The Red Ink
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान को 2019 के चुनावी भाषण से जुड़े हेट स्पीच मामले में राहत नहीं मिली है। जिला एवं सत्र न्यायालय ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई दो साल की सजा को बरकरार रखते हुए उनकी अपील खारिज कर दी। हालांकि, चार प्रशासनिक अधिकारियों पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी वाले दूसरे मामले में अदालत ने उन्हें बरी रहने दिया।
‘तनखैया’ बयान पर सजा कायम
यह मामला 2019 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए उस भाषण से जुड़ा है, जिसमें आजम खान ने प्रशासनिक अधिकारियों को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। उन्होंने मंच से कहा था कि “कलेक्टर-फलेक्टर तनखैया हैं” और अधिकारियों से “जूते साफ कराने” जैसी बात कही थी। उस समय रामपुर के तत्कालीन जिलाधिकारी आन्जनेय कुमार सिंह के निर्देश पर भोट थाने में उनके खिलाफ हेट स्पीच का मुकदमा दर्ज कराया गया था।
सेशन कोर्ट से भी नहीं मिली राहत
एमपी-एमएलए कोर्ट ने 16 मई को इस मामले में आजम खान को दो साल की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ उन्होंने जिला एवं सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी, लेकिन अदालत ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए सजा बरकरार रखी।
दूसरे मामले में बरकरार रही बरी होने की राहत
अदालत ने उस दूसरे मामले में कोई बदलाव नहीं किया, जिसमें आजम खान पर चार वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कथित आपत्तिजनक बयान देने का आरोप था। ट्रायल कोर्ट ने दिसंबर 2025 में उन्हें इस केस में बरी कर दिया था। फैसले के खिलाफ दायर अपील भी अदालत ने स्वीकार नहीं की।
फिलहाल जेल में बंद हैं आजम और अब्दुल्ला
आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम पहले से ही फर्जी पैन कार्ड मामले में सात-सात साल की सजा काट रहे हैं। शनिवार को हुई सुनवाई में आजम खान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश हुए।




