The Red Ink
उत्तर प्रदेश के ग्राम रोजगार सेवकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर बुधवार को लखनऊ में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदेशभर से पहुंचे रोजगार सेवकों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विधानसभा की ओर कूच करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। प्रदर्शनकारियों ने मांगें पूरी नहीं होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।
दारुलशफा से विधानसभा की ओर बढ़े रोजगार सेवक
उत्तर प्रदेश ग्राम रोजगार सेवक संघ के बैनर तले बड़ी संख्या में कर्मचारी लखनऊ के हजरतगंज स्थित दारुलशफा के सामने एकत्र हुए। सुबह करीब 9 बजे शुरू हुए प्रदर्शन में रोजगार सेवकों ने अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। प्रदर्शन के बाद जब कर्मचारी विधानसभा घेराव के लिए आगे बढ़े तो पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के तहत बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया।
मांगें नहीं मानी गईं तो अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अगर सरकार जल्द उनकी मांगों पर फैसला नहीं लेती है तो वह इको गार्डन में अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करेंगे। संगठन ने जरूरत पड़ने पर भूख हड़ताल और विधानसभा घेराव जैसे कदम उठाने की चेतावनी भी दी है।
2021 की घोषणाएं लागू नहीं होने का आरोप
उत्तर प्रदेश ग्राम रोजगार सेवक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष राम लखन तिवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री की ओर से 4 अक्टूबर 2021 को ग्राम रोजगार सेवकों के हित में कई घोषणाएं की गई थीं, लेकिन अभी तक उनका क्रियान्वयन नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि संगठन कई बार शासन स्तर पर अपनी समस्याएं रख चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। इससे कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ रही है।
मानदेय और भुगतान को लेकर उठाए सवाल
रोजगार सेवकों का कहना है कि वर्तमान में उन्हें सिर्फ 7,788 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिल रहा है। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि कई कर्मचारियों को पिछले डेढ़ से दो साल से मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि आर्थिक परेशानियों के कारण कई रोजगार सेवकों के सामने परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है।
‘सरकार की योजनाओं को गांव तक पहुंचाने में निभाई अहम भूमिका’
राम लखन तिवारी ने कहा कि ग्राम रोजगार सेवकों ने हमेशा सरकार की योजनाओं को ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों ने हर परिस्थिति में पूरी मेहनत से काम किया, लेकिन उनकी समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से चली आ रही उपेक्षा के कारण कर्मचारियों में निराशा है।
भूख हड़ताल की दी चेतावनी
संगठन ने कहा कि अगर प्रमुख सचिव स्तर की बातचीत में उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। ग्राम रोजगार सेवकों ने स्पष्ट किया कि वे अपनी मांगों को लेकर पीछे नहीं हटेंगे और जरूरत पड़ने पर भूख हड़ताल भी करेंगे।




