AAP छोड़ने के बाद राघव चड्ढा का बड़ा बयान: “तीन रास्तों में से एक चुनना पड़ा”

The Red Ink
आम आदमी पार्टी (AAP) से अलग होकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थामने के बाद राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने पहली बार खुलकर अपनी बात रखी है। एक वीडियो संदेश जारी करते हुए उन्होंने पार्टी छोड़ने के पीछे की वजहें बताते हुए कहा कि यह फैसला मजबूरी में लेना पड़ा।

“काम करने और बोलने से रोका गया”
राघव चड्ढा ने कहा कि उन्होंने एक सफल पेशेवर करियर छोड़कर राजनीति में कदम रखा था, लेकिन जिस पार्टी को उन्होंने वर्षों तक मेहनत से खड़ा किया, उसी में उन्हें काम करने और संसद में अपनी बात रखने से रोका जाने लगा। उनका आरोप है कि पार्टी अब कुछ लोगों के नियंत्रण में सिमट गई है, जो जनहित के बजाय निजी हितों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

तीन विकल्पों में से चुना रास्ता
उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में उनके सामने तीन विकल्प थे—राजनीति छोड़ देना, पार्टी के भीतर रहकर सुधार की कोशिश करना, या फिर किसी अन्य दल के साथ नई शुरुआत करना। चड्ढा के मुताबिक, उन्होंने तीसरा विकल्प चुना, ताकि अपने अनुभव और ऊर्जा का इस्तेमाल “सकारात्मक राजनीति” के लिए कर सकें।

7 सांसदों का सामूहिक फैसला
राघव चड्ढा ने यह भी स्पष्ट किया कि यह फैसला अकेले उनका नहीं था, बल्कि कुल सात राज्यसभा सांसदों ने मिलकर AAP से अलग होने का निर्णय लिया। उन्होंने पहले दावा किया था कि दो-तिहाई सांसदों के समर्थन के चलते यह कदम दल-बदल कानून के दायरे में नहीं आएगा।

राज्यसभा में AAP की स्थिति कमजोर
इन सात सदस्यों के अलग होने के बाद राज्यसभा में आम आदमी पार्टी की संख्या घटकर महज तीन सांसदों तक सिमट सकती है, जिससे संसद में पार्टी की ताकत पर सीधा असर पड़ेगा।

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