PM Modi BRICS Summit: तीसरे दशक में पहुंचा BRICS, पीएम मोदी बोले- अब दुनिया को चाहिए ठोस नतीजे

PM Modi BRICS Summit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के समापन सत्र में कहा कि BRICS अपने तीसरे दशक में प्रवेश कर रहा है और अब दुनिया इस समूह से ठोस नतीजों की उम्मीद करती है। उन्होंने कहा कि पिछले दो दिनों की चर्चाओं ने इस विश्वास को और मजबूत किया है कि BRICS केवल देशों का समूह नहीं, बल्कि वैश्विक चुनौतियों के समाधान देने वाला प्रभावी मंच बन चुका है।

नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के समापन पर प्रधानमंत्री ने सदस्य देशों और साझेदार देशों की व्यापक भागीदारी को समूह की बढ़ती प्रासंगिकता, खुलेपन और समावेशी स्वरूप का प्रमाण बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि BRICS के भीतर लिए गए फैसलों और शुरू की गई पहलों को समयबद्ध कार्रवाई से जोड़ना होगा, ताकि उनका वास्तविक लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।

भारत की अध्यक्षता में हुए इस सम्मेलन में New Delhi Declaration 2026 को सर्वसम्मति से अपनाया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह घोषणापत्र BRICS देशों के साझा संकल्प को दिशा देता है और अब अगली जिम्मेदारी इन फैसलों को जमीन पर लागू करने की है।

PM Modi BRICS Summit: अब सिर्फ दस्तावेज नहीं, जमीन पर परिणाम चाहिए

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में BRICS के कामकाज में व्यावहारिकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल रूपरेखा तैयार करना या दस्तावेज जारी करना पर्याप्त नहीं है। जरूरी यह है कि इन फैसलों का असर वास्तविक दुनिया में दिखाई दे।

मोदी के संदेश का केंद्र यही था कि BRICS की बैठकों में होने वाली चर्चा को ठोस कार्रवाई में बदला जाए। स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा, तकनीक, व्यापार, डिजिटल सहयोग और विकास जैसे क्षेत्रों में जो भी फैसले लिए जाते हैं, उन्हें समयबद्ध तरीके से लागू किया जाना चाहिए।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि विकास का लाभ समाज के आखिरी व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। यानी BRICS सहयोग का मूल्यांकन केवल बैठकों और घोषणाओं की संख्या से नहीं, बल्कि उससे पैदा होने वाले वास्तविक बदलाव से किया जाना चाहिए।

New Delhi Declaration से मिली नई दिशा

18वें BRICS शिखर सम्मेलन की प्रमुख उपलब्धियों में New Delhi Declaration 2026 का सर्वसम्मति से अपनाया जाना रहा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह घोषणापत्र सदस्य देशों के साझा दृष्टिकोण और भविष्य के सहयोग को स्पष्ट दिशा देता है।

घोषणापत्र में BRICS सहयोग के कई क्षेत्रों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दिखाई गई है। इनमें वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार, ग्लोबल साउथ की भूमिका, डिजिटल अर्थव्यवस्था, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, विज्ञान एवं तकनीक, स्वास्थ्य, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा तथा टिकाऊ बुनियादी ढांचे जैसे विषय शामिल हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच संस्थाओं को भी बदलती वास्तविकताओं के अनुरूप विकसित होना होगा। उन्होंने BRICS को अधिक व्यावहारिक, विकास-केंद्रित और लोगों की जरूरतों के प्रति उत्तरदायी बनाने पर जोर दिया।

BRICS के 20 साल, अब नई जिम्मेदारी

साल 2026 BRICS के लिए खास है क्योंकि इस वर्ष समूह के गठन के 20 साल पूरे हो रहे हैं। 2006 में BRIC के रूप में शुरू हुआ यह समूह बाद में दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने के साथ BRICS बना और अब इसका विस्तार कई नए सदस्य और साझेदार देशों तक हो चुका है।

प्रधानमंत्री मोदी ने BRICS के इस सफर का उल्लेख करते हुए कहा कि समूह अब अपने तीसरे दशक की ओर बढ़ रहा है। इसका मतलब है कि BRICS के सामने अब अपनी प्रासंगिकता को केवल बनाए रखने की नहीं, बल्कि उसे ठोस परिणामों में बदलने की चुनौती भी है।

ताजा जानकारी के मुताबिक, BRICS के सदस्य और साझेदार देशों की संख्या बढ़ने के साथ समूह का दायरा भी व्यापक हुआ है। ऐसे में विभिन्न देशों की प्राथमिकताओं को एक साझा एजेंडे में बदलना BRICS के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है।

ग्लोबल साउथ की आवाज को और मजबूत करने पर जोर

BRICS के विस्तार के साथ ग्लोबल साउथ की भूमिका भी इस सम्मेलन के प्रमुख मुद्दों में रही। प्रधानमंत्री मोदी ने लगातार इस बात पर जोर दिया कि विकासशील देशों की आवाज को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में अधिक महत्व मिलना चाहिए।

New Delhi Declaration में भी वैश्विक शासन व्यवस्था को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण और प्रभावी बनाने तथा ग्लोबल साउथ की भूमिका को मजबूत करने की दिशा में सहयोग की बात सामने आई है।

भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र समेत अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार और विकासशील देशों की बेहतर भागीदारी की वकालत करता रहा है। BRICS के मंच से इस मुद्दे को आगे बढ़ाना भारत की अध्यक्षता की प्रमुख प्राथमिकताओं में भी रहा।

चीन को दी अगले साल की अध्यक्षता के लिए शुभकामनाएं

समापन संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगले वर्ष BRICS की अध्यक्षता संभालने जा रहे चीन को शुभकामनाएं दीं। भारत के बाद 2027 में चीन समूह की अध्यक्षता करेगा।

यह बदलाव ऐसे समय में हो रहा है जब BRICS का एजेंडा तेजी से आर्थिक सहयोग से आगे बढ़कर AI, डिजिटल तकनीक, स्वास्थ्य, जलवायु, ऊर्जा, आपूर्ति श्रृंखला और वैश्विक शासन जैसे क्षेत्रों तक फैल रहा है।

सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी BRICS के आर्थिक और तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए कई प्रस्ताव रखे। इनमें विशेष आर्थिक क्षेत्र साझेदारी, AI सहयोग, डिजिटल इकोसिस्टम और स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्र शामिल हैं। ऐसे में 2027 की चीनी अध्यक्षता के दौरान आर्थिक और तकनीकी सहयोग BRICS के एजेंडे में और महत्वपूर्ण हो सकता है।

भारत ने सभी सहभागी देशों का जताया आभार

प्रधानमंत्री मोदी ने नई दिल्ली BRICS शिखर सम्मेलन को सफल बनाने में योगदान देने वाली सभी टीमों, सदस्य देशों और सहभागी देशों का आभार व्यक्त किया।
भारत की मेजबानी में दो दिनों तक चले सम्मेलन में BRICS सदस्य देशों के नेताओं के साथ साझेदार देशों और अन्य आमंत्रित प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।

सम्मेलन के दौरान वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों के साथ-साथ BRICS के भीतर सहयोग को मजबूत करने के विभिन्न रास्तों पर चर्चा हुई।

समापन के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि चर्चाएं सार्थक और रचनात्मक रही हैं। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि BRICS की विविधता के बावजूद सदस्य देशों के बीच सहयोग की साझा प्रतिबद्धता स्पष्ट दिखाई देती है।

PM Modi BRICS Summit का सबसे बड़ा संदेश क्या?

PM Modi BRICS Summit के समापन संबोधन का सबसे बड़ा संदेश यही रहा कि BRICS को अब घोषणाओं और बैठकों से आगे बढ़कर वास्तविक परिणाम देने वाला मंच बनना होगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने जिस “ठोस नतीजों” की बात कही, उसमें समयबद्ध कार्रवाई और आम लोगों तक प्रभाव पहुंचाने की जरूरत प्रमुख रही। New Delhi Declaration ने सहयोग की दिशा तय कर दी है, लेकिन अब उसकी वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि सदस्य देश उसमें किए गए संकल्पों को कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से लागू करते हैं।

भारत की अध्यक्षता समाप्त होने के साथ BRICS अब अगले चरण में प्रवेश कर रहा है। 20 साल का सफर पूरा कर चुका यह समूह अगले साल चीन की अध्यक्षता में जाएगा। ऐसे में भारत का “ठोस नतीजों” वाला संदेश BRICS के अगले चरण के लिए एक महत्वपूर्ण कसौटी बन सकता है।

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