Bengal Abdul Sheikh Case: पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले के करीसुंदा गांव में सरकारी स्कूल की बदहाली को लेकर आवाज उठाने वाले 25 वर्षीय शेख अब्दुल हाफिज के पिता की मौत के बाद मामला बेहद भावुक और गंभीर हो गया है।
अब्दुल का आरोप है कि स्कूल की स्थिति सामने लाने के बाद कुछ BJP कार्यकर्ताओं ने उनके और उनके पिता शेख मोहम्मद मफीक के साथ मारपीट की। गंभीर चोटों के बाद 15 अगस्त को उनके पिता की मौत हो गई।
अब्दुल का दावा है कि उन्हें भी पीटा गया और उनके ऊपर आतंकी कनेक्शन जैसे आरोप लगाए गए। मामले में पुलिस अब तक 11 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।
Bengal Abdul Sheikh Case में पिता की मौत, बेटे ने कहा- ‘पापा को कभी गले नहीं लगा पाया’
25 साल के शेख अब्दुल हाफिज अपने पिता को याद करते हुए भावुक हो जाते हैं। उनका कहना है कि उनके पिता ने उन्हें अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना सिखाया था और अब वह गांव के स्कूलों की हालत सुधारने की लड़ाई जारी रखेंगे।
अब्दुल कहते हैं कि उन्हें इस बात का अफसोस है कि वह अपने पिता को आखिरी समय में ठीक से गले नहीं लगा पाए और अपना प्यार नहीं जता पाए।
उनके मुताबिक, पिता शेख मोहम्मद मफीक दुकानों तक थोक का सामान पहुंचाने का काम करते थे और उनकी कमाई से ही परिवार का खर्च चलता था। पिता की मौत के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति भी मुश्किल हो गई है।
करीसुंदा गांव में अब्दुल के घर के बाहर सुरक्षा के लिए पुलिसकर्मी तैनात हैं। घर में अब्दुल, उनकी मां और उनकी 21 वर्षीय बहन हैं। दिल्ली से आए करीब 12 CJP कार्यकर्ता भी परिवार के साथ ठहरे हुए हैं।
जंतर-मंतर से लौटने के बाद शुरू हुआ विवाद
अब्दुल के मुताबिक, वह शुरुआत से ही CJP के आंदोलन से जुड़े हुए हैं और दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी प्रदर्शन में शामिल हुए थे। वह 26 जुलाई तक दिल्ली में थे और 27 जुलाई को ट्रेन से गांव वापस लौटे।
अब्दुल का दावा है कि घर लौटने के अगले ही दिन यानी 28 जुलाई को कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया और उनके साथ मारपीट की।
उनके मुताबिक, उनसे पूछा गया कि वह दिल्ली क्यों गए थे। इसके बाद उनकी स्कूटी तोड़ने की कोशिश की गई और उन्हें धमकी भी दी गई। ग्रामीणों के बीच-बचाव के बाद मामला शांत हुआ, लेकिन अब्दुल का आरोप है कि उनका पुराना मोबाइल फोन भी छीन लिया गया, जिसमें उनके मुताबिक कई जरूरी सबूत थे।
अब्दुल का कहना है कि उन्होंने पहली घटना की शिकायत इंडस पुलिस स्टेशन में भी की थी, लेकिन उनके मुताबिक पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया।
स्कूल की हालत दिखाने के बाद रात में घर पर हमला?
अब्दुल के मुताबिक, 13 अगस्त की सुबह वह अपने पुराने सरकारी प्राइमरी स्कूल पहुंचे थे। उनका कहना है कि वह ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत स्कूल की समस्याओं को सामने लाना चाहते थे।
उन्होंने स्कूल के प्रभारी शिक्षक काशीनाथ डे से स्कूल की स्थिति दिखाने की अनुमति मांगी। अब्दुल के अनुसार, इसी दौरान उनसे नाम और पता पूछा गया।
अब्दुल आरोप लगाते हैं कि उसी रात करीब 8 बजे कुछ लोग उनके घर पहुंचे। उनके मुताबिक, घर की बिजली चली गई और अंधेरे में उनके साथ मारपीट शुरू कर दी गई।
अब्दुल का आरोप है कि हमलावरों ने उन्हें थप्पड़, लात और घूंसे मारे। उन्होंने यह भी दावा किया कि एक व्यक्ति धारदार सरिया लेकर आया था, लेकिन अंधेरे में वह उसके हमले से बच गए।
अब्दुल के अनुसार, उनके पिता को भी बुरी तरह पीटा गया। परिवार ने पुलिस को बुलाया, लेकिन उनका आरोप है कि पुलिस की मौजूदगी के बावजूद आरोपी धमकियां देते रहे।
ये सभी आरोप अब्दुल और उनके परिवार की ओर से लगाए गए हैं। मामले में आरोपों की न्यायिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
अस्पताल में भी पिता को धमकी देने का आरोप
अब्दुल का दावा है कि हमले में उनके पिता को ज्यादा चोटें आई थीं। इलाज के लिए अस्पताल ले जाने के बाद भी कथित तौर पर आरोपियों ने उनके पिता के साथ मारपीट की और पुलिस के सामने धमकी दी।
अब्दुल के मुताबिक, 14 अगस्त की सुबह करीब 10 से 11 बजे के बीच तीन लोग उनके घर पहुंचे और परिवार पर समझौते के लिए दबाव बनाया।
उनका आरोप है कि परिवार से फेसबुक लाइव के जरिए माफी मांगने के लिए कहा गया था। हालांकि, अब्दुल और उनके परिवार ने ऐसा करने से इनकार कर दिया।
इसके अगले दिन यानी 15 अगस्त को शेख मोहम्मद मफीक की मौत हो गई।
पिता की मौत के बाद गांव में पसरा सन्नाटा
शेख मोहम्मद मफीक की मौत के बाद करीसुंदा गांव में तनाव और डर का माहौल बताया जा रहा है। कई आरोपी परिवारों के घरों पर ताले लगे हैं और पड़ोसियों के मुताबिक कुछ परिवार गांव छोड़कर चले गए हैं।
पुलिस ने इस मामले में अब तक 11 लोगों को गिरफ्तार किया है।
मामले में पांच लोगों के खिलाफ FIR दर्ज होने की जानकारी है। इनमें शेख आजाद, श्रीकांत माझी, रोहित माझी, अष्टम माझी और प्रशांत माझी उर्फ रुइदास के नाम बताए गए हैं। FIR में 8 से 10 अज्ञात लोगों का भी जिक्र है।
स्कूल में अचानक मरम्मत के काम पर भी उठे सवाल
अब्दुल का आरोप है कि घटना के बाद गांव के सरकारी प्राइमरी स्कूल में तेजी से पुताई और मरम्मत का काम कराया गया।
अब्दुल के घर से करीब 200 मीटर दूर स्थित स्कूल की दीवारों पर नया पेंट और प्लास्टर के निशान दिखाई देने की बात रिपोर्ट में कही गई है। कुछ ग्रामीणों और बच्चों ने भी बताया कि काम हाल में हुआ है।
हालांकि, स्कूल के शिक्षक आनंद मंडल का दावा है कि मरम्मत का काम करीब 8 से 10 महीने पहले कराया गया था।
स्कूल में छह कमरे, दो टॉयलेट और स्मार्ट क्लास के लिए मॉनिटर होने की जानकारी दी गई है। प्रभारी शिक्षक काशीनाथ डे के मुताबिक, अब्दुल और उनकी बहन ने इसी स्कूल में पढ़ाई की है।
बांकुड़ा के DM अनिल दास गुप्ता के मुताबिक, स्कूल को लेकर कोई बड़ी शिकायत नहीं है। उनके अनुसार स्कूल में करीब 150 बच्चे और चार शिक्षक हैं। लड़कियों के लिए एक अतिरिक्त टॉयलेट का काम चल रहा है और स्मार्ट क्लासरूम भी तैयार किए जा रहे हैं।
BJP विधायक के साथ आरोपियों की तस्वीरें वायरल
करीसुंदा गांव इंडस विधानसभा क्षेत्र में आता है, जहां 2021 से BJP के निर्मल धारा विधायक हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 के विधानसभा चुनाव के दौरान गांव में BJP के कार्यक्रम और विधायक के स्वागत में आरोपी बताए जा रहे कुछ लोग मौजूद थे। इनमें शेख आजाद और प्रशांत माझी के नाम सामने आए हैं।
हालांकि, इन तस्वीरों या कथित राजनीतिक नजदीकी से यह साबित नहीं होता कि संबंधित विधायक का इस हमले में कोई प्रत्यक्ष संबंध था।
घटना के बाद विधायक निर्मल धारा का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला।
अब्दुल के घर पुलिस का पहरा, मां की आंखों में बेटे और पति का दर्द
घटना के बाद अब्दुल के घर के बाहर पुलिस तैनात है। बिना पुलिस की अनुमति के घर में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है।
पिता के बारे में बात होते ही अब्दुल की मां अपने दोनों बच्चों को गले लगा लेती हैं। परिवार के लिए यह सिर्फ एक विवाद नहीं, बल्कि घर के कमाने वाले सदस्य को खोने का दर्द है।
अब्दुल कहते हैं कि उनके पिता ने उन्हें सिखाया था कि जहां अन्याय हो, वहां आवाज उठानी चाहिए। अब पिता नहीं हैं, लेकिन उनका कहना है कि वह स्कूलों की बदहाली और अन्याय के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।
Bengal Abdul Sheikh Case में पुलिस की कार्रवाई जारी है। 11 गिरफ्तारियों के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि शेख मोहम्मद मफीक की मौत के पीछे पूरी घटना की सच्चाई क्या थी और लगाए गए आरोपों की जांच में आगे क्या सामने आता है।




