है कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर एक बड़ा वर्ग नेतृत्व की कार्यशैली से नाराज है। उनके अनुसार, कुछ विधायक खुद को “असल तृणमूल कांग्रेस” बताने की तैयारी में हैं और विधानसभा अध्यक्ष के सामने अपनी ताकत दिखाने की रणनीति बना रहे हैं। दत्ता का आरोप है कि पार्टी के भीतर असंतोष का मुख्य कारण संगठनात्मक फैसले और नेतृत्व की कार्यप्रणाली है। उनका कहना है कि यदि हालात नहीं बदले तो पश्चिम बंगाल में भी महाराष्ट्र जैसी राजनीतिक स्थिति देखने को मिल सकती है, जहां पार्टी के भीतर बड़ा विभाजन हुआ था।
BJP ने खोला मोर्चा
इन अटकलों के बीच पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने तृणमूल कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने साफ कहा कि भाजपा को अपनी ताकत बढ़ाने के लिए TMC नेताओं की जरूरत नहीं है। भट्टाचार्य ने कहा कि भाजपा ने राज्य में अपनी राजनीतिक जमीन खुद तैयार की है और पार्टी किसी भी विवादित या दागी चेहरे को शामिल करने के पक्ष में नहीं है। उन्होंने दोहराया कि “भाजपा का तृणमूलीकरण नहीं होगा।”
ममता के विरोध प्रदर्शन पर भी निशाना
भाजपा अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रस्तावित विरोध कार्यक्रमों को लेकर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी दिल्ली जाएं, अंटार्कटिका जाएं या किसी रेगिस्तान में प्रदर्शन करें, इससे राजनीतिक हकीकत नहीं बदलेगी। उनका दावा था कि राज्य की जनता अब तृणमूल कांग्रेस से निराश हो चुकी है और पार्टी लगातार जनाधार खो रही है।
TMC ने दलबदल की अटकलों को किया खारिज
दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने पार्टी में किसी बड़े विद्रोह की संभावना से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि अधिकांश विधायक ममता बनर्जी के साथ मजबूती से खड़े हैं और संगठन पर नेतृत्व की पकड़ कायम है। चट्टोपाध्याय ने आरोप लगाया कि राजनीतिक दबाव और प्रलोभनों के जरिए कुछ विधायकों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन पार्टी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
होटल बैठकों ने बढ़ाई सियासी चर्चाएं
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि कुछ विधायकों की हालिया बैठकों ने अटकलों को हवा दी है। हालांकि इन बैठकों और कथित बगावत को लेकर अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। फिर भी बंगाल की राजनीति में इन खबरों ने नई बहस छेड़ दी है।
2026 चुनाव से पहले बढ़ी चुनौती
विश्लेषकों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले TMC के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठनात्मक एकता बनाए रखने की होगी। वहीं भाजपा इस मौके को राज्य की राजनीति में अपनी स्थिति और मजबूत करने के अवसर के रूप में देख रही है।




