Rahul Gandhi Disproportionate Assets Case एक बार फिर चर्चा में आ गया है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आय से अधिक संपत्ति के आरोपों से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
हाईकोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को शिकायत में लगाए गए आरोपों के सत्यापन का निर्देश दिया था। अब राहुल गांधी ने इस आदेश को शीर्ष अदालत में चुनौती देते हुए राहत की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर 17 अगस्त को सुनवाई करेगा।
क्या है पूरा मामला?
Rahul Gandhi Disproportionate Assets Case की शुरुआत एक शिकायत से हुई थी, जिसे कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता विग्नेश शिशिर ने दाखिल किया था। शिकायत में राहुल गांधी पर आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोप लगाए गए थे। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मई 2026 में CBI और ED को शिकायत में लगाए गए आरोपों का कानून के अनुसार सत्यापन करने का निर्देश दिया था।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों में प्रथम दृष्टया जांच की आवश्यकता है तो संबंधित एजेंसियां कानून के तहत उचित कदम उठा सकती हैं। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय एजेंसियों से रिपोर्ट भी मांगी थी।
हाईकोर्ट के आदेश से असंतुष्ट हैं राहुल गांधी
राहुल गांधी ने हाईकोर्ट के इसी आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। कांग्रेस नेता का कहना है कि मामले में पारित आदेश कानूनी रूप से उचित नहीं है और इसे रद्द किया जाना चाहिए। इसी उद्देश्य से उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।
सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि जांच एजेंसियों को दिए गए निर्देशों की न्यायिक समीक्षा आवश्यक है और इस मामले में उच्चतम न्यायालय को हस्तक्षेप करना चाहिए।
20 जुलाई की सुनवाई में क्या हुआ था?
मामले की सुनवाई के दौरान 20 जुलाई को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने CBI की ओर से दाखिल हलफनामे पर असंतोष व्यक्त किया था। अदालत ने कहा था कि एजेंसी का जवाब उसके पहले दिए गए निर्देशों के अनुरूप नहीं है।
हालांकि, हाईकोर्ट ने ED की कार्रवाई पर संतोष जताया था और कहा था कि एजेंसी ने आवश्यक कदम उठाए हैं। अदालत ने यह भी कहा था कि यदि जांच के दौरान कोई नई जानकारी सामने आती है तो ED कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई कर सकती है।
दिल्ली हाईकोर्ट में ट्रांसफर की भी मांग
Rahul Gandhi Disproportionate Assets Case में राहुल गांधी ने केवल हाईकोर्ट के आदेश को ही चुनौती नहीं दी है, बल्कि एक अलग ट्रांसफर याचिका भी दाखिल की है। इस याचिका में उन्होंने मामले को इलाहाबाद हाईकोर्ट से दिल्ली हाईकोर्ट स्थानांतरित करने की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, दोनों याचिकाएं 7 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई थीं। अब शीर्ष अदालत इन दोनों मामलों पर एक साथ विचार कर सकती है। ट्रांसफर याचिका के जरिए राहुल गांधी ने सुनवाई के स्थान को बदलने की मांग की है, जिस पर भी अदालत को फैसला लेना होगा।
17 अगस्त को होगी अहम सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए 17 अगस्त की तारीख तय की है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ इस मामले पर सुनवाई करेगी।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस सुनवाई में यह स्पष्ट हो सकता है कि हाईकोर्ट के आदेशों पर सुप्रीम कोर्ट क्या रुख अपनाता है। यदि अदालत राहुल गांधी की याचिका स्वीकार करती है तो मामले की दिशा बदल सकती है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी जारी रहेगी सुनवाई
एक तरफ जहां सुप्रीम कोर्ट में 17 अगस्त को सुनवाई प्रस्तावित है, वहीं इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी मामले को आगे की सुनवाई के लिए 20 अगस्त को सूचीबद्ध कर रखा है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण बना रहेगा।
राजनीतिक और कानूनी हलकों में बढ़ी चर्चा
राहुल गांधी के आय से अधिक संपत्ति मामले को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज हो गई है। भाजपा पहले से इस मामले को लेकर राहुल गांधी पर सवाल उठाती रही है, जबकि कांग्रेस का कहना है कि यह राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित मामला है।
अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी है, जहां यह तय होगा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश बरकरार रहेंगे या राहुल गांधी को किसी प्रकार की राहत मिलेगी।




