Xi Jinping on BRICS: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान ब्रिक्स देशों से वैश्विक शांति, स्थिरता और अधिक न्यायसंगत वैश्विक व्यवस्था के लिए नेतृत्वकारी भूमिका निभाने की अपील की। जिनपिंग ने कहा कि ब्रिक्स देशों को “इतिहास के सही पक्ष” में मजबूती से खड़ा रहना चाहिए और अपने समय का अग्रदूत बनने का प्रयास करना चाहिए।
चीनी राष्ट्रपति का यह संदेश ऐसे समय में आया है जब यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बना हुआ है। नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान समेत कई सदस्य देशों के नेता मौजूद हैं। चीन के विदेश मंत्रालय ने भी शी जिनपिंग की भारत यात्रा और 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में उनकी भागीदारी की पुष्टि की है।
Xi Jinping on BRICS: शांति और स्थिरता में नेतृत्व की अपील
शी जिनपिंग ने ब्रिक्स देशों से वैश्विक शांति और स्थिरता बनाए रखने में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उनके संदेश में ब्रिक्स को केवल आर्थिक सहयोग का मंच न मानकर वैश्विक मामलों में प्रभावी भूमिका निभाने वाले समूह के रूप में आगे बढ़ाने पर जोर दिखाई दिया।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जिनपिंग ने नई दिल्ली में ब्रिक्स नेताओं के सम्मेलन के दौरान समूह से मौजूदा पश्चिम एशिया संघर्ष में शांति स्थापित करने की दिशा में भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युद्ध अंतरराष्ट्रीय समुदाय के हित में नहीं है और चीन अन्य ब्रिक्स देशों के साथ मिलकर शांति के प्रयासों में सहयोग करने के लिए तैयार है।
शी का यह रुख ऐसे वक्त सामने आया है जब ब्रिक्स के भीतर रूस, ईरान और चीन जैसे देशों के साथ भारत, यूएई, ब्राजील और अन्य सदस्य भी मौजूद हैं। ऐसे में समूह के भीतर अलग-अलग देशों के रणनीतिक हितों के बावजूद शांति और संवाद का साझा एजेंडा महत्वपूर्ण हो जाता है।
सभ्यताओं के बीच संवाद पर भी जोर
शी जिनपिंग ने विभिन्न सभ्यताओं के बीच संवाद, आपसी सीख और समझ को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि अलग-अलग सभ्यताओं के बीच बेहतर संवाद से देशों के बीच सहयोग और विश्वास मजबूत किया जा सकता है।
यह विचार ब्रिक्स के उस व्यापक एजेंडे से जुड़ा है जिसमें विकासशील देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और लोगों के स्तर पर संपर्क बढ़ाने पर जोर दिया जाता है।
चीन पहले भी ब्रिक्स को वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने वाले मंच के रूप में पेश करता रहा है। चीन के विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस साल की ब्रिक्स अध्यक्षता भारत के पास है और चीन ने नई दिल्ली में होने वाले सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए भारत को अपना समर्थन दिया है।
वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार की बात
शी जिनपिंग ने वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स को वैश्विक शासन व्यवस्था को अधिक न्यायसंगत और प्रभावी बनाने में नेतृत्व करना चाहिए।
चीन की ओर से ब्रिक्स को लेकर पहले भी बहुपक्षवाद, संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों और वैश्विक दक्षिण के हितों पर जोर दिया गया है। जून 2026 में नई दिल्ली में हुई ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक में चीन के विदेश मंत्रालय ने भी कहा था कि ब्रिक्स देशों को बहुपक्षवाद को आगे बढ़ाते हुए वैश्विक मामलों में न्याय और निष्पक्षता के लिए आवाज उठानी चाहिए।
सात साल बाद भारत पहुंचे शी जिनपिंग
शी जिनपिंग का भारत दौरा भी इस सम्मेलन को खास बनाता है। वह करीब सात साल बाद भारत पहुंचे हैं। उनकी यात्रा ऐसे समय हुई है जब भारत और चीन के संबंधों में 2020 के गलवान संघर्ष के बाद पैदा हुआ तनाव धीरे-धीरे कम करने की कोशिशें चल रही हैं।
हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत के बाद संबंधों में कुछ सुधार हुआ है। हालांकि, सीमा और रणनीतिक मुद्दों को लेकर दोनों देशों के बीच भरोसे की चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं।
रॉयटर्स के मुताबिक, दोनों देशों के संबंधों में सावधानी के साथ सामान्यीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ी है।
नई दिल्ली में शी की मौजूदगी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान समेत ब्रिक्स के प्रमुख नेता शामिल हो रहे हैं।
ब्रिक्स की बढ़ती भूमिका और नई चुनौती
ब्रिक्स के विस्तार के बाद समूह का दायरा पहले की तुलना में काफी बड़ा हो गया है। वर्तमान में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के अलावा मिस्र, इथियोपिया, ईरान, इंडोनेशिया और संयुक्त अरब अमीरात भी सदस्य हैं। रॉयटर्स के अनुसार, यह समूह दुनिया की 40 प्रतिशत से अधिक आबादी और वैश्विक अर्थव्यवस्था के करीब एक चौथाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है।
लेकिन समूह के विस्तार के साथ उसकी आंतरिक चुनौतियां भी बढ़ी हैं। अलग-अलग सदस्य देशों की विदेश नीति और रणनीतिक प्राथमिकताएं कई मुद्दों पर अलग हैं। इसके बावजूद ब्रिक्स में शांति, विकास, वैश्विक शासन में सुधार और वैश्विक दक्षिण की भूमिका जैसे मुद्दों पर साझा सहमति बनाने की कोशिश लगातार जारी है।
रॉयटर्स के अनुसार, नई दिल्ली में जारी सम्मेलन के दौरान ब्रिक्स देशों के बीच संयुक्त घोषणा को लेकर भी सहमति बनने की खबर सामने आई है। इसमें किसी एक देश का नाम लिए बिना एकतरफा युद्ध की निंदा किए जाने की बात कही गई है।
Xi Jinping on BRICS का संदेश क्यों अहम?
नई दिल्ली में शी जिनपिंग का संदेश ऐसे दौर में आया है जब दुनिया कई बड़े संघर्षों और भू-राजनीतिक तनावों से गुजर रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध के साथ पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों ने ऊर्जा, व्यापार, समुद्री सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी असर डाला है।
ऐसे माहौल में जिनपिंग का ब्रिक्स देशों से “इतिहास के सही पक्ष” में खड़े होने, शांति और स्थिरता के लिए नेतृत्व करने तथा वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान समूह की भूमिका को लेकर चीन की सोच को सामने रखता है।
भारत की मेजबानी में हो रहा 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें दुनिया की बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के नेता एक ऐसे समय में एक मंच पर हैं, जब वैश्विक व्यवस्था तेजी से बदल रही है। अब देखना होगा कि ब्रिक्स देश इन बड़े मुद्दों पर किस हद तक साझा रुख तैयार कर पाते हैं।



