The Red Ink:
राम मंदिर चढ़ावा मामले पर विरोध के दौरान हुआ था विवाद, संतों की नाराजगी के बाद सपा नेताओं के अलग-अलग बयान…
लखनऊ: संसद परिसर में राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी को लेकर हुए विपक्ष के प्रदर्शन के दौरान भगवा वस्त्र पहनकर किए गए प्रतीकात्मक प्रदर्शन पर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। इस मामले में अब समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव ने प्रदर्शन के तरीके को गलत बताया है। उनके बयान के बाद सियासी हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या संत समाज की नाराजगी के चलते सपा ने अपने रुख में बदलाव किया है।
31 जुलाई को संसद परिसर में विपक्षी सांसद राम मंदिर चढ़ावा मामले को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव भगवा कपड़े पहनकर वहां पहुंचे और दानपात्र के साथ एक प्रतीकात्मक प्रस्तुति की। प्रदर्शन में कई विपक्षी सांसद मौजूद थे। इस दौरान पप्पू यादव ने खुद को मंदिर के पुजारी के रूप में प्रस्तुत किया और अन्य सांसदों ने दानपात्र में पैसे डाले।
विवाद तब गहरा गया, जब प्रदर्शन के दौरान पप्पू यादव ने अयोध्या से सपा सांसद अवधेश प्रसाद के पैर छूने की कोशिश की। आरोप है कि इस दौरान उनके हाथ में मौजूद भगवान राम की तस्वीर भी पैरों के पास पहुंच गई। भाजपा नेताओं और संत समाज के कुछ संगठनों ने इसे धार्मिक भावनाओं से जोड़ते हुए कड़ी आपत्ति जताई।
संतों के विरोध के बाद सपा नेताओं के अलग-अलग बयान
घटना के बाद अयोध्या, वाराणसी, लखनऊ, दिल्ली और अन्य स्थानों पर संतों और धार्मिक संगठनों ने विरोध जताया। कई संतों ने भगवा वस्त्रों के इस्तेमाल और भगवान राम की तस्वीर को लेकर नाराजगी व्यक्त की। कुछ जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुए और मामले में शिकायतें भी दर्ज कराई गईं।
विवाद बढ़ने के बाद सपा के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान जो हुआ, वह सही नहीं था। उन्होंने कहा कि राम मंदिर में कथित चोरी का मामला अलग है और उसका साधु-संतों से कोई संबंध नहीं था। उनके अनुसार, इस तरह का प्रदर्शन नहीं होना चाहिए था।
वहीं, सपा सांसद राजीव राय ने कहा कि भगवा पहनकर किया गया प्रदर्शन पार्टी के तय कार्यक्रम का हिस्सा नहीं था। उन्होंने दावा किया कि सपा सांसद केवल दानपात्र के जरिए सांकेतिक विरोध कर रहे थे और पप्पू यादव अचानक भगवा कपड़ों में वहां पहुंचकर प्रदर्शन करने लगे।
दूसरी ओर, सपा के कुछ नेताओं ने भाजपा पर धार्मिक मुद्दों को राजनीतिक रूप से इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। पूर्व सपा विधायक पवन पांडेय ने कहा कि पप्पू यादव से गलती हुई हो सकती है, लेकिन विरोध के नाम पर सपा सांसद अवधेश प्रसाद को निशाना बनाना भी उचित नहीं है।
अखिलेश ने पप्पू यादव के समर्थन में किया पोस्ट
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस विवाद के बीच पप्पू यादव के समर्थन में सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। उन्होंने भाजपा पर विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया और कहा कि पप्पू यादव अपनी सक्रियता बनाए रखें।
अखिलेश के समर्थन और रामगोपाल यादव के प्रदर्शन को गलत बताने वाले बयान के बाद सपा के भीतर अलग-अलग रुख दिखाई दिए। भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने इसे लेकर सपा से स्पष्ट जवाब मांगा है।
सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि जब पार्टी के नेता अलग-अलग बयान दे रहे हैं, तो सपा को अपनी आधिकारिक स्थिति साफ करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा विवादित प्रदर्शन का बचाव कर रही है।
फिलहाल, इस पूरे मामले में सपा की कोई औपचारिक और एक जैसी पार्टी लाइन सामने नहीं आई है। एक तरफ पार्टी के कुछ नेता प्रदर्शन के तरीके से दूरी बनाते दिख रहे हैं, जबकि दूसरी ओर अखिलेश यादव पप्पू यादव के समर्थन में खड़े नजर आए। ऐसे में राम मंदिर, भगवा और संत समाज से जुड़े इस विवाद को भाजपा आगामी राजनीतिक लड़ाई में बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश कर सकती है।




