बंगाल नतीजों के बाद सपा का बड़ा फैसला: I-PAC से दूरी, फंडिंग बनी वजह

The Red Ink
पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद समाजवादी पार्टी ने अपनी चुनावी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। पार्टी अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने साफ कर दिया है कि अब उनकी पार्टी प्रोफेशनल चुनावी कंसल्टेंसी कंपनी I-PAC के साथ आगे काम नहीं करेगी। इसकी सबसे बड़ी वजह फंड की कमी बताई गई है।

फंडिंग की कमी ने तोड़ा साथ
लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने स्वीकार किया कि I-PAC के साथ कुछ समय तक काम हुआ, लेकिन अब आर्थिक कारणों से यह साझेदारी जारी रखना संभव नहीं है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि मौजूदा राजनीतिक माहौल में चुनावी रणनीति कंपनियों के साथ काम करना बेहद खर्चीला हो चुका है, जिसे हर पार्टी वहन नहीं कर सकती।

चुनावी ‘कंसल्टेंसी मॉडल’ पर तंज
प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश ने चुनावी मैनेजमेंट कंपनियों के बढ़ते चलन पर व्यंग्य भी किया। उन्होंने कहा कि अब चुनाव जीतने के लिए अलग-अलग एजेंसियां—सर्वे, डेटा एनालिसिस और सोशल मीडिया कैंपेन—के लिए भारी निवेश करना पड़ता है। भाजपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने इशारों में कहा कि बड़ी कंपनियों और संसाधनों के सहारे चुनावी माहौल तैयार किया जा रहा है।

बंगाल में TMC के साथ काम कर चुकी है I-PAC
I-PAC वही रणनीतिक टीम है, जिसने Mamata Banerjee की पार्टी के लिए चुनावी कैंपेन संभाला था। इससे पहले यह टीम कई राज्यों में बड़े राजनीतिक अभियानों का हिस्सा रह चुकी है। यूपी में 2027 के चुनाव को ध्यान में रखते हुए सपा ने भी इसी कंपनी को रणनीतिक जिम्मेदारी दी थी, लेकिन अब यह प्रयोग बीच में ही खत्म हो गया।

कैसे हुई थी शुरुआत?
जानकारों के मुताबिक, I-PAC को सपा से जोड़ने में तमिलनाडु के नेता M. K. Stalin और ममता बनर्जी की सलाह अहम रही थी। दिल्ली और कोलकाता में हुई बैठकों के बाद कंपनी को बूथ मैनेजमेंट, डेटा एनालिसिस, वोटर टर्नआउट बढ़ाने और डिजिटल कैंपेन की जिम्मेदारी दी गई थी।

अब नई रणनीति पर फोकस
I-PAC से दूरी के बाद सपा ने अपनी रणनीति को अलग-अलग कंपनियों में बांट दिया है। डेटा एनालिसिस का काम एक निजी कंसल्टेंसी को, सर्वे और ग्राउंड फीडबैक का जिम्मा दूसरी एजेंसी को, इससे साफ है कि पार्टी अब ‘सिंगल एजेंसी मॉडल’ के बजाय मल्टी-सोर्स रणनीति पर काम कर रही है।

I-PAC और प्रशांत किशोर का कनेक्शन
इस कंपनी की स्थापना चुनावी रणनीतिकार Prashant Kishor ने की थी। 2014 के बाद से उन्होंने कई बड़े चुनावों में अहम भूमिका निभाई। हालांकि, हाल के वर्षों में प्रशांत किशोर ने खुद को कंपनी से अलग कर लिया है। अब इसका संचालन अन्य पेशेवरों के हाथ में है, जो विभिन्न पार्टियों के साथ काम कर रहे हैं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठाए चुनावी मुद्दे
अखिलेश यादव ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका पर नाराजगी जताई, मतगणना प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी बनाने की मांग की, सुप्रीम कोर्ट से काउंटिंग की लाइव स्ट्रीमिंग की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले चुनावों में उनकी पार्टी पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरेगी और सामाजिक समीकरणों के सहारे नई रणनीति तैयार करेगी।

I-PAC से अलग होना सिर्फ एक कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने की कहानी नहीं है, बल्कि यह संकेत है कि सपा अब अपनी चुनावी रणनीति को नए सिरे से गढ़ना चाहती है। 2027 के यूपी चुनाव से पहले यह बदलाव कितना असरदार साबित होगा, यह आने वाला समय ही तय करेगा।

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