The Red Ink:
शेर-ए-पंजाब टी-20 लीग के लॉन्च पर पिता के क्रिकेट प्रेम और अपने सफर को लेकर खुलकर बोले भारतीय कप्तान…
गांव में चल रही मुफ्त क्रिकेट अकादमी का किया जिक्र, कहा- आज मैं जहां हूं, उसके पीछे पिता का जुनून…
छोटे खिलाड़ियों की बल्लेबाजी और फील्डिंग पर भी नजर रखते हैं शुभमन के पिता…
मोहाली में शेर-ए-पंजाब टी-20 लीग के लॉन्चिंग कार्यक्रम के दौरान भारतीय वनडे और टेस्ट टीम के कप्तान शुभमन गिल ने अपने क्रिकेट सफर से जुड़ी कई दिलचस्प बातें साझा कीं। इस दौरान उन्होंने अपने पिता के क्रिकेट के प्रति लगाव, गांव में चल रही क्रिकेट अकादमी और उनके एक खास ‘लकी’ विश्वास का भी जिक्र किया।
शुभमन ने बताया कि उनके पिता का हमेशा से सपना था कि वह क्रिकेटर बनें। उन्होंने कहा कि उनके पिता का खेल के प्रति जुनून सिर्फ उनके करियर तक सीमित नहीं है, बल्कि वह गांव और आसपास के इलाकों के बच्चों को भी क्रिकेट खेलते देखने में काफी दिलचस्पी रखते हैं।
गांव में बच्चों के लिए चल रही मुफ्त क्रिकेट अकादमी
शुभमन गिल ने बताया कि उनके गांव में एक मुफ्त क्रिकेट अकादमी संचालित की जा रही है, जहां आसपास के गांवों के बच्चे आकर अभ्यास करते हैं। समय मिलने पर उनके पिता अकादमी पहुंचते हैं और बच्चों के खेल को ध्यान से देखते हैं।
उन्होंने कहा कि उनके पिता अक्सर किसी युवा खिलाड़ी की बल्लेबाजी या फील्डिंग से प्रभावित होकर उन्हें फोन करते हैं। कई बार वह शुभमन से किसी बच्चे का खेल देखने के लिए भी कहते हैं।
शुभमन के मुताबिक, उनके पिता छोटे बच्चों की प्रतिभा पर भी बारीकी से नजर रखते हैं। वह कभी किसी छह-सात साल के खिलाड़ी की बल्लेबाजी की तारीफ करते हैं तो कभी उसकी फील्डिंग को लेकर उत्साह से बात करते हैं।
‘पिता के जुनून ने मुझे यहां तक पहुंचाया’
भारतीय कप्तान ने अपने क्रिकेट सफर को याद करते हुए कहा कि आज वह जिस मुकाम पर हैं, उसके पीछे उनके पिता के क्रिकेट प्रेम और समर्पण की बड़ी भूमिका रही है।
शुभमन ने कहा कि उनके पिता का सपना था कि वह क्रिकेट खेलें और आगे बढ़ें। यही जुनून उन्हें लगातार प्रेरित करता रहा और उनके करियर की मजबूत नींव बना।
कुर्ता-पायजामा को मानते हैं ‘लकी’
कार्यक्रम के दौरान शुभमन गिल ने अपने पिता से जुड़ा एक मजेदार किस्सा भी साझा किया। उन्होंने मुस्कुराते हुए बताया कि उनके पिता कुछ हद तक अंधविश्वासी हैं और कुर्ता-पायजामा पहनने को शुभ मानते हैं।
शुभमन के अनुसार, उनके पिता का मानना है कि जब भी वह कुर्ता-पायजामा पहनते हैं, या तो भारतीय टीम मैच जीतती है या फिर शुभमन अच्छा प्रदर्शन करते हुए रन बनाते हैं।
उन्होंने कहा कि इसी विश्वास के चलते उनके पिता अब कई मौकों पर कुर्ता-पायजामा पहनना पसंद करते हैं।
शेर-ए-पंजाब टी-20 लीग के लॉन्च के दौरान शुभमन गिल की यह निजी और भावनात्मक बातचीत चर्चा में रही। उनके बयान से क्रिकेट के प्रति पिता के जुनून और बेटे की सफलता के पीछे परिवार के योगदान की झलक भी देखने को मिली।




