गोरखपुर में CM योगी का हल्का-फुल्का अंदाज़, रवि किशन पर ली चुटकी; शिक्षामित्रों को बढ़े मानदेय के चेक भी बांटे

The Red Ink
गोरखपुर दौरे पर पहुंचे Yogi Adityanath का मंगलवार को अलग ही अंदाज़ देखने को मिला। एक तरफ उन्होंने शिक्षामित्रों को बढ़े हुए मानदेय के चेक सौंपे, तो वहीं मंच से सांसद Ravi Kishan पर चुटीले अंदाज़ में तंज कसते नजर आए। कार्यक्रम के दौरान कई बार माहौल ठहाकों से गूंज उठा।

शिक्षामित्रों को बढ़े मानदेय का तोहफा
कार्यक्रम में सीएम योगी ने बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षामित्रों को सम्मानित किया और 18 हजार रुपये मासिक मानदेय के चेक वितरित किए। इससे पहले उन्हें 10 हजार रुपये मिलते थे। सरकार का यह फैसला अप्रैल से लागू हो चुका है, जिससे प्रदेश के करीब 1.43 लाख शिक्षामित्रों को फायदा मिलेगा।

मछली वाले बयान पर रवि किशन पर तंज
सीएम ने गोरखपुर के महेसरा इलाके की मछली मंडी का जिक्र करते हुए रवि किशन के पुराने बयान पर मज़ाकिया टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि पहले यहां जाम इसलिए लगता था क्योंकि “रवि किशन की पसंद की चीज” यहां मिलती थी। हालांकि, पीछे से रवि किशन लगातार सफाई देते रहे कि वह “पंडित हैं और मछली नहीं खाते”, लेकिन योगी ने मुस्कुराते हुए कहा कि उनके घर भीड़ देखकर उन्हें लगा कि “कुछ खास पक रहा है।” इस पर कार्यक्रम में मौजूद लोग हंस पड़े।

मानद पीएचडी पर भी ली चुटकी
सीएम योगी ने रवि किशन को मिली मानद पीएचडी पर भी हल्के अंदाज़ में टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ सम्मान की उपाधि है, इससे न तो नौकरी मिलेगी और न ही इसे पेशेवर तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने मज़ाक में यह भी कहा कि “अगर इस तरह की डिग्री लेकर कोई इलाज करने लगे, तो क्या होगा?” इस बयान पर सभा में फिर हंसी का माहौल बन गया।

गोरखपुर के विकास का किया जिक्र
अपने संबोधन में सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले गोरखपुर की पहचान माफिया और गंदगी से जुड़ी थी, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। उन्होंने बताया कि गीडा में हजारों लोगों को रोजगार मिला है, रामगढ़ताल पर्यटन का केंद्र बना है और शहर में कनेक्टिविटी व इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर हुआ है। साथ ही उन्होंने नागरिकों से अपील की कि सरकारी सुविधाओं को नुकसान न पहुंचाएं और शहर को साफ-सुथरा बनाए रखने में सहयोग करें।

इन्फ्रास्ट्रक्चर और शिक्षा पर जोर
सीएम ने तारामंडल क्षेत्र में बने टू-लेन ब्रिज का लोकार्पण भी किया और इसे शहर की बेहतर कनेक्टिविटी की दिशा में बड़ा कदम बताया। शिक्षा पर बोलते हुए उन्होंने ड्रॉपआउट रेट को शून्य तक लाने का लक्ष्य रखा और कहा कि शिक्षकों को बच्चों के साथ जुड़कर उन्हें बेहतर माहौल देना चाहिए।

गोरखपुर का यह कार्यक्रम सिर्फ सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सीएम योगी के हल्के-फुल्के अंदाज़ ने इसे खास बना दिया। मंच पर विकास और व्यंग्य का यह मिश्रण लंबे समय तक चर्चा में रहने वाला है।

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