Taj Mahal Tourist Limit: आगरा के ताजमहल में बढ़ती पर्यटकों की भीड़ को नियंत्रित करने और ऐतिहासिक स्मारक पर पड़ रहे दबाव को कम करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने पर्यटकों की संख्या सीमित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। ASI ने दिल्ली मुख्यालय को प्रस्ताव भेजा है, जिसके तहत ताजमहल की कैरीइंग कैपेसिटी यानी एक समय में स्मारक कितने पर्यटकों का दबाव सुरक्षित तरीके से सहन कर सकता है, इसका वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाएगा।
इस अध्ययन की जिम्मेदारी IIT दिल्ली के विशेषज्ञों को देने की तैयारी है। IIT दिल्ली की टीम मई 2026 में ताजमहल का निरीक्षण भी कर चुकी है। टीम ने स्मारक के प्रवेश द्वार से लेकर मुख्य मकबरे तक पर्यटकों की आवाजाही, उनके रुकने की जगहों और भीड़ के दबाव वाले क्षेत्रों का जायजा लिया था।
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि ताजमहल में रोजाना कितने पर्यटकों को प्रवेश मिलेगा, क्योंकि अंतिम संख्या अभी तय नहीं हुई है। IIT दिल्ली के अध्ययन और ASI मुख्यालय की मंजूरी के बाद ही इस संबंध में आगे का फैसला होगा।
Taj Mahal Tourist Limit पर क्यों बढ़ा फोकस?
ताजमहल देश के सबसे लोकप्रिय ऐतिहासिक स्मारकों में शामिल है और यहां हर साल लाखों पर्यटक पहुंचते हैं। ASI के आंकड़ों के मुताबिक 2024-25 में ताजमहल में करीब 69 लाख पर्यटक पहुंचे थे, जिनमें लगभग 6 लाख विदेशी पर्यटक थे। यह ASI के टिकट वाले स्मारकों में सबसे ज्यादा फुटफॉल वाले स्थलों में बना हुआ है।
भीड़ का दबाव केवल पर्यटकों के अनुभव को प्रभावित नहीं करता, बल्कि स्मारक के संरक्षण और उसके संवेदनशील हिस्सों की सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। खासकर छुट्टियों, सप्ताहांत और पर्यटन सीजन के दौरान ताजमहल में पर्यटकों की संख्या काफी बढ़ जाती है।
मई में IIT दिल्ली की टीम ने करीब ढाई घंटे तक ताजमहल परिसर का निरीक्षण किया था। अधिकारियों के साथ टीम ने प्रवेश, आवाजाही, फोटोग्राफी और उन स्थानों का अध्ययन किया जहां पर्यटक अधिक समय तक रुकते हैं।
रोज कितने पर्यटक आ सकेंगे, अभी तय नहीं
इस पूरी प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि अभी Taj Mahal Tourist Limit की कोई निश्चित संख्या घोषित नहीं की गई है। IIT दिल्ली के अध्ययन में यह देखा जाएगा कि ताजमहल परिसर और मुख्य मकबरे में एक समय में कितने लोगों की मौजूदगी स्मारक और पर्यटकों दोनों के लिए सुरक्षित रहेगी।
अध्ययन में पर्यटकों के प्रवेश और निकास की गति, परिसर में उनके रुकने की अवधि, अलग-अलग हिस्सों में भीड़ का दबाव और मुख्य मकबरे के भीतर एक समय में मौजूद लोगों की संख्या जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा जा सकता है। इसके आधार पर ASI को वैज्ञानिक आधार पर सुझाव मिलने की उम्मीद है।
सुप्रीम कोर्ट और CEC की सिफारिश के बाद बढ़ी प्रक्रिया
ताजमहल में पर्यटकों की संख्या को नियंत्रित करने की चर्चा नई नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में ताजमहल के संरक्षण से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान भी स्मारक पर पर्यटकों के दबाव और प्रवेश व्यवस्था को लेकर चिंता सामने आ चुकी है।
2010 के सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश में भी ताजमहल पर पर्यटकों की भारी संख्या से स्मारक पर पड़ने वाले प्रभाव और पर्यटकों की आवाजाही को व्यवस्थित करने की जरूरत का उल्लेख किया गया था। कोर्ट के सामने ASI की ओर से पर्यटकों के प्रवेश और प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए कई प्रस्ताव रखे गए थे।
अब सेंट्रल इम्पावर्ड कमेटी (CEC) की सिफारिशों के बाद इस दिशा में वैज्ञानिक तरीके से कैरीइंग कैपेसिटी निर्धारित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। योजना को पहले ताजमहल पर लागू करने की दिशा में काम हो रहा है, जिसके बाद आगरा के दूसरे ऐतिहासिक स्मारकों के लिए भी ऐसी व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है।
पहले भी हो चुका है ताजमहल की क्षमता का अध्ययन
ताजमहल में पर्यटकों की संख्या और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए इससे पहले भी अध्ययन कराया जा चुका है। वर्ष 2014 के आसपास नीरी (NEERI) की ओर से ताजमहल की पर्यटक क्षमता और भीड़ प्रबंधन से जुड़े सुझाव दिए गए थे।
इसके बाद 2018 में ताजमहल में पर्यटकों के ठहरने की अवधि को अधिकतम तीन घंटे किया गया था। साथ ही मुख्य मकबरे में प्रवेश के लिए अलग टिकट व्यवस्था लागू की गई थी। वर्तमान आधिकारिक टिकट व्यवस्था में भारतीय पर्यटकों के लिए ताजमहल का टिकट ₹50 है और मुख्य मकबरे के लिए अतिरिक्त ₹200 का शुल्क लिया जाता है।
हालांकि उस समय प्रति घंटे पर्यटकों की संख्या तय करने जैसे कुछ प्रस्ताव पूरी तरह लागू नहीं हो पाए थे। अब नई तकनीक और वैज्ञानिक अध्ययन के जरिए इस व्यवस्था को नए सिरे से देखा जा रहा है।
ताजमहल में अभी क्या व्यवस्था है?
वर्तमान में ताजमहल में भारतीय पर्यटकों के लिए प्रवेश शुल्क ₹50 है। मुख्य मकबरे में जाने के लिए अतिरिक्त ₹200 का टिकट लिया जाता है। 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रवेश निशुल्क है। ताजमहल शुक्रवार को बंद रहता है, जबकि अन्य दिनों में यह सूर्योदय से 30 मिनट पहले से सूर्यास्त के 30 मिनट बाद तक पर्यटकों के लिए खुला रहता है।
इसलिए नई व्यवस्था लागू होने की स्थिति में टिकट प्रणाली, प्रवेश स्लॉट, प्रति घंटे प्रवेश और एक दिन में कुल पर्यटकों की संख्या जैसे कई पहलुओं में बदलाव संभव हो सकता है। लेकिन इन बदलावों पर अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है।
पर्यटकों के लिए क्या बदलेगा?
अगर IIT दिल्ली के अध्ययन के बाद पर्यटकों की संख्या सीमित करने की सिफारिश मंजूर होती है, तो भविष्य में ताजमहल देखने आने वाले लोगों को पहले से टिकट या समय स्लॉट की योजना बनानी पड़ सकती है। भीड़ वाले दिनों में प्रवेश की संख्या सीमित होने से पर्यटकों को अपनी यात्रा पहले से तय करनी होगी।
दूसरी ओर, कम भीड़ से ताजमहल परिसर में पर्यटकों की आवाजाही व्यवस्थित हो सकती है और स्मारक के संवेदनशील हिस्सों पर दबाव भी कम किया जा सकता है। हालांकि आगरा के पर्यटन कारोबार के लिए भी यह महत्वपूर्ण मुद्दा होगा, क्योंकि ताजमहल शहर की पर्यटन अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा आकर्षण है।
फिलहाल Taj Mahal Tourist Limit को लेकर सबसे अहम बात यही है कि संख्या अभी तय नहीं हुई है। IIT दिल्ली के अध्ययन के बाद ASI को रिपोर्ट मिलने और दिल्ली मुख्यालय से मंजूरी के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि ताजमहल में रोजाना या एक समय में कितने पर्यटकों को प्रवेश दिया जाएगा।




