P. Chidambaram Mental Naxal Remark पर बीजेपी का हमला, सुधांशु त्रिवेदी बोले- 24 घंटे में सच सामने आ गया

कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम के ‘दिमागी नक्सली’ वाले बयान पर सियासत तेज

P. Chidambaram Mental Naxal Remark को लेकर देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम द्वारा खुद को ‘दिमागी नक्सली’ बताए जाने के बयान पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी के राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस विचारधारा को देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा माना गया, उसी पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गर्व जता रहे हैं।

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब हाल के दिनों में नक्सलवाद और उससे जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक बयानबाजी तेज रही है। चिदंबरम के बयान के बाद बीजेपी ने इसे कांग्रेस की सोच से जोड़ते हुए सवाल खड़े किए हैं।

क्या कहा था पी. चिदंबरम ने?

हाल ही में कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने कहा था कि उन्हें ‘दिमागी नक्सली’ कहलाने पर गर्व है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया।

बीजेपी का आरोप है कि यह बयान उस विचारधारा के प्रति सहानुभूति को दर्शाता है, जिसे देश की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती माना गया है। वहीं कांग्रेस की ओर से इस मुद्दे पर अलग-अलग नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

सुधांशु त्रिवेदी का पलटवार

P. Chidambaram Mental Naxal Remark पर प्रतिक्रिया देते हुए सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि पिछले 24 घंटों में यह स्पष्ट हो गया कि आखिर ‘दिमागी नक्सली’ शब्द किस पर लागू होता है।

उन्होंने कहा कि देश के पूर्व गृह मंत्री और पूर्व वित्त मंत्री जैसे वरिष्ठ नेता का सार्वजनिक रूप से यह कहना कि उन्हें ‘दिमागी नक्सली’ होने पर गर्व है, बेहद आश्चर्यजनक है।

त्रिवेदी ने कांग्रेस और चिदंबरम को पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का एक पुराना बयान भी याद दिलाया। उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह ने वर्ष 2006 में नक्सलवाद को देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया था।

मनमोहन सिंह के बयान का भी किया जिक्र

बीजेपी सांसद ने कहा कि यदि मनमोहन सिंह नक्सलवाद को देश की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा मानते थे, तो फिर कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता द्वारा ‘दिमागी नक्सली’ होने पर गर्व जताना विरोधाभासी स्थिति पैदा करता है।

उन्होंने सवाल उठाया कि कांग्रेस स्पष्ट करे कि उसकी आधिकारिक सोच क्या है। क्या पार्टी मनमोहन सिंह के विचारों के साथ खड़ी है या फिर पी. चिदंबरम के बयान के साथ?

प्रधानमंत्री मोदी के भाषण के बाद बढ़ा विवाद

गौरतलब है कि ‘दिमागी नक्सल’ शब्द हाल ही में उस समय चर्चा में आया था जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से अपने संबोधन में इसका उल्लेख किया था।

इसके बाद यह शब्द राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया। अब पी. चिदंबरम के बयान और उस पर बीजेपी की प्रतिक्रिया ने इस बहस को और तेज कर दिया है।

राजनीतिक बयानबाजी के बीच बढ़ी चर्चा

फिलहाल P. Chidambaram Mental Naxal Remark को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। एक ओर बीजेपी इसे कांग्रेस की विचारधारा से जोड़कर हमला कर रही है, वहीं कांग्रेस इस मुद्दे को अलग संदर्भ में देखने की बात कह रही है।

आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद और राजनीतिक मंचों पर भी चर्चा का विषय बन सकता है।

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