SGPGI के पूर्व कर्मचारी फणीश मणि त्रिपाठी ने अंगदान से रोशन की 5 जिंदगियां

The Red Ink

दुख की घड़ी में लिया गया एक मानवीय फैसला पांच परिवारों के लिए खुशियों की वजह बन गया। संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SGPGI) के सेवानिवृत्त कर्मचारी फणीश मणि त्रिपाठी के निधन के बाद उनके परिवार ने अंगदान की सहमति देकर मानवता की मिसाल पेश की। उनके अंगों के सफल प्रत्यारोपण से पांच मरीजों को नया जीवन और नई उम्मीद मिली है।

सड़क दुर्घटना के बाद ब्रेन डेड घोषित किए गए

जानकारी के अनुसार, फणीश मणि त्रिपाठी एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें इलाज के लिए SGPGI में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें ब्रेन डेड घोषित करना पड़ा। इस कठिन समय में परिवार ने समाज के लिए एक प्रेरणादायक निर्णय लेते हुए अंगदान के लिए सहमति दी।

दो किडनी, लिवर और कॉर्निया किए गए डोनेट
परिवार की सहमति के बाद SGPGI की विशेषज्ञ टीम ने सफलतापूर्वक उनके दो किडनी, एक लिवर और दोनों कॉर्निया को रिकवर किया। इसके बाद अंगों को जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू की गई।

पांच मरीजों को मिला नया जीवन
फणीश मणि त्रिपाठी की दोनों किडनी बहराइच और अमेठी के मरीजों को प्रत्यारोपित की गईं। वहीं उनका लिवर SGPGI में भर्ती एक मरीज को लगाया गया। इसके अलावा दोनों कॉर्निया को KGMU भेजा गया, जहां दो मरीजों की आंखों की रोशनी वापस लाने में उनका उपयोग किया गया।

अंगदान के प्रति जागरूकता का संदेश
डॉक्टरों का कहना है कि अंगदान किसी व्यक्ति के निधन के बाद भी कई लोगों को जीवन देने का सबसे बड़ा माध्यम बन सकता है। फणीश मणि त्रिपाठी के परिवार का यह फैसला समाज के लिए प्रेरणास्रोत है और अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

प्रदेश में बढ़ रही अंगदान की संस्कृति
विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में अंगदान को लेकर लोगों की सोच में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। SGPGI और अन्य चिकित्सा संस्थान लगातार लोगों को अंगदान के लिए जागरूक करने का अभियान चला रहे हैं ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद मरीजों को जीवनदान मिल सके।

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