The Red Ink
राजधानी लखनऊ में शनिवार को मौसम ने एक ही दिन में कई रंग दिखाए। सुबह से तेज धूप और उमस ने लोगों को परेशान रखा, लेकिन दोपहर बाद अचानक मौसम बदला और शहर के कई हिस्सों में बारिश होने से लोगों को गर्मी से राहत मिली। हालांकि मौसम विभाग का कहना है कि यह राहत ज्यादा दिन नहीं टिकेगी। अगले तीन दिनों तक गर्मी और उमस का असर बना रहेगा, जबकि 7 जुलाई से मानसून के दोबारा सक्रिय होने के साथ अच्छी बारिश की संभावना जताई गई है।
पीजीआई, गोमतीनगर और सरोजनीनगर में हुई बारिश
दिनभर की चिलचिलाती धूप के बाद दोपहर में बादल छाए और पीजीआई, गोमतीनगर, सरोजनीनगर समेत शहर के कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। बारिश के चलते तापमान में कुछ गिरावट आई और लोगों ने उमस भरी गर्मी से राहत महसूस की। मौसम विभाग के अनुसार शनिवार को अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है।
तापमान सामान्य से ऊपर, उमस ने बढ़ाई परेशानी
शुक्रवार को लखनऊ का अधिकतम तापमान 37.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से करीब 1.7 डिग्री अधिक रहा। वहीं न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। दिनभर हवा में नमी अधिक रहने के कारण उमस का स्तर भी काफी बढ़ा रहा। अधिकतम आर्द्रता 94 प्रतिशत और न्यूनतम 53 प्रतिशत दर्ज की गई। सुबह हल्की बारिश के बावजूद पूरे दिन उमस बनी रही, जिससे लोगों को गर्मी का अधिक अहसास हुआ।
मानसून आया, लेकिन उम्मीद के मुताबिक नहीं बरसा
लखनऊ में मानसून की एंट्री 2 जुलाई को हुई थी। इसके बाद 3 जुलाई तक रुक-रुक कर बारिश हुई, लेकिन बारिश का आंकड़ा उम्मीद से काफी कम रहा। 2 और 3 जुलाई के बीच शहर में केवल 6.4 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई, जबकि 1 जून से 3 जुलाई तक कुल बारिश करीब 29 मिलीमीटर ही दर्ज हुई। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल राजधानी में सामान्य से कम वर्षा होने की स्थिति बनी हुई है, जिसका असर खेती और जल स्रोतों पर भी पड़ सकता है।
तीन दिन तक गर्मी का रहेगा असर
मौसम विभाग के अनुसार अगले तीन दिनों तक लखनऊ में तेज धूप, उमस और बादलों की आवाजाही का मिला-जुला असर देखने को मिलेगा। कहीं-कहीं हल्की बारिश हो सकती है, लेकिन इससे गर्मी से बड़ी राहत मिलने की संभावना कम है। इसके बाद 7 जुलाई से मानसून फिर सक्रिय होगा और राजधानी समेत आसपास के इलाकों में अच्छी बारिश का दौर शुरू होने के संकेत हैं।
क्यों कमजोर पड़ा मानसून?
मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के अनुसार, प्रदेश में मानसून 30 जून को प्रवेश कर चुका था और 2 जुलाई तक पूरे उत्तर प्रदेश में फैल गया था। लेकिन फिलहाल बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र के कारण मानसूनी हवाओं की दिशा दक्षिण की ओर खिसक गई है। इसके अलावा प्रदेश में इस समय कोई मजबूत मौसम प्रणाली सक्रिय नहीं है। यही वजह है कि दक्षिणी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों को छोड़कर अधिकांश क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियां कमजोर पड़ गई हैं। मौसम विभाग का अनुमान है कि कुछ दिनों बाद नया वेदर सिस्टम बनने पर मानसून दोबारा रफ्तार पकड़ेगा और बारिश का सिलसिला तेज होगा।




