लखनऊ में आतंकी साजिश बेनकाब: पाकिस्तान से जुड़े 4 संदिग्ध गिरफ्तार, रेलवे सिस्टम को निशाना बनाने की थी प्लानिंग

The Red Ink: राजधानी लखनऊ में एक बड़ी आतंकी साजिश को अंजाम देने से पहले ही नाकाम कर दिया गया। उत्तर प्रदेश एटीएस ने चार संदिग्धों को गिरफ्तार कर एक ऐसे नेटवर्क का खुलासा किया है, जो पाकिस्तान से निर्देश लेकर देश में दहशत फैलाने की तैयारी में था।

रेलवे को निशाना बनाकर बड़ी घटना की तैयारी
जांच में सामने आया है कि यह गिरोह लखनऊ रेलवे स्टेशन के पास स्थित सिग्नल सिस्टम और अन्य अहम ठिकानों को नुकसान पहुंचाने की योजना बना रहा था। मकसद साफ था रेलवे संचालन को बाधित कर बड़ा हादसा कराना और आम लोगों में भय फैलाना।

चार आरोपी गिरफ्तार, कई आपत्तिजनक सामान बरामद
एटीएस ने जिन चार लोगों को पकड़ा है, उनकी पहचान साकिब उर्फ डेविल, विकास गहलावत उर्फ रौनक, लोकेश उर्फ पपला पंडित और अरबाब के रूप में हुई है। इनके पास से ज्वलनशील पदार्थ से भरा कैन, सात मोबाइल फोन, 24 पंपलेट और पहचान से जुड़े दस्तावेज मिले हैं। डिजिटल डिवाइस में मौजूद डाटा की गहन जांच की जा रही है।

सोशल मीडिया के जरिए जुड़ा था पाकिस्तान से कनेक्शन
जांच एजेंसियों के मुताबिक, आरोपी टेलीग्राम, इंस्टाग्राम और सिग्नल जैसे प्लेटफॉर्म्स के जरिए विदेशी संपर्क में थे। मुख्य आरोपी साकिब इन माध्यमों के जरिए पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स के संपर्क में आया और धीरे-धीरे इस नेटवर्क का सक्रिय हिस्सा बन गया।

गांव से शुरू हुआ नेटवर्क, शहरों तक फैला
साकिब ने सबसे पहले अपने गांव के ही अरबाब को जोड़ा। इसके बाद सोशल मीडिया के जरिए अन्य दो आरोपियों को इस नेटवर्क में शामिल किया गया। चारों ने मिलकर एक संगठित गिरोह तैयार किया, जो अलग-अलग जगहों पर जाकर रेकी करता और रिपोर्ट अपने आकाओं तक पहुंचाता था।

कई शहरों में कर चुके थे रेकी
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी गाजियाबाद, अलीगढ़ और लखनऊ जैसे शहरों में संवेदनशील स्थानों का निरीक्षण कर चुके थे। उन्हें गूगल लोकेशन भेजी जाती थी, जिसके आधार पर ये मौके पर जाकर वीडियो रिकॉर्ड करते और जानकारी आगे भेजते थे।

आगजनी के वीडियो बनाकर लेते थे पैसे
पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी छोटी-छोटी आगजनी की घटनाओं को अंजाम देते थे और उसका वीडियो बनाकर पाकिस्तान भेजते थे। इन वीडियो के बदले उन्हें QR कोड के जरिए भुगतान किया जाता था। यानी यह नेटवर्क दहशत फैलाने के साथ-साथ पैसों के लिए भी काम कर रहा था।

कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित कर किया गया इस्तेमाल
एजेंसियों का कहना है कि आरोपियों को सोशल मीडिया के जरिए ऐसे ग्रुप्स में जोड़ा गया, जहां धार्मिक भावनाओं का सहारा लेकर उन्हें हिंसा और अराजकता के लिए उकसाया जाता था। इसका उद्देश्य समाज में डर और तनाव पैदा करना था।

ATS की कार्रवाई से टला बड़ा खतरा
एटीएस अधिकारियों के अनुसार, समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो रेलवे सिग्नल सिस्टम को नुकसान पहुंचाकर गंभीर हादसा कराया जा सकता था। इस ऑपरेशन ने एक बड़ी साजिश को न सिर्फ रोका बल्कि पूरे नेटवर्क को भी उजागर कर दिया।

जांच जारी, और गिरफ्तारी की संभावना
फिलहाल सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है। बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है। एजेंसियों को उम्मीद है कि इस नेटवर्क से जुड़े और लोगों की पहचान जल्द सामने आ सकती है।
लखनऊ में सामने आया यह मामला दिखाता है कि आतंकी नेटवर्क अब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए अपने पैर पसारने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता ही बड़े खतरे को टालने में सबसे अहम साबित हो रही है।

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