The Red Ink
गाजियाबाद के सूर्या चौहान हत्याकांड और मुख्य आरोपी असद के पुलिस एनकाउंटर के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। योगी सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोलते हुए उन पर वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया है। राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लंबी पोस्ट लिखकर कहा कि एक निर्दोष किशोर की हत्या पर संवेदना जताने के बजाय सपा के नेता और प्रवक्ता आरोपी के एनकाउंटर पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
“17 साल के सूर्या के लिए एक शब्द नहीं, लेकिन आरोपी के लिए दर्द क्यों?”
ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि 17 वर्षीय सूर्या चौहान की हत्या बेहद दर्दनाक और अमानवीय घटना थी, लेकिन विपक्ष के कुछ नेताओं ने पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करने के बजाय पुलिस कार्रवाई पर ही सवाल उठाने शुरू कर दिए। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि जब पुलिस की कार्रवाई से पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है, तो कुछ नेताओं को इससे परेशानी क्यों हो रही है।
PDA पर भी किया कटाक्ष
राजभर ने समाजवादी पार्टी के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फार्मूले पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल सामाजिक न्याय की राजनीति के नाम पर अपराधियों के प्रति नरमी दिखाते हैं और पीड़ितों की आवाज को नजरअंदाज करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता अब कानून व्यवस्था और अपराध पर सरकार की सख्त कार्रवाई को देख रही है और अपराधियों के प्रति किसी तरह की सहानुभूति स्वीकार नहीं करेगी।
“वोट बैंक की राजनीति का देश देख रहा है”
एसबीएसपी प्रमुख ने आरोप लगाया कि कुछ विपक्षी नेता केवल अपने राजनीतिक समीकरणों को साधने के लिए चुनिंदा घटनाओं पर प्रतिक्रिया देते हैं। उन्होंने कहा कि जब किसी निर्दोष की जान जाती है तो उस पर चुप्पी साध ली जाती है, लेकिन आरोपी के खिलाफ कार्रवाई होने पर सवाल खड़े किए जाते हैं। राजभर ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था पहले से मजबूत हुई है और अपराधियों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है।
सूर्या चौहान हत्याकांड पर बढ़ी राजनीतिक बयानबाजी
गाजियाबाद के सूर्या चौहान हत्याकांड और उसके मुख्य आरोपी असद के एनकाउंटर के बाद यह मामला अब कानून व्यवस्था के साथ-साथ राजनीतिक बहस का भी केंद्र बन गया है। एक ओर सरकार और उसके सहयोगी दल पुलिस कार्रवाई का समर्थन कर रहे हैं, वहीं विपक्षी दल एनकाउंटर की प्रक्रिया और कानून व्यवस्था को लेकर सवाल उठा रहे हैं। फिलहाल इस मुद्दे पर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है और आने वाले दिनों में यह बहस और गर्माने के संकेत हैं।




