Trump South Korea Military Drills को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान सामने आया है। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यासों में “काफी कमी” की जाएगी। उन्होंने इसके पीछे उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के साथ अपने अच्छे संबंधों और इन अभ्यासों की ऊंची लागत को वजह बताया है।
ट्रंप ने सैन्य अभ्यासों पर उठाए सवाल
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि अमेरिका और दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यास न केवल बेहद महंगे हैं, बल्कि इनसे ऐसा संदेश भी जाता है जिसे वह “अनुचित और शत्रुतापूर्ण” मानते हैं।
ट्रंप के मुताबिक, इन सैन्य अभ्यासों का अधिकांश खर्च अमेरिका उठाता है। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में ऐसे अभ्यासों की आवश्यकता पर फिर से विचार किया जाना चाहिए।
Kim Jong Un से रिश्तों का किया जिक्र
अपने बयान में ट्रंप ने उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के साथ रिश्तों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि किम जोंग उन के साथ उनके “बहुत अच्छे संबंध” हैं और क्षेत्रीय तनाव कम करने के लिए संवाद का रास्ता ज्यादा प्रभावी हो सकता है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब ट्रंप ने हाल ही में किम जोंग उन के साथ 2019 की एक तस्वीर साझा करते हुए उन्हें अपना “अच्छा दोस्त” बताया था।
दक्षिण कोरिया ने कहा- तय कार्यक्रम के अनुसार होंगे अभ्यास
ट्रंप के बयान के बावजूद दक्षिण कोरिया ने साफ कर दिया है कि अमेरिका के साथ होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यास फिलहाल तय कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेंगे।
सोमवार से शुरू होने वाले वार्षिक सैन्य अभ्यास को लेकर सियोल ने कहा कि दोनों देशों की सुरक्षा साझेदारी और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए यह अभ्यास महत्वपूर्ण हैं।
ईरान मुद्दे का भी किया जिक्र
ट्रंप ने अपने पोस्ट में दावा किया कि उन्होंने हाल ही में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति से ईरान के “परमाणु निरस्त्रीकरण” अभियान में अमेरिका का साथ देने का आग्रह किया था, लेकिन सियोल ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया।
हालांकि, दक्षिण कोरिया की ओर से ट्रंप के इस दावे पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई है।
उत्तर कोरिया की ओर से नहीं आया जवाब
ट्रंप के ताजा बयान पर उत्तर कोरिया की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। हालांकि यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब उत्तर कोरिया हाल ही में संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों के बावजूद बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण कर चुका है।
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका-दक्षिण कोरिया सैन्य सहयोग और उत्तर कोरिया के साथ कूटनीतिक संबंधों के बीच संतुलन बनाना ट्रंप प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।




