Rajasthan School Inspection Row: मदन दिलावर के बदले सुर, CJP को लेकर नरम पड़े शिक्षा मंत्री

राजस्थान में स्कूल निरीक्षण विवाद पर बदला शिक्षा मंत्री का रुख…

Rajasthan School Inspection Row को लेकर राजस्थान की राजनीति में नया मोड़ देखने को मिला है। सरकारी स्कूलों की कमियों को उजागर करने के अभियान पर पहले सख्त रुख अपनाने वाले राज्य के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर अब अपेक्षाकृत नरम नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा है कि स्कूलों की कमियों को सामने लाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन समाधान संवाद और सहयोग से ही निकलेगा।

पहले सख्त बयान, अब संवाद की बात

राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि राज्य सरकार सरकारी स्कूलों को बेहतर, सुरक्षित और आधुनिक बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने बताया कि स्कूल भवनों की मरम्मत, आधारभूत सुविधाओं, स्मार्ट क्लास, प्रयोगशालाओं और छात्रों के लिए जरूरी संसाधनों के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

मंत्री ने अपने पोस्ट में कहा कि विद्यालयों की कमियों को उजागर करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है, लेकिन समस्याओं के समाधान के लिए सकारात्मक सहभागिता और संवाद जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि मजबूत सरकारी विद्यालय ही राजस्थान के भविष्य को मजबूत बनाएंगे।

CJP के अभियान के बाद बढ़ा था विवाद

यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब Cockroach Janta Party (CJP) ने राजस्थान के सरकारी स्कूलों की स्थिति का निरीक्षण करने और कमियों को सार्वजनिक करने के लिए अभियान शुरू करने की घोषणा की। पार्टी के नेताओं ने दावा किया था कि उन्हें विभिन्न जिलों से स्कूलों की बदहाल स्थिति को लेकर शिकायतें मिल रही हैं।

इसके बाद शिक्षा विभाग ने स्कूल परिसरों में बाहरी लोगों के प्रवेश, फोटो और वीडियोग्राफी को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए थे। आदेश में कहा गया था कि किसी भी आगंतुक को विजिटर रजिस्टर में एंट्री करनी होगी और स्कूल के विभिन्न हिस्सों में केवल अधिकृत शिक्षक या अधिकारी की मौजूदगी में ही प्रवेश मिल सकेगा।

पहले राजनीति का अखाड़ा बनाने का लगाया था आरोप

दिलचस्प बात यह है कि कुछ दिन पहले तक मदन दिलावर का रुख काफी आक्रामक था। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा था कि कुछ लोग विद्यालयों को राजनीति का अखाड़ा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि कथित राजनीतिक दलों से जुड़े लोग स्कूलों में जाकर अनावश्यक रूप से माहौल खराब कर रहे हैं।

शनिवार को भी उन्होंने कहा था कि कुछ समूह स्कूल परिसरों में जाकर विवाद खड़ा करने और शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।

विपक्ष ने भी उठाए सवाल

स्कूलों में प्रवेश और निरीक्षण को लेकर जारी दिशा-निर्देशों का विपक्ष ने विरोध किया था। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि सरकार स्कूलों की वास्तविक समस्याओं को दूर करने के बजाय उनकी बदहाली छिपाने की कोशिश कर रही है।

वहीं, CJP का कहना है कि उनका अभियान केवल सरकारी स्कूलों की स्थिति को बेहतर बनाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है और वे स्कूलों में मौजूद कमियों को जनता के सामने लाते रहेंगे।

अब क्या है राजनीतिक संदेश?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिक्षा मंत्री के ताजा बयान से यह संकेत मिलता है कि सरकार टकराव की बजाय संवाद का रास्ता अपनाना चाहती है। हालांकि, स्कूल निरीक्षण और शिक्षा व्यवस्था को लेकर CJP तथा सरकार के बीच विवाद पूरी तरह खत्म हुआ है या नहीं, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

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