The Red Ink
उत्तर प्रदेश में लंबे इंतजार के बाद आखिरकार पुलिस विभाग को स्थायी नेतृत्व मिल गया है। वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी राजीव कृष्ण को राज्य का नया पूर्णकालिक पुलिस महानिदेशक (DGP) नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति के साथ ही करीब चार वर्षों से चली आ रही कार्यवाहक डीजीपी व्यवस्था समाप्त हो गई है। राज्य सरकार ने आधिकारिक आदेश जारी कर राजीव कृष्ण की नियुक्ति पर मुहर लगा दी है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उन्हें स्थायी डीजीपी के रूप में अपडेट कर दिया गया है। नियमों के अनुसार अब वह कम से कम दो साल तक इस पद पर बने रहेंगे।
एक साल तक कार्यवाहक DGP रहने के बाद मिली स्थायी जिम्मेदारी
राजीव कृष्ण बीते एक वर्ष से प्रदेश के कार्यवाहक डीजीपी के रूप में जिम्मेदारी निभा रहे थे। उन्हें मई 2025 के अंत में इस पद का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था और 1 जून 2025 से उन्होंने आधिकारिक रूप से कार्यभार संभाला था। अब स्थायी नियुक्ति मिलने के बाद उनके पास उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और पुलिस सुधारों को दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाने का अवसर होगा।
इंजीनियरिंग से आईपीएस तक का सफर
26 जून 1969 को गौतमबुद्ध नगर में जन्मे राजीव कृष्ण ने इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। तकनीकी शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने सिविल सेवा का रास्ता चुना और 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी बने। अपने तीन दशक से अधिक लंबे करियर में उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस के कई अहम पदों पर काम करते हुए एक सख्त और पेशेवर अधिकारी की छवि बनाई।
प्रदेश के कई अहम जिलों में संभाली कमान
पुलिस सेवा की शुरुआत उन्होंने इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में प्रशिक्षु अधिकारी के रूप में की थी। इसके बाद बरेली, कानपुर और अलीगढ़ में सहायक पुलिस अधीक्षक के रूप में तैनात रहे। 1997 में उन्हें पहली बार जिले की कमान मिली और फिरोजाबाद के पुलिस अधीक्षक बनाए गए। इसके बाद उन्होंने इटावा, मथुरा, बुलंदशहर, फतेहगढ़, गौतमबुद्ध नगर, आगरा, लखनऊ और बरेली जैसे महत्वपूर्ण जिलों में नेतृत्व किया। राजीव कृष्ण मेरठ रेंज के आईजी भी रहे और मायावती सरकार के दौरान लखनऊ के डीआईजी पद की जिम्मेदारी भी संभाली।
केंद्र से लौटकर संभाले कई बड़े पद
वर्ष 2012 में वे केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर चले गए थे। 2017 में वापसी के बाद उन्हें पुलिस अकादमी मुरादाबाद में तैनात किया गया। इसके बाद लखनऊ और आगरा जोन में एडीजी के रूप में उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। फरवरी 2024 में उन्हें महानिदेशक (DG) के पद पर पदोन्नत किया गया और बाद में कार्यवाहक डीजीपी बनाया गया। अब वे प्रदेश पुलिस के सर्वोच्च पद पर स्थायी रूप से नियुक्त हो गए हैं।
DGP की दौड़ में इन वरिष्ठ अधिकारियों को छोड़ा पीछे
स्थायी डीजीपी की नियुक्ति के लिए कई वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नाम चर्चा में थे। उत्तर प्रदेश सरकार ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को 19 अधिकारियों का पैनल भेजा था। विस्तृत समीक्षा के बाद तीन नाम अंतिम सूची में शामिल किए गए, जिनमें राजीव कृष्ण, रेणुका मिश्रा और पीयूष आनंद प्रमुख थे। अंततः सरकार ने राजीव कृष्ण के नाम पर भरोसा जताते हुए उन्हें प्रदेश पुलिस का नेतृत्व सौंपने का फैसला किया।
चार साल तक क्यों नहीं मिला स्थायी DGP?
उत्तर प्रदेश में मई 2022 के बाद से कोई स्थायी डीजीपी नियुक्त नहीं किया गया था। तत्कालीन डीजीपी मुकुल गोयल को पद से हटाए जाने के बाद लगातार कार्यवाहक अधिकारियों को यह जिम्मेदारी सौंपी जाती रही। इस दौरान डीएस चौहान, आरके विश्वकर्मा, विजय कुमार, प्रशांत कुमार और बाद में राजीव कृष्ण ने कार्यवाहक डीजीपी के रूप में कार्यभार संभाला। अब पहली बार राज्य को पूर्णकालिक पुलिस प्रमुख मिला है।
कानून-व्यवस्था पर रहेगी सबकी नजर
राजीव कृष्ण की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब उत्तर प्रदेश सरकार अपराध नियंत्रण, तकनीकी पुलिसिंग और कानून-व्यवस्था को लेकर लगातार सख्त रुख अपनाए हुए है। ऐसे में उनकी अगुवाई में प्रदेश पुलिस की रणनीति और कार्यशैली पर आने वाले वर्षों में विशेष नजर रहेगी।




