The Red Ink
केंद्र सरकार FCRA Bill 2026 को विस्तृत जांच के लिए 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति यानी JPC के पास भेज सकती है। बुधवार को लोकसभा की अनुपूरक कार्यसूची में इस संबंध में प्रस्ताव शामिल किया गया है। इसके तहत समिति में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य होंगे।
प्रस्ताव के मुताबिक, लोकसभा के 21 सदस्यों को लोकसभा अध्यक्ष नामित करेंगे, जबकि राज्यसभा के 10 सदस्यों को राज्यसभा के सभापति नामित करेंगे। इसके बाद समिति विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 की विस्तृत जांच करेगी।
FCRA Bill पर क्यों बढ़ा विवाद?
प्रस्तावित FCRA Bill 2026 को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध के स्वर सामने आए हैं। मंगलवार को संशोधित कानून को वापस लेने की मांग भी उठी।
तमिलनाडु विधानसभा ने इस प्रस्तावित संशोधन के खिलाफ सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया। वहीं, मिजोरम की राजधानी में भी बड़ी संख्या में लोग सड़क पर उतरे और विधेयक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।

संसद में विपक्ष का विरोध जारी
FCRA संशोधन विधेयक को लेकर संसद में भी विपक्षी दलों का विरोध जारी है। सरकार ने अपने सहयोगी दलों और अन्य पार्टियों को जानकारी दी है कि वह बुधवार को लोकसभा में विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने का प्रस्ताव ला सकती है।
अब JPC में विधेयक भेजे जाने के बाद इसके प्रावधानों पर विस्तार से विचार और जांच की संभावना है। समिति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद विधेयक को लेकर आगे की संसदीय कार्रवाई का रास्ता साफ होगा।




