Eid Milad-un-Nabi: उत्तर प्रदेश में बुधवार को ईद मिलादुन्नबी यानी बारावफात का पर्व अकीदत, अमन और भाईचारे के संदेश के साथ मनाया गया। लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, प्रयागराज, मुरादाबाद, बुलंदशहर, संभल, बस्ती और फिरोजाबाद समेत कई शहरों में जुलूस निकाले गए। इस दौरान धार्मिक झंडों के साथ कई जगह तिरंगा भी नजर आया।
लखनऊ में इस मौके पर हिंदू समाज की ओर से मुस्लिम धर्मगुरुओं का स्वागत कर गंगा-जमुनी तहजीब की खूबसूरत मिसाल पेश की गई। लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर त्योहार की बधाई दी और अमन, मोहब्बत व भाईचारे का संदेश दिया।
लखनऊ में हिंदुओं ने किया Eid Milad-un-Nabi जुलूस का स्वागत
लखनऊ में बारावफात के जुलूस के दौरान सांप्रदायिक सौहार्द की तस्वीर देखने को मिली। हिंदू समाज की ओर से पंडित कृष्ण चंद्र शुक्ल ने जुलूस में शामिल लोगों और मुस्लिम धर्मगुरुओं का स्वागत किया।
उन्होंने मौलाना महमूदुल हसन समेत कई मुस्लिम धर्मगुरुओं को माला पहनाई और शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। इस दौरान दोनों समुदायों के लोग एक-दूसरे से गले मिले।
पंडित कृष्ण चंद्र शुक्ल ने बताया कि यह परंपरा पिछले करीब 20 वर्षों से चली आ रही है। उन्होंने कहा कि सभी लोग एक-दूसरे के त्योहारों में शामिल होकर मिल-जुलकर खुशियां मनाते हैं और एक-दूसरे के धर्म का सम्मान करते हैं।
20 साल पुरानी परंपरा बनी भाईचारे की मिसाल
लखनऊ में हुए इस स्वागत ने एक बार फिर शहर की गंगा-जमुनी तहजीब की तस्वीर सामने रखी। पंडित कृष्ण चंद्र शुक्ल के मुताबिक, वर्षों से चली आ रही इस परंपरा में हिंदू समाज बारावफात के जुलूस का स्वागत करता रहा है।
उन्होंने कहा कि सभी लोग एक ही समाज का हिस्सा हैं और प्रेम-मोहब्बत के साथ भाई की तरह रहते हैं। उनके मुताबिक, एक-दूसरे के त्योहारों में शामिल होना और उनका सम्मान करना सामाजिक सौहार्द को मजबूत करता है।
Eid Milad-un-Nabi पर तिरंगे के साथ निकले जुलूस
लखनऊ में इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने भी त्योहार के मौके पर अमन और भाईचारे का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब की पैदाइश की खुशी में जुलूस निकाला जा रहा है, मिठाई बांटी जा रही है और लोगों को मुबारकबाद दी जा रही है।
मौलाना खालिद रशीद ने बताया कि जुलूस को लेकर पहले ही गाइडलाइन जारी की गई थी।
लोगों से धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले या विवादित नारे नहीं लगाने और एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करने की अपील की गई थी।
उन्होंने खास तौर पर जुलूस में तिरंगे की मौजूदगी का जिक्र करते हुए इसे देश के प्रति मोहब्बत का प्रतीक बताया।
वाराणसी में 5 किलोमीटर लंबा जुलूस
वाराणसी में मदहे सहाबा का बड़ा जुलूस निकाला गया। करीब 5 किलोमीटर लंबे इस जुलूस में प्रशासन और कमेटी की सहमति के बाद वाहनों की संख्या सीमित रखी गई।
जानकारी के मुताबिक, पहले 1,500 वाहनों की अनुमति की चर्चा थी, लेकिन बाद में केवल 100 गाड़ियों को जुलूस में शामिल किया गया। जुलूस में 2 हजार से ज्यादा लोग शामिल हुए। इस दौरान बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक भी मौजूद रहे।
बस्ती और फिरोजाबाद में अमन-मोहब्बत का संदेश
बस्ती में ईद-मिलादुन्नबी के जुलूस में हजारों अकीदतमंद इस्लामिक झंडों के साथ शामिल हुए। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक बड़ी संख्या में लोगों ने जुलूस में हिस्सा लिया।
इस दौरान पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब की शिक्षाओं को याद करते हुए अमन, मोहब्बत और भाईचारे का संदेश दिया गया।
फिरोजाबाद में भी जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी के मौके पर जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला गया। इसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। इमामों और उलेमाओं का सम्मान किया गया और लोगों ने पैगंबर हजरत मोहम्मद की सीरत को याद करते हुए शांति और भाईचारे का संदेश दिया।
बच्चों और युवाओं ने भी लिया हिस्सा
औरैया में बारावफात के मौके पर निकाले गए जुलूस में बड़ी संख्या में बच्चे भी शामिल हुए। निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए लोगों ने धार्मिक नारे लगाए और पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के जीवन एवं संदेश को याद किया।
बस्ती, संभल और अन्य शहरों में भी बच्चे, युवा और बुजुर्ग जुलूस का हिस्सा बने। कई जगहों पर धार्मिक कार्यक्रमों के साथ लोगों ने आपसी सौहार्द और शांति की अपील की।
बुलंदशहर में दिखे पारंपरिक करतब
बुलंदशहर में जुलूस-ए-मोहम्मदी के दौरान पारंपरिक कलाबाजी और लट्ठबाजी का प्रदर्शन भी किया गया। कलाकारों ने तरह-तरह के करतब दिखाए।
इस दौरान तलवारबाजी, घूमर और अन्य पारंपरिक प्रदर्शन भी देखने को मिले। जुलूस में बड़ी संख्या में लोग इस्लामी झंडे लेकर शामिल हुए।
सुरक्षा के भी रहे पुख्ता इंतजाम
प्रदेशभर में Eid Milad-un-Nabi के जुलूसों को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए। जुलूस मार्गों पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई।
कई शहरों में CCTV कैमरों और ड्रोन के जरिए निगरानी की गई। ट्रैफिक पुलिस ने भीड़ और जुलूस के कारण यातायात प्रभावित न हो, इसके लिए कई जगह डायवर्जन लागू किए।
कुल मिलाकर उत्तर प्रदेश में बारावफात के मौके पर धार्मिक आस्था के साथ अमन, मोहब्बत और सामाजिक भाईचारे की तस्वीरें भी सामने आईं।
खासकर लखनऊ में हिंदू समाज की ओर से मुस्लिम धर्मगुरुओं का सम्मान और जुलूस का स्वागत गंगा-जमुनी तहजीब की उस परंपरा को सामने लाया, जिसमें अलग-अलग समुदाय एक-दूसरे के त्योहारों में शामिल होकर खुशियां साझा करते हैं।




