The Red Ink
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दोनों चरणों का मतदान खत्म हो चुका है और अब नजरें एग्ज़िट पोल पर टिकी हैं। भारी मतदान के बीच आए अनुमानों ने सियासी मुकाबले को बेहद दिलचस्प बना दिया है। विशेषज्ञों की मानें तो इस बार मुकाबला एकतरफा नहीं, बल्कि कांटे का हो सकता है।
रिकॉर्ड मतदान ने बढ़ाई सियासी दिलचस्पी
इस चुनाव में मतदान प्रतिशत ने नया रिकॉर्ड बनाया है। दूसरे चरण में करीब 91.66% और पहले चरण में 93% से अधिक वोटिंग दर्ज हुई। कुल मिलाकर लगभग 92.47% मतदान ने साफ कर दिया कि जनता ने इस बार बढ़-चढ़कर भागीदारी की है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इतना अधिक मतदान अक्सर बड़े बदलाव का संकेत भी हो सकता है।
एग्ज़िट पोल में अलग-अलग तस्वीर
294 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 148 सीटों की जरूरत है। अलग-अलग एजेंसियों के एग्ज़िट पोल में तस्वीर साफ नहीं दिख रही— कुछ सर्वे भारतीय जनता पार्टी को बढ़त देते नजर आ रहे हैं, वहीं कई अनुमान तृणमूल कांग्रेस की वापसी की ओर इशारा कर रहे हैं अन्य दलों की भूमिका सीमित लेकिन अहम बताई जा रही है यानी आंकड़े साफ नहीं, मुकाबला बेहद कड़ा दिख रहा है।
दोनों दलों का जीत का दावा
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भरोसा जताया है कि उनकी पार्टी फिर से सत्ता में लौटेगी और मजबूत बहुमत हासिल करेगी। वहीं बीजेपी नेताओं का कहना है कि असली नतीजे एग्ज़िट पोल से भी बेहतर होंगे और पार्टी राज्य में सरकार बनाने की स्थिति में है।
SIR और वोटिंग पैटर्न का असर
इस चुनाव में SIR (Special Intensive Revision) बड़ा मुद्दा रहा, जिसके बाद लाखों नाम मतदाता सूची से हटे। इसके बावजूद भारी मतदान ने कई सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, मताधिकार को लेकर लोगों में एक तरह की बेचैनी और जागरूकता दोनों देखने को मिली, जिसने मतदान प्रतिशत को बढ़ाया।
पहचान की राजनीति बनी बड़ा फैक्टर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार चुनाव में पहचान, भाषा और संस्कृति जैसे मुद्दे भी अहम रहे। बंगाल जैसे राज्य में स्थानीय पहचान हमेशा बड़ा रोल निभाती है, लेकिन इसके बावजूद बीजेपी का वोट शेयर बढ़ना भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
विशेषज्ञों की राय बंटी हुई
कुछ राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि तृणमूल कांग्रेस का बहुमत से नीचे जाना मुश्किल है। वहीं अन्य विशेषज्ञों का कहना है कि बीजेपी का उभार किसी एक फैक्टर से नहीं, बल्कि लंबे राजनीतिक विस्तार का परिणाम है।
क्या कहते हैं पिछले अनुभव?
2021 के चुनाव में एग्ज़िट पोल पूरी तरह गलत साबित हुए थे और नतीजे चौंकाने वाले रहे थे। इसलिए इस बार भी एग्ज़िट पोल को अंतिम सच मानना जल्दबाजी होगी।
अब नजर 4 मई पर
सभी अटकलों के बीच असली तस्वीर 4 मई को नतीजों के साथ साफ होगी। फिलहाल इतना तय है कि बंगाल में इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प और करीबी रहने वाला है।




