The Red Ink
भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच सोमवार को एक अहम आर्थिक समझौते पर मुहर लग गई। दोनों देशों ने फ़्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर करते हुए व्यापारिक रिश्तों को नई दिशा देने का संकेत दिया है। इस समझौते को दोनों पक्षों ने आर्थिक सहयोग और वैश्विक व्यापार में विस्तार की दिशा में बड़ा कदम बताया है।
रिकॉर्ड समय में पूरा हुआ समझौता
भारत की ओर से केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूज़ीलैंड की तरफ़ से व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस मौके पर गोयल ने कहा कि महज़ 9 महीनों में इस डील का पूरा होना दोनों देशों के बीच गहरे भरोसे और तेज़ी से आगे बढ़ने की इच्छाशक्ति को दर्शाता है। उन्होंने यह भी बताया कि बीते कुछ वर्षों में भारत कई देशों के साथ ऐसे समझौते कर चुका है और आगे भी यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ इसी तरह के समझौते की दिशा में काम जारी है।
‘ऐतिहासिक पड़ाव’ करार
न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफ़र लक्ज़न ने इस एग्रीमेंट को द्विपक्षीय संबंधों में “ऐतिहासिक मील का पत्थर” बताया। उन्होंने कहा कि यह समझौता न्यूज़ीलैंड के लिए दुनिया के सबसे तेज़ी से बढ़ते बाज़ारों में से एक—भारत—तक पहुंच आसान करेगा।
व्यापार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा
नेताओं के मुताबिक, इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और इनोवेशन के नए अवसर खुलेंगे। न्यूज़ीलैंड को अपने निर्यात बाज़ारों में विविधता लाने में मदद मिलेगी, वहीं भारत के निर्यातकों को शुरुआती दौर से ही बिना टैरिफ़ के न्यूज़ीलैंड के बाज़ार तक पहुंच मिल सकेगी। इसके अलावा, भारतीय उपभोक्ताओं को भी न्यूज़ीलैंड के उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों तक बेहतर पहुंच मिलने की उम्मीद जताई गई है। यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक साझेदारियों को मजबूत करने की होड़ तेज़ हो चुकी है, और भारत अपनी व्यापारिक पहुंच को लगातार विस्तार देने में जुटा है।




