क्रिमिनल केस वालों के पास लाइसेंसी हथियार, यूपी में 6 हजार पर सवाल

The Red Ink
उत्तर प्रदेश में लाइसेंसी हथियारों को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। राज्य में करीब 10 लाख हथियार लाइसेंसधारी हैं, जिनमें से 6 हजार से ज्यादा लोगों पर आपराधिक मामले दर्ज बताए जा रहे हैं। इनमें कई बाहुबली नेता और प्रभावशाली चेहरे भी शामिल हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद अब सरकार ऐसे लाइसेंसों की समीक्षा में जुटी है।

राजा भैया के शस्त्र पूजन से फिर उठा मुद्दा
अक्टूबर 2025 में प्रतापगढ़ के कुंडा से विधायक Raghuraj Pratap Singh उर्फ राजा भैया विजयदशमी पर शस्त्र पूजन करते नजर आए थे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में हथियार प्रदर्शित किए गए थे। इसके बाद एक बार फिर सवाल उठे कि गंभीर मुकदमों का सामना कर रहे लोगों के पास इतने हथियार कैसे हैं। चुनावी हलफनामे के अनुसार राजा भैया के नाम तीन लाइसेंसी हथियार दर्ज हैं। वहीं उनकी पत्नी ने पहले उन पर अवैध हथियार रखने के आरोप भी लगाए थे।

बाहुबली नेताओं के नाम भी सूची में
पूर्व सांसद Brij Bhushan Sharan Singh के पास भी तीन लाइसेंसी हथियार बताए जाते हैं। उनके खिलाफ पहले कई गंभीर मुकदमे दर्ज हुए थे, हालांकि बाद में कई मामलों में उन्हें राहत मिली। इसी तरह पूर्व सांसद Dhananjay Singh का नाम भी उन लोगों में शामिल बताया जा रहा है जिनके खिलाफ आपराधिक मामले होने के बावजूद हथियार लाइसेंस जारी हुए।

अब्बास अंसारी के पास थे 8 हथियार
Abbas Ansari के पास एक समय आठ हथियार होने का मामला भी काफी चर्चा में रहा। अब्बास, बाहुबली नेता मुख्तार अंसारी के बेटे हैं और उन पर हेट स्पीच, गैंगस्टर एक्ट, आर्म्स एक्ट समेत कई केस दर्ज हैं। बताया गया कि राष्ट्रीय स्तर के शूटर होने के कारण उन्हें अतिरिक्त हथियार रखने की अनुमति मिली थी। हालांकि बाद में विदेशी हथियार और बैरल खरीदने से जुड़े मामलों में जांच शुरू हुई और उनके हथियार पुलिस कब्जे में ले लिए गए।

क्या कहते हैं हथियार लाइसेंस के नियम?
2020 में आर्म्स एक्ट में संशोधन के बाद आम नागरिक अधिकतम दो लाइसेंसी हथियार ही रख सकता है। इससे पहले सीमा तीन हथियारों तक थी। हालांकि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के शूटर्स को विशेष अनुमति के तहत ज्यादा हथियार रखने की छूट मिलती है। अलग-अलग शूटिंग कैटेगरी के आधार पर खिलाड़ी 8 से 12 तक हथियार रख सकते हैं।

अपराधियों को लाइसेंस कैसे मिल जाते हैं?
पूर्व डीजीपी Sulkhan Singh के मुताबिक सामान्य तौर पर आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों को हथियार लाइसेंस नहीं मिलता। लाइसेंस जारी करने से पहले पुलिस और लोकल इंटेलिजेंस यूनिट की रिपोर्ट ली जाती है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अगर लाइसेंस मुकदमा दर्ज होने से पहले जारी हुआ हो, या जिलाधिकारी अपने विवेकाधिकार का इस्तेमाल करें, तो लाइसेंस मिल सकता है। कानून में केवल सजायाफ्ता व्यक्ति पर स्पष्ट रोक है।

हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद सरकार अलर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट की हालिया टिप्पणी के बाद अब शासन स्तर पर यह डेटा जुटाया जा रहा है कि गंभीर मुकदमों का सामना कर रहे लोगों को किन परिस्थितियों में लाइसेंस जारी किए गए। अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई है और कई मामलों की जांच चल रही है।

ऐसे मिलता है हथियार लाइसेंस
यूपी में हथियार लाइसेंस के लिए आत्मरक्षा या शूटिंग स्पोर्ट्स के आधार पर आवेदन किया जाता है। आवेदन के बाद पुलिस व LIU द्वारा बैकग्राउंड वेरिफिकेशन किया जाता है। उम्र 21 साल से अधिक होना जरूरी है। सभी दस्तावेज और जांच सही मिलने पर डीएम या कमिश्नर स्तर से लाइसेंस जारी किया जाता है। इसकी वैधता पांच साल की होती है, जिसके बाद नवीनीकरण कराना पड़ता है।

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