The Red Ink
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक अहम बयान देते हुए कहा है कि अमेरिका ने जानबूझकर ईरानी सेना के खिलाफ उतनी आक्रामक सैन्य कार्रवाई नहीं की, जितनी आमतौर पर अन्य देशों की सेनाओं के खिलाफ की जाती है। ट्रंप का कहना है कि इस फैसले के पीछे रणनीतिक और मानवीय दोनों तरह के कारण थे। फ़ॉक्स न्यूज़ को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि कई लोग यह जानकर हैरान हो सकते हैं कि अमेरिका ने ईरानी सैन्य ढांचे को पूरी तरह निशाना क्यों नहीं बनाया और उसके प्रति अपेक्षाकृत नरम रुख क्यों अपनाया।
‘ईरानी सेना बाकी सरकारी तंत्र से अलग है’
ट्रंप ने कहा कि ईरान की सैन्य व्यवस्था को उन्होंने वहां की अन्य सरकारी संस्थाओं की तुलना में अपेक्षाकृत अलग नजरिए से देखा। उनके मुताबिक, ईरानी सेना का रवैया देश के कुछ अन्य सत्ता केंद्रों की तुलना में कम कठोर माना जा सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि किसी भी सैन्य कार्रवाई का उद्देश्य पूरे देश की संस्थागत संरचना को खत्म करना नहीं होना चाहिए, क्योंकि इसका असर आने वाली कई पीढ़ियों तक पड़ सकता है।
‘पूरी तबाही किसी देश को दशकों पीछे धकेल सकती है’
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि यदि किसी देश की प्रमुख संस्थाओं, सैन्य ढांचे और प्रशासनिक तंत्र को पूरी तरह नष्ट कर दिया जाए, तो वह देश लंबे समय तक स्थिर नहीं हो पाता। ट्रंप के अनुसार, ऐसी स्थिति में पुनर्निर्माण की प्रक्रिया बेहद कठिन हो जाती है और देश को सामान्य स्थिति में लौटने में कई दशक लग सकते हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने अपने कदमों का आकलन इसी सोच के साथ किया।
ईरान को लेकर कूटनीतिक संकेत?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव, परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर लगातार चर्चा जारी है। ट्रंप की टिप्पणी को कुछ विशेषज्ञ संभावित कूटनीतिक संदेश के रूप में भी देख रहे हैं, जिसमें सैन्य दबाव और राजनीतिक समाधान के बीच संतुलन बनाने की कोशिश दिखाई देती है।
क्षेत्रीय स्थिरता पर भी जताई चिंता
ट्रंप ने अपने बयान में यह भी संकेत दिया कि किसी देश को पूरी तरह अस्थिर करने का असर सिर्फ उस देश तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका का उद्देश्य केवल सुरक्षा सुनिश्चित करना है, न कि किसी राष्ट्र को इस हद तक नुकसान पहुंचाना कि वह भविष्य में खुद को संभाल ही न सके।




