Khelo India Samvad: PM मोदी की बड़ी अपील, ओलंपिक में ज्यादा खेलों में उतरे भारत; 2036 के लिए टैलेंट हंट पर जोर

Khelo India Samvad में PM मोदी ने बताई ओलंपिक की बड़ी चुनौती…

Khelo India Samvad के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की ओलंपिक तैयारियों को लेकर बड़ा संदेश दिया। गुरुवार को युवाओं को वर्चुअली संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि अगर भारत को ओलंपिक में अपना प्रदर्शन बेहतर करना है तो सिर्फ उन खेलों पर निर्भर नहीं रहना होगा, जिनमें देश पहले से मजबूत है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को उन खेलों में भी अपनी भागीदारी बढ़ानी होगी, जिनमें अब तक देश की मौजूदगी बहुत कम रही है या भारतीय टीमों ने हिस्सा ही नहीं लिया है। उन्होंने इसे 2036 ओलंपिक की तैयारियों से जोड़ते हुए ज्यादा से ज्यादा प्रतिभाओं को पहचानने और उन्हें सही खेल के लिए तैयार करने पर जोर दिया।

ओलंपिक के आधे खेलों में भारत की भागीदारी नहीं

पीएम मोदी ने कहा कि ओलंपिक में भारत के बेहतर प्रदर्शन के रास्ते में एक बड़ी चुनौती यह है कि देश कई खेलों में प्रतिस्पर्धा ही नहीं करता। उन्होंने बताया कि पेरिस ओलंपिक 2024 में भारत ने कुल 32 खेलों में से 16 में हिस्सा लिया था।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब भारत कई खेलों में मैदान में ही नहीं उतरता, तो उन खेलों में उपलब्ध पदकों के लिए प्रतिस्पर्धा करने का सवाल ही नहीं उठता। दुनिया के कई देश ऐसे खेलों में पदक हासिल करते हैं, जबकि भारत उनमें हिस्सा तक नहीं लेता।

उन्होंने कहा कि देश को अपनी पदक संख्या बढ़ाने के लिए नए खेलों में भी खिलाड़ियों को तैयार करना होगा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता विकसित करनी होगी।

2036 ओलंपिक की तैयारी सिर्फ स्टेडियम बनाने तक नहीं

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 2036 ओलंपिक की तैयारी का मतलब केवल खेलों के लिए बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना नहीं है। इसके साथ उन खिलाड़ियों की पहचान भी जरूरी है, जो आने वाले वर्षों में अलग-अलग खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व कर सकें।

उन्होंने कहा कि देश को अभी से ऐसे खिलाड़ियों को तैयार करने की दिशा में काम करना होगा, जो 2036 ओलंपिक के लिए क्वालिफाई कर सकें और वहां भारत की ओर से प्रतिस्पर्धा करें।

पीएम मोदी के मुताबिक, इसके लिए जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक है।

5 से 15 साल के बच्चों पर टैलेंट हंट का फोकस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से दिए अपने भाषण में 5 से 15 साल की उम्र के बच्चों के लिए देशव्यापी प्रतिभा खोज अभियान की घोषणा की थी। Khelo India Samvad में भी उन्होंने इसी पहल की जरूरत और उद्देश्य को सामने रखा।

इस अभियान का मकसद बच्चों को सिर्फ उनकी पसंद के खेल तक सीमित रखना नहीं है। सरकार का जोर यह पता लगाने पर है कि किस बच्चे में किस खेल के लिए ज्यादा क्षमता और स्वाभाविक योग्यता है।

पीएम मोदी ने कहा कि किसी बच्चे की प्रतिभा की सही पहचान होने के बाद उसे उसी खेल के अनुसार प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। इससे कम उम्र में ही खिलाड़ियों को सही दिशा देने और भविष्य के लिए मजबूत प्रतिभाएं तैयार करने में मदद मिल सकती है।

‘सिर्फ पसंद नहीं, क्षमता के हिसाब से भी खेल चुनना होगा’

प्रधानमंत्री ने कहा कि टैलेंट हंट के दौरान यह देखना जरूरी होगा कि बच्चे की रुचि किस खेल में है, लेकिन सिर्फ रुचि ही अंतिम आधार नहीं हो सकती। यह भी समझना होगा कि उसकी शारीरिक क्षमता और प्रतिभा किस खेल के लिए अधिक उपयुक्त है।

यही वजह है कि 5 से 15 साल के बच्चों की पहचान से जुड़े अभियान को अहम माना जा रहा है। शुरुआती उम्र में प्रतिभा की पहचान करके उन्हें सही प्रशिक्षण और सुविधाएं उपलब्ध कराने से भविष्य में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए बेहतर खिलाड़ी तैयार किए जा सकते हैं।

खेलों को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने पर जोर

Khelo India Samvad में प्रधानमंत्री ने खेलों के महत्व को केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने कहा कि खेल राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया का भी महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

उनका कहना था कि देश में खेलों का ऐसा माहौल तैयार होना चाहिए, जिसमें बच्चे और युवा खेल को करियर के तौर पर भी देख सकें। इसके लिए प्रतिभाओं को शुरुआती स्तर से ही सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना अहम होगा।

प्रधानमंत्री ने युवाओं को भरोसा दिलाया कि खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने के दौरान सरकार उनकी हर संभव मदद करेगी।

खिलाड़ियों को हर जरूरी मदद का भरोसा

पीएम मोदी ने युवा प्रतिभागियों से कहा कि खेल में करियर बनाने के दौरान उन्हें जिस भी सहायता की जरूरत होगी, सरकार उनके साथ खड़ी रहेगी।

2036 ओलंपिक को ध्यान में रखते हुए भारत के सामने अब लंबी अवधि की तैयारी की चुनौती है। ज्यादा खेलों में भागीदारी, कम उम्र में प्रतिभाओं की पहचान और खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार करना इस तैयारी के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।

प्रधानमंत्री के संदेश का साफ संकेत है कि भारत को ओलंपिक में बेहतर प्रदर्शन के लिए सिर्फ मौजूदा मजबूत खेलों पर निर्भर रहने के बजाय नए खेलों में भी अपनी मौजूदगी बढ़ानी होगी।

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