The Red Ink
उत्तर प्रदेश पुलिस में वर्दी पहनकर रील बनाने और सोशल मीडिया पर वायरल होने की होड़ अब भारी पड़ सकती है। STF चीफ और एडीजी कानून-व्यवस्था अमिताभ यश ने साफ चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया पॉलिसी का उल्लंघन करने वाले पुलिस अफसरों और जवानों को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों को ऐसे पुलिसकर्मियों की पहचान कर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
सोशल मीडिया पॉलिसी तोड़ने वालों पर सख्त एक्शन
पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि 8 फरवरी 2023 को यूपी पुलिस के लिए सोशल मीडिया पॉलिसी लागू की गई थी, लेकिन इसके बावजूद कई पुलिसकर्मी नियमों को नजरअंदाज कर रहे हैं। सर्विस और ट्रेनिंग में मौजूद जवान इंस्टाग्राम, फेसबुक और अन्य प्लेटफॉर्म पर रील्स बनाकर पोस्ट कर रहे हैं, जिससे विभाग की छवि प्रभावित हो रही है। आदेश के मुताबिक अब ऐसे मामलों में विभागीय कार्रवाई तय मानी जाएगी।
हर महीने पुलिस मुख्यालय को भेजनी होगी रिपोर्ट
नए निर्देशों के तहत सभी जिलों के कप्तानों और अधिकारियों को कहा गया है कि सोशल मीडिया पॉलिसी तोड़ने वाले पुलिसकर्मियों की सूची तैयार करें और उनके खिलाफ हुई कार्रवाई की रिपोर्ट हर महीने पुलिस मुख्यालय भेजें। साथ ही संबंधित पोस्ट या वीडियो का स्क्रीनशॉट और उसका URL भी रिकॉर्ड के तौर पर सुरक्षित रखना होगा, ताकि कार्रवाई के दौरान डिजिटल सबूत मौजूद रहें।
‘सिंघम’ बनने की होड़ में बढ़ीं रील्स
हाल के महीनों में सोशल मीडिया पर यूपी पुलिस के जवानों की बड़ी संख्या में रील्स वायरल हुई हैं। इनमें कई पुलिसकर्मी फिल्मी डायलॉग्स, एक्शन स्टाइल और बैकग्राउंड म्यूजिक के साथ वीडियो बनाते नजर आए। कुछ पुलिसकर्मियों ने अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल में “UP Police”, “COP” और “Serving the Nation” जैसे टैग जोड़ रखे हैं। वहीं कई वीडियो में ट्रेनिंग सेंटर, सरकारी गाड़ियां और थाने तक दिखाए गए।
नई भर्ती के जवान सोशल मीडिया पर ज्यादा एक्टिव
साल 2025 में यूपी पुलिस में करीब 60 हजार सिपाहियों की भर्ती हुई थी। इनमें बड़ी संख्या में युवा अभ्यर्थी शामिल थे, जो सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय हैं। इन जवानों के इंस्टाग्राम अकाउंट पर वर्दी वाली तस्वीरें, ट्रेनिंग क्लिप्स और मोटिवेशनल कोट्स लगातार शेयर किए जा रहे हैं। पुलिस विभाग का मानना है कि यह ट्रेंड अनुशासन और प्रोफेशनलिज्म दोनों के लिए खतरा बनता जा रहा है।
पूर्व DGP बोले- पुलिसिंग कोई सोशल मीडिया शो नहीं
उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने भी रीलबाजी पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि अगर यह ट्रेंड नहीं रुका तो पुलिसिंग की गंभीरता पर असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पुलिस एक अनुशासित सेवा है और वर्दी का इस्तेमाल सोशल मीडिया शोबाजी के लिए नहीं होना चाहिए। जिलों के वरिष्ठ अधिकारियों को इस पर सख्ती से निगरानी रखनी चाहिए।
पहले भी कई पुलिसकर्मी हो चुके हैं सस्पेंड
हाल ही में मुजफ्फरनगर में रील बनाने के आरोप में एक दरोगा और कॉन्स्टेबल को सस्पेंड किया गया था। इससे पहले फिरोजाबाद, औरैया और गाजियाबाद में भी कई पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हो चुकी है। कुछ मामलों में पुलिसकर्मी सरकारी बाइक और थाने के अंदर वीडियो बनाते नजर आए थे, जबकि कुछ ने वर्दी में मॉडलिंग स्टाइल रील्स पोस्ट की थीं।
सोशल मीडिया से कमाई भी नियमों के खिलाफ
पुलिस विभाग का कहना है कि कई पुलिसकर्मियों के सोशल मीडिया अकाउंट पर लाखों फॉलोअर्स हैं, लेकिन पुलिस आचरण नियमावली के तहत वे किसी अन्य माध्यम से कमाई नहीं कर सकते। ऐसे में प्रमोशनल कंटेंट, ब्रांड सहयोग या रील्स के जरिए कमाई करना भी नियमों के दायरे में जांच का विषय माना जाएगा।




