Sanjay Raut on BRICS को लेकर शिवसेना (उद्धव ठाकरे) के सांसद संजय राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सवाल उठाए हैं। BRICS शिखर सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत आने और भारत-चीन संबंधों में सुधार की चर्चा के बीच राउत ने केंद्र सरकार से चीन के साथ सीमा विवाद को लेकर सवाल किया।
उन्होंने कहा कि अगर चीन के साथ रिश्ते सुधर रहे हैं तो पहले लद्दाख और गलवान से चीनी सेना के पीछे हटने और भारतीय जमीन वापस मिलने की बात होनी चाहिए।
राउत ने भारत-चीन सीमा विवाद को लेकर दोनों देशों के बीच हुई बातचीत पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि लंबे समय से चल रही वार्ताओं के बावजूद रिश्तों में कितना सुधार हुआ है।
Sanjay Raut on BRICS में चीन को लेकर मोदी से सवाल
Sanjay Raut on BRICS के दौरान संजय राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस रुख पर सवाल उठाया, जिसमें भारत और चीन के रिश्तों में सुधार की बात कही जा रही है।
राउत ने कहा कि चीन के शीर्ष नेतृत्व के भारत आने के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को सीमा विवाद का मुद्दा भी उठाना चाहिए। उनके मुताबिक, अगर दोनों देशों के संबंधों में सुधार हो रहा है तो चीन को लद्दाख और गलवान से पीछे हटना चाहिए और भारत की जमीन वापस करनी चाहिए।
राउत का यह बयान ऐसे समय आया है जब BRICS सम्मेलन के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत पहुंचे हैं।
लद्दाख और गलवान को लेकर क्या बोले संजय राउत?
संजय राउत ने अपने बयान में लद्दाख और गलवान का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से सवाल करते हुए कहा कि चीन के साथ संबंध सुधारने की बात के साथ यह भी पूछा जाना चाहिए कि सीमा पर हुए घटनाक्रम के बाद स्थिति कब सामान्य होगी।
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद लंबे समय से दोनों देशों के रिश्तों का संवेदनशील मुद्दा रहा है। इसी संदर्भ में राउत ने सरकार की चीन नीति और सीमा को लेकर चल रही बातचीत पर सवाल खड़े किए।
चीन के साथ 25 दौर की बातचीत पर उठाया सवाल
राउत ने भारत-चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर हुई वार्ताओं का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि दो साल के भीतर चीन के साथ 25 दौर की वार्ता हो चुकी है।
उन्होंने सवाल किया कि इतनी बातचीत के बाद भारत और चीन के रिश्तों में वास्तविक रूप से कितना सुधार आया है। राउत का सवाल सीधे तौर पर सीमा विवाद के समाधान और दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली को लेकर था।
यह बयान ऐसे समय आया है जब BRICS सम्मेलन के दौरान भारत और चीन के शीर्ष नेतृत्व के बीच बातचीत की संभावनाओं पर भी नजर बनी हुई है।
करीब सात साल बाद भारत आए शी जिनपिंग
करीब सात साल के अंतराल के बाद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग BRICS सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत पहुंचे हैं। उनके भारत दौरे को दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
शी जिनपिंग के BRICS सम्मेलन में शामिल होने के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय बैठक की संभावना भी जताई जा रही है। ऐसे में भारत-चीन संबंध, सीमा विवाद और आपसी रिश्तों में सुधार जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में हैं।
ईरान के राष्ट्रपति को लेकर भी राउत की टिप्पणी
संजय राउत ने BRICS सम्मेलन में पहुंचे ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान का भी जिक्र किया। उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति की तुलना शेर से करते हुए कहा कि वह शेर की तरह भारत आए हैं।
राउत ने कहा कि सम्मेलन में दूसरे नेता भी आए हैं, लेकिन वह ईरान को ज्यादा महत्व देते हैं। उन्होंने अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान के संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले छह महीनों तक अमेरिका और इजरायल का सामना करने वाले ईरान को वह ‘शेर’ मानते हैं।
BRICS Summit के बीच चीन और ईरान पर सियासी बयान
BRICS सम्मेलन के दौरान संजय राउत की प्रतिक्रिया ने भारत-चीन संबंधों और क्षेत्रीय राजनीति को लेकर अलग-अलग सवालों को सामने ला दिया है। एक तरफ चीन के राष्ट्रपति की भारत यात्रा को दोनों देशों के रिश्तों में संवाद बढ़ने के अवसर के तौर पर देखा जा रहा है, वहीं राउत ने सीमा विवाद को लेकर केंद्र सरकार से स्पष्टता की मांग की है।
Sanjay Raut on BRICS में सामने आए उनके बयान का मुख्य फोकस भारत-चीन सीमा विवाद, लद्दाख और गलवान से जुड़े सवाल तथा दोनों देशों के बीच हुई वार्ताओं के परिणाम पर रहा। इसके साथ ही उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति को लेकर भी अपनी राय रखी।
अब BRICS सम्मेलन के दौरान भारत और चीन के शीर्ष नेतृत्व के बीच होने वाली संभावित बातचीत और उससे निकलने वाले संदेश पर राजनीतिक और कूटनीतिक नजरें बनी हुई हैं।




