The Red Ink
PM Narendra Modi की ओर से सोना न खरीदने की अपील के बाद राजधानी लखनऊ में सर्राफा कारोबारियों ने विरोध का रास्ता अपनाया। शहर के प्रमुख बाजारों में एक दिन के लिए सर्राफा कारोबार पूरी तरह बंद रहा और व्यापारियों ने धरना देकर सरकार से फैसले पर पुनर्विचार की मांग की।
बाजार बंद कर जताया विरोध
Lucknow Mahanagar Sarrafa Association और All India Jewellers and Goldsmith Federation से जुड़े कारोबारियों ने सामूहिक रूप से बाजार बंद रखा। इसके बाद आशियाना क्षेत्र में एकत्र होकर ज्वेलर्स ने धरना दिया और अपने संगठन के समर्थन में नारेबाजी की।
“पहले से मंदी, अब अपील से बढ़ी चिंता”
एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि सर्राफा कारोबार पहले ही सुस्ती के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में सोना न खरीदने की अपील से व्यापार पर और असर पड़ने की आशंका है। उन्होंने देशभर के व्यापारियों से एकजुट होकर इस मुद्दे पर आवाज उठाने की अपील की।
लाखों लोगों की रोजी-रोटी दांव पर
व्यापारियों ने कहा कि ज्वेलरी सेक्टर से सीधे और परोक्ष रूप से लाखों परिवार जुड़े हैं—चाहे वे दुकानदार हों, कारीगर हों या छोटे श्रमिक। ऐसे में किसी भी तरह की नकारात्मक अपील का असर पूरे इकोसिस्टम पर पड़ता है।
“डर से मांग घटेगी नहीं, बढ़ेगी”
फेडरेशन के प्रतिनिधियों का कहना है कि इतिहास गवाह है—जब भी सोने की खरीद को लेकर प्रतिबंध या डर का माहौल बना, लोगों की दिलचस्पी और बढ़ी है। उनका मानना है कि ऐसे संदेश उल्टा असर डाल सकते हैं और सोने की मांग को बढ़ा सकते हैं।
सरकार को सुझाया विकल्प
व्यापारियों ने सुझाव दिया कि सोने की खरीद पर रोक जैसी अपील के बजाय सरकार को Gold Monetization Scheme को प्रभावी तरीके से लागू करना चाहिए। इससे देश में मौजूद घरेलू सोने का बेहतर उपयोग हो सकेगा, आयात घटेगा और विदेशी मुद्रा की बचत भी होगी।
“सोना सिर्फ धातु नहीं, संस्कृति का हिस्सा”
धरने में शामिल व्यापारियों ने कहा कि भारत में सोना केवल एक वस्तु नहीं, बल्कि बचत, सुरक्षा, परंपरा और सामाजिक संरचना से जुड़ा अहम तत्व है। इसलिए इस क्षेत्र से जुड़े फैसले लेते समय इसके व्यापक आर्थिक और सामाजिक प्रभावों पर भी विचार जरूरी है।




