The Red Ink
लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित तीन दिवसीय आम महोत्सव इस बार सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि अनोखी किस्मों और नई तकनीकों को लेकर भी चर्चा में है। यहां देश-विदेश के 800 से अधिक किस्मों के आम प्रदर्शित किए गए हैं। कोई अपने आकार से लोगों को चौंका रहा है, तो कोई खुशबू, स्वाद और कीमत की वजह से सुर्खियां बटोर रहा है।
‘अंबिका’ बना सबसे महंगा आम, कीमत ₹800 प्रति किलो
महोत्सव में सबसे ज्यादा चर्चा ‘अंबिका’ आम की हो रही है। इसकी कीमत ₹800 प्रति किलो रखी गई है, जो कई जगह बादाम से भी अधिक है। प्रदर्शनी में हिस्सा ले रहे आम उत्पादक अरुण कुमार कनौजिया ने बताया कि उनके स्टॉल पर 165 किस्मों के आम मौजूद हैं, लेकिन ‘अंबिका’ सबसे खास है। यह आम मानसून के बाद सितंबर में तैयार होता है और उस समय बाजार में आम की उपलब्धता कम होने के कारण इसकी मांग और कीमत दोनों बढ़ जाती हैं।
800 से ज्यादा वैरायटी, हर आम की अपनी अलग पहचान
आम महोत्सव में सिर्फ कीमत ही नहीं, बल्कि रंग, आकार, खुशबू और स्वाद भी लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। ‘हाथीझूल’ अपने विशाल आकार के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। ‘गुलाब खास’ अपनी अनोखी खुशबू के लिए पसंद किया जा रहा है। ‘सेंसेशन’ अपने रंग और आकर्षक लुक की वजह से लोगों को लुभा रहा है। वहीं ‘मोदी मैंगो’ अपने नाम और एक जैसे आकार वाले फलों के कारण सबसे ज्यादा चर्चा में है।
थाईलैंड का ‘चकापात’ अब मलिहाबाद में भी तैयार
महोत्सव में इस बार थाईलैंड की लोकप्रिय किस्म ‘चकापात’ भी खास आकर्षण बनी हुई है। मलिहाबाद के बागवानों ने इस विदेशी वैरायटी को स्थानीय जलवायु में सफलतापूर्वक तैयार करना शुरू कर दिया है। बागवानों का कहना है कि आने वाले समय में यह आम स्थानीय बाजार के साथ-साथ निर्यात के लिए भी बड़ा विकल्प बन सकता है।
अमेरिकन और एप्पल जैसे आम भी खींच रहे भीड़
उत्तराखंड से आए उत्पादकों ने भी कई अनोखी वैरायटी प्रदर्शित की हैं। ‘टॉमी एटकिंस’ नाम का अमेरिकन आम लगभग ₹350 प्रति किलो में उपलब्ध है। इसका स्वाद हल्का होने के कारण इसे कई लोग पसंद करते हैं। वहीं ‘अरुणिमा’ आम तोड़ने के बाद करीब 20 दिन तक सुरक्षित रहता है। इसके अलावा ‘एप्पल मैंगो’ भी लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, क्योंकि इसका रंग-रूप और स्वाद सेब जैसा महसूस होता है।
किसानों के लिए सीखने का भी बना मंच
इस बार मैंगो फेस्टिवल केवल प्रदर्शनी तक सीमित नहीं है। यहां किसानों को नई तकनीकों, उन्नत किस्मों और बाजार से जोड़ने के लिए विशेष कार्यशालाएं और क्रेता-विक्रेता सम्मेलन भी आयोजित किए जा रहे हैं। बदायूं से पहुंचे किसान राजेश यादव ने बताया कि वह अब तक आलू और दूसरी फसलों की खेती करते रहे हैं, लेकिन महोत्सव में विभिन्न किस्मों के आम देखने के बाद उन्होंने भी आम की बागवानी शुरू करने का मन बना लिया है। उनका कहना है कि यहां विशेषज्ञों से खेती की आधुनिक तकनीक सीखने का अच्छा अवसर मिला।
आम महोत्सव में उमड़ रही लोगों की भीड़
स्वाद, खुशबू, दुर्लभ किस्मों और नई तकनीकों का अनूठा संगम इस बार लखनऊ के आम महोत्सव को खास बना रहा है। आम प्रेमियों के साथ-साथ किसान, व्यापारी और बागवानी से जुड़े विशेषज्ञ भी बड़ी संख्या में यहां पहुंच रहे हैं।




