“मेरठ से उठेगा नया ‘आर्थिक स्वतंत्रता आंदोलन’…” अखिलेश यादव का BJP पर बड़ा हमला

The Red Ink: 1857 की क्रांति का जिक्र कर साधा निशाना, बोले- नीतियों से अर्थव्यवस्था पर कब्ज़े की साज़िश; व्यापारियों से एकजुट होने की अपील…

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने केंद्र और प्रदेश की Bharatiya Janata Party सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए एक बार फिर सियासी पारा बढ़ा दिया है। अखिलेश यादव ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में मेरठ का जिक्र करते हुए कहा कि जिस धरती से Indian Rebellion of 1857 की शुरुआत हुई थी, वहीं से अब एक नया “आर्थिक स्वतंत्रता आंदोलन” जन्म लेगा जो मौजूदा “साम्राज्यवादी सत्ताधारी व्यवस्था” के खिलाफ होगा।

‘किसानी से व्यापार तक खत्म करने की साजिश’
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने पहले भूमि अधिग्रहण और “काले कानूनों” जैसे कदमों के जरिए खेती-किसानी को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की और अब अंतरराष्ट्रीय डील्स व मल्टीनेशनल कंपनियों के प्रभाव में देश के पारंपरिक व्यापार को खत्म किया जा रहा है।

उन्होंने दावा किया कि इससे अर्थव्यवस्था पर कुछ चुनिंदा बड़े पूंजीपतियों और सत्ता से जुड़े लोगों का नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश हो रही है, जबकि छोटे व्यापारियों और पारंपरिक कारोबारी वर्ग को हाशिए पर धकेला जा रहा है।

‘भाजपा किसी की सगी नहीं’- व्यापारियों को चेतावनी
सपा प्रमुख ने कहा कि जो बड़े व्यापारी और स्टॉकिस्ट आज भी बीजेपी के साथ हैं, वे भी जल्द ही इसकी नीतियों का शिकार बनेंगे। उन्होंने कहा कि अब छोटे दुकानदारों, कारखाना मालिकों, एमएसएमई सेक्टर और पारंपरिक व्यापारियों के बीच यह समझ बन रही है कि “भाजपा किसी की सगी नहीं है” और पार्टी पर बड़े चंदों व कमीशन आधारित राजनीति का आरोप लगाया।

‘बुलडोज़र अर्थव्यवस्था पर चल रहा है’
अपने पोस्ट में अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि बीजेपी का “बुलडोज़र” केवल मकानों या दुकानों पर नहीं, बल्कि देश की आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था पर चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा आर्थिक नीतियां देश को “आर्थिक गुलामी” की ओर धकेल रही हैं, जिसका विरोध व्यापारी वर्ग से लेकर छोटे रेहड़ी-पटरी वालों तक सभी करेंगे।

मेरठ बना सियासी प्रतीक
अखिलेश यादव ने मेरठ को एक बार फिर आंदोलन का केंद्र बताते हुए कहा कि यह शहर न तो 1857 की विरासत भूला है और न ही झुकेगा। उन्होंने कहा कि जिस तरह बीजेपी ने 2014, 2019 और 2024 के चुनावों की शुरुआत मेरठ से की थी, उसी तरह उसके “अंत की शुरुआत” भी यहीं से होगी।

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