Asaduddin Owaisi on UCC को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। अमित शाह ने रविवार को मुंबई में कहा था कि 2029 से पहले भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता यानी UCC लागू कर दी जाएगी। इसके बाद एआईएमआईएम प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
ओवैसी ने सोमवार को कहा कि UCC बराबरी का मुद्दा नहीं है, बल्कि उनके मुताबिक इसका उद्देश्य मुसलमानों को निशाना बनाना है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई पोस्ट के जरिए अमित शाह के बयान और UCC को लेकर अपनी आपत्ति जाहिर की।
Asaduddin Owaisi on UCC: ‘मुसलमानों को निशाना बनाने के लिए’
Asaduddin Owaisi on UCC प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता को केवल समानता से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि UCC का उद्देश्य मुसलमानों को निशाना बनाना है।
ओवैसी ने कहा कि देश की वास्तविक ताकत उसकी विविधता में है। उन्होंने UCC को लेकर अपनी आपत्ति जताते हुए कहा कि उनके अनुसार इसका अर्थ गैर-हिंदुओं पर हिंदू कानून लागू करना होगा।
यह ओवैसी का राजनीतिक और वैचारिक विरोध है। उनके इस बयान को UCC को लेकर एआईएमआईएम के पुराने रुख के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
अमित शाह के बयान के बाद क्यों बढ़ा विवाद?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान UCC को लेकर बड़ा दावा किया था। उन्होंने कहा था कि 2029 से पहले भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू कर दी जाएगी।
अमित शाह ने यह भी कहा था कि कई राज्यों में UCC लागू की जा चुकी है और उन्हें भरोसा है कि 2029 से पहले एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में इसे लागू कर दिया जाएगा।
इसी बयान के बाद ओवैसी ने प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र सरकार और भाजपा की UCC नीति पर सवाल उठाए। ओवैसी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में CAA और NRC से जुड़े पुराने विवादों का भी जिक्र किया।
CAA-NRC आंदोलन का भी ओवैसी ने किया जिक्र
ओवैसी ने अपने बयान में कहा कि अमित शाह के कथित ‘घमंड’ और उनकी ‘क्रोनोलॉजी’ वाली बातों के कारण 2019 में CAA और NRC के खिलाफ आंदोलन हुआ था। उन्होंने कहा कि बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुद कहना पड़ा था कि NRC नहीं होगा।
ओवैसी ने इसके साथ SIR का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि SIR के जरिए आम लोगों के सामने ऐसी परेशानी आ रही है, जिसमें उन्हें दस्तावेज लेकर सुनवाई के लिए जाना पड़ रहा है।
हालांकि, CAA-NRC और SIR को UCC के साथ जोड़ना ओवैसी की राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा है। इन मुद्दों की अपनी अलग कानूनी और प्रशासनिक पृष्ठभूमि है।
BJP के सहयोगी दलों को लेकर भी निशाना
ओवैसी ने भाजपा के सहयोगी दलों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बीजेपी के सहयोगी दलों को यह दिखाना होगा कि उनकी अपनी स्वतंत्र राजनीतिक आवाज है और वे केवल ‘छोटी बीजेपी’ नहीं हैं।
उनकी यह टिप्पणी खास तौर पर एनडीए के उन सहयोगी दलों के संदर्भ में है, जो केंद्र में भाजपा के साथ सत्ता में हैं। ओवैसी का कहना है कि सहयोगी दलों को अपनी स्वतंत्र राजनीतिक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
कानून आयोग की रिपोर्ट का दिया हवाला
ओवैसी ने UCC के विरोध में कानून आयोग का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने खुद एक लॉ कमीशन बनाया था और उसके अनुसार UCC न तो जरूरी है और न ही इसे लागू करना सही है।
ओवैसी ने देश की विविधता को भारत की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि अलग-अलग समुदायों और उनकी परंपराओं को ध्यान में रखना जरूरी है।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ओवैसी ने जिस कानून आयोग की बात कही, उसका हवाला उन्होंने अपने राजनीतिक तर्क के समर्थन में दिया है। UCC को लेकर कानून आयोग की अलग-अलग रिपोर्ट और परामर्श प्रक्रिया के अलग-अलग चरण रहे हैं, इसलिए उनके बयान को उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
‘लव जिहाद’ कानूनों पर भी ओवैसी का हमला
ओवैसी ने भाजपा शासित राज्यों में बने कुछ कानूनों का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ भाजपा UCC की बात करती है, जबकि उसके अपने राज्य ऐसे कानून बना रहे हैं जो उनके मुताबिक मुसलमानों और हिंदुओं के बीच संपत्ति की खरीद-बिक्री पर रोक लगाते हैं।
उन्होंने कथित ‘लव जिहाद’ कानूनों का भी उल्लेख किया और आरोप लगाया कि इन कानूनों का इस्तेमाल सिर्फ ईसाइयों और मुसलमानों के खिलाफ किया गया है।
इन आरोपों पर संबंधित राज्यों की सरकारों या भाजपा की ओर से इस खबर में कोई जवाब उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन्हें ओवैसी के आरोप और राजनीतिक बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
UCC पर आमने-सामने अमित शाह और ओवैसी
Asaduddin Owaisi on UCC के बाद समान नागरिक संहिता एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गई है। अमित शाह ने 2029 से पहले एनडीए शासित 21 राज्यों में UCC लागू करने का लक्ष्य बताया है, जबकि ओवैसी ने इसका खुलकर विरोध किया है।
एक तरफ केंद्र सरकार और भाजपा UCC को समान नागरिक कानून की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखती है। दूसरी तरफ ओवैसी जैसे नेता इसे धार्मिक और सामाजिक विविधता से जोड़कर इसका विरोध कर रहे हैं।
अब आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि एनडीए शासित राज्य UCC को लेकर क्या कदम उठाते हैं और केंद्र सरकार इस मुद्दे को किस तरह आगे बढ़ाती है। अमित शाह की 2029 से पहले सभी 21 एनडीए राज्यों में UCC लागू करने की समयसीमा ने इस बहस को और महत्वपूर्ण बना दिया है।




