The Red Ink
PM Narendra Modi ने सोमनाथ मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में इतिहास, आस्था और राष्ट्रीय शक्ति को एक साथ जोड़ते हुए बड़ा संदेश दिया। उन्होंने 11 मई 1998 के Pokhran-II nuclear tests को याद करते हुए कहा कि उस दिन भारत ने दुनिया को अपनी ताकत का एहसास कराया था।
“दुनिया ने रास्ते रोके, फिर भी नहीं झुके”
प्रधानमंत्री ने कहा कि पोखरण परमाणु परीक्षण के बाद वैश्विक शक्तियां भारत को दबाव में लाने के लिए एकजुट हो गई थीं। देश पर प्रतिबंध लगाए गए, लेकिन भारत ने झुकने के बजाय दृढ़ता दिखाई। उन्होंने कहा कि “हम डरे नहीं, बल्कि मजबूती से खड़े रहे और आगे बढ़े।”
ऑपरेशन ‘शक्ति’ और आस्था का संबंध
मोदी ने बताया कि भारत ने इस परमाणु परीक्षण को “ऑपरेशन शक्ति” नाम दिया था, जो हमारी परंपरा और आध्यात्मिक सोच से जुड़ा है। उन्होंने Somnath Temple में नमन करते हुए कहा कि शिव और शक्ति की उपासना भारतीय संस्कृति का मूल है और यही शक्ति देश को आगे बढ़ाती है।
“जड़ों से जुड़ा राष्ट्र ही मजबूत बनता है”
अपने संबोधन में पीएम ने कहा कि कोई भी देश तभी लंबे समय तक मजबूत रह सकता है, जब वह अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ा रहे। उन्होंने कहा कि भारत की विरासत और आधुनिकता साथ-साथ चलती हैं और यही हमारी असली ताकत है।
सोमनाथ का इतिहास और पुनर्निर्माण का संदेश
प्रधानमंत्री ने सोमनाथ मंदिर के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि इसे कई बार तोड़ा गया, लेकिन हर बार इसका पुनर्निर्माण हुआ। उन्होंने Sardar Vallabhbhai Patel के प्रयासों को याद करते हुए कहा कि आजादी के बाद उन्होंने इस मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया और उसे पूरा किया।
“दुनिया की कोई ताकत भारत को नहीं झुका सकती”
पीएम मोदी ने कहा कि भारत की आत्मा और उसकी चेतना इतनी मजबूत है कि कोई भी ताकत उसे दबा नहीं सकती। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ अतीत का जश्न नहीं, बल्कि आने वाले हजार वर्षों के लिए प्रेरणा का अवसर है।
सांस्कृतिक विरासत से विकास तक
प्रधानमंत्री ने काशी, केदारनाथ, ओंकारेश्वर और अयोध्या जैसे तीर्थ स्थलों के विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि बीते वर्षों में भारत ने अपनी सांस्कृतिक धरोहर को नए रूप में संवारने का काम किया है। उन्होंने इसे देश के आत्मविश्वास से जोड़ा।




