The Red Ink
अपनी जमीनों के मुआवजे और वर्षों पुराने वादों को पूरा कराने की मांग को लेकर सोमवार को किसानों का गुस्सा लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) मुख्यालय पर फूट पड़ा। भारतीय किसान यूनियन (राष्ट्रीयवाद) के बैनर तले बड़ी संख्या में किसान हाथों में डंडे, लाठियां और हंसिया लेकर LDA कार्यालय पहुंचे और जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने प्राधिकरण के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि दशकों बीत जाने के बावजूद उन्हें उनकी जमीन का उचित मुआवजा नहीं मिला। इस दौरान कुछ समय के लिए किसानों और अधिकारियों के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली।
“40 साल पहले जमीन ली, आज तक पूरा हक नहीं मिला”
भारतीय किसान यूनियन (राष्ट्रीयवाद) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अशोक यादव ने बताया कि वर्ष 1984 में उनकी कृषि भूमि को विकास कार्यों के नाम पर अधिग्रहित किया गया था। उस समय बेहद कम दर पर मुआवजा तय किया गया, जिसे लेकर किसानों ने लगातार संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि कानूनी लड़ाई और कई दौर की वार्ताओं के बाद अदालत ने भी किसानों के पक्ष में फैसला दिया, लेकिन इसके बावजूद आज तक सभी किसानों को उनका पूरा मुआवजा नहीं मिल सका। उनका आरोप है कि अब प्राधिकरण धन की कमी का हवाला देकर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहा है।
नौकरी, आवास और विकास के वादे भी अधूरे
किसानों का कहना है कि जमीन अधिग्रहण के समय सिर्फ मुआवजे का ही नहीं, बल्कि परिवार के सदस्यों को रोजगार, आवासीय सुविधाएं, गांवों के विकास और किसान भवन जैसी कई योजनाओं का भी आश्वासन दिया गया था। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इन वादों में से अधिकांश आज भी कागजों तक सीमित हैं। कई बार धरना-प्रदर्शन, ज्ञापन और अधिकारियों से मुलाकात के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं निकला।
“सिर्फ कागजों में योजनाएं, जमीन पर कुछ नहीं”
प्रदर्शन में शामिल किसान विकास ने कहा कि LDA द्वारा किए गए अधिकांश दावे धरातल पर नजर नहीं आते। उनके अनुसार किसानों के पास सभी दस्तावेज और लिखित आश्वासन मौजूद हैं, लेकिन वर्षों से सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसान लगातार कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा।
महिलाओं का दर्द: “मुआवजा मिलता तो दूसरों के घर काम नहीं करना पड़ता”
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने बताया कि उम्र और स्वास्थ्य की समस्याओं के बावजूद उन्हें न्याय की उम्मीद में बार-बार प्रदर्शन के लिए आना पड़ता है। महिलाओं ने कहा कि यदि समय पर मुआवजा और अन्य सुविधाएं मिल जातीं तो उन्हें दूसरों के घरों में मजदूरी या घरेलू काम करने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता। उन्होंने आरोप लगाया कि परिवारों की आर्थिक स्थिति लगातार खराब होती जा रही है, जबकि जिम्मेदार विभाग उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं ले रहे।
चेतावनी: मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन होगा तेज
किसानों ने साफ कहा कि यदि जल्द ही मुआवजे और अन्य लंबित मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उनका कहना है कि अब वे केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होंगे और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।




