The Red Ink:
लंबे समय से अलग रह रहे थे दोनों, मध्यस्थता के जरिए बनी सहमति; बाकी कानूनी मामले भी वापस लेने की बात…
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी पत्नी पायल अब्दुल्ला के बीच लंबे समय से चल रहा वैवाहिक विवाद अब समाप्त हो गया है। दोनों पक्षों ने मध्यस्थता के जरिए आपसी सहमति से अपने मतभेद सुलझा लिए, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने तलाक को मंजूरी दे दी।
कानूनी मामलों से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ के समक्ष उमर अब्दुल्ला की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने बताया कि पति-पत्नी के बीच मौजूद सभी विवाद आपसी सहमति से सुलझा लिए गए हैं।
कपिल सिब्बल ने कोर्ट में क्या कहा?
सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि दोनों पक्ष अब अपने-अपने रास्ते आगे बढ़ने पर सहमत हैं और विवाद के सभी मुद्दों का समाधान हो चुका है।
उन्होंने कहा कि अदालत तलाक को मंजूरी दे सकती है और इससे जुड़े बाकी मामलों को भी वापस ले लिया जाएगा।
इस पर सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सहमति पर संतोष जताते हुए कहा कि यह अच्छी बात है और मामले का निपटारा इन्हीं शर्तों के आधार पर किया जाएगा।
1994 में हुई थी उमर और पायल की शादी
उमर अब्दुल्ला और पायल अब्दुल्ला ने सितंबर 1994 में विवाह किया था। हालांकि, दोनों लंबे समय से अलग रह रहे थे। उनके वैवाहिक संबंध को लेकर कानूनी विवाद कई वर्षों तक अलग-अलग अदालतों में चला।

तलाक की कानूनी प्रक्रिया के दौरान उमर अब्दुल्ला को पहले पारिवारिक अदालत और बाद में दिल्ली हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली थी। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।
2016 में फैमिली कोर्ट ने खारिज की थी तलाक की याचिका
उमर अब्दुल्ला की तलाक याचिका को 30 अगस्त 2016 को पारिवारिक अदालत ने खारिज कर दिया था। अदालत का मानना था कि यह पर्याप्त रूप से साबित नहीं किया जा सका कि वैवाहिक संबंध इस स्तर तक टूट चुका है कि उसके दोबारा सामान्य होने की कोई संभावना नहीं बची।
पारिवारिक अदालत ने यह भी कहा था कि उमर अब्दुल्ला अपनी पत्नी की ओर से कथित क्रूरता या परित्याग के आरोपों को पर्याप्त साक्ष्यों के साथ साबित नहीं कर पाए।
अदालत के मुताबिक, उनके पक्ष से ऐसी कोई ठोस परिस्थिति सामने नहीं रखी गई थी, जिससे यह निष्कर्ष निकाला जा सके कि पायल अब्दुल्ला के साथ वैवाहिक संबंध को जारी रखना असंभव हो गया था।
दिल्ली हाई कोर्ट से भी नहीं मिली थी राहत
फैमिली कोर्ट के फैसले के बाद उमर अब्दुल्ला ने दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि, हाई कोर्ट ने भी उनकी तलाक की याचिका को स्वीकार नहीं किया।
इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। अब मध्यस्थता के जरिए दोनों पक्षों के बीच सहमति बनने के बाद शीर्ष अदालत ने मामले का निपटारा करते हुए तलाक को मंजूरी दे दी।




