कसमंडी किला विवाद: हिंदू संगठनों का प्रदर्शन, बकरीद की नमाज पर रोक; पुलिस छावनी में बदला इलाका

The Red Ink
लखनऊ के मलिहाबाद स्थित कसमंडी कलां गांव में पुराने किले को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। मंगलवार को कई हिंदूवादी संगठन पूजा की थाली लेकर विवादित स्थल पहुंचे, जहां पुलिस ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने सड़क पर बैठकर किले की ओर मुख करके आरती और धार्मिक पाठ किया। बढ़ते तनाव को देखते हुए प्रशासन ने इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है और बकरीद की नमाज पर भी रोक लगा दी गई है।

किले के बाहर बैठकर हुई आरती, पुलिस ने रोका रास्ता
मंगलवार को अखिल भारत हिंदू महासभा समेत कई संगठनों के कार्यकर्ता कसमंडी किले के पास पहुंचे। कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि यह कोई मस्जिद नहीं बल्कि वीर योद्धा कंसा पासी का ऐतिहासिक किला है। पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उन्हें विवादित स्थल के अंदर प्रवेश नहीं करने दिया। इसके बाद कार्यकर्ता वहीं जमीन पर बैठ गए और किले की दिशा में आरती उतारते हुए विरोध दर्ज कराया।

“मौलाना आखिर क्यों भागा?” — हिंदू महासभा का सवाल
अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शिशिर चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने किले के भीतर कब्र बनाकर धार्मिक गतिविधियां शुरू कर दी थीं। उन्होंने कहा कि गांव में विरोध बढ़ने के बाद मौलाना जमील अहमद उर्फ जॉनी अचानक गांव छोड़कर चला गया। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि मौलाना और उसके सहयोगियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और कथित किले को पासी समाज को सौंपा जाए।

क्या है पूरा विवाद?
ग्रामीणों के मुताबिक, कसमंडी कलां गांव में मौजूद यह पुराना ढांचा ऐतिहासिक कंसा पासी का किला है। दावा किया जा रहा है कि करीब चार साल पहले यहां जमील अहमद उर्फ जॉनी नाम का मौलाना आया था, जिसने पास में मस्जिद और मदरसा शुरू किया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बाद में उसने किले जैसे पुराने ढांचे का भी इस्तेमाल शुरू कर दिया। इसके बाद पासी समाज और गांव के लोगों ने विरोध जताना शुरू किया। बताया जा रहा है कि 21 मई को मौलाना गांव छोड़कर चला गया।

गांव में बढ़ी हलचल, पहुंच रहे अलग-अलग संगठन
विवाद की खबर फैलने के बाद इलाके में विभिन्न हिंदू संगठनों की सक्रियता बढ़ गई है। गौरव गोस्वामी नामक युवक अपने समर्थकों के साथ हनुमान चालीसा का पाठ करने पहुंचा। हालांकि प्रशासन ने उन्हें विवादित स्थल से बाहर ही धार्मिक कार्यक्रम करने की अनुमति दी। इससे पहले सुहेलदेव आर्मी के कार्यकर्ताओं ने भी मौके पर सुंदरकांड का पाठ किया था। संगठन के प्रमुख योगेश पासी की पुलिस से बहस भी हुई, लेकिन उन्होंने वहीं खड़े होकर पाठ पूरा किया।

प्रशासन सतर्क, बकरीद की नमाज पर रोक
स्थिति को संवेदनशील देखते हुए प्रशासन ने इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया है। अधिकारियों ने साफ किया है कि कानून व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करने वालों पर कार्रवाई होगी। एहतियातन विवादित स्थल पर बकरीद की नमाज की अनुमति नहीं दी गई है। प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और राजस्व विभाग से भी रिपोर्ट मांगी गई है।

ज्ञापन सौंपकर जांच की मांग
विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने मलिहाबाद एसडीएम को ज्ञापन सौंपते हुए विवादित भूमि की जांच, विशेष राजस्व टीम गठित करने और मामले में पारदर्शी कार्रवाई की मांग की है। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

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