The Red Ink
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का कहना है कि घटनास्थल से मिले वीडियो फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर रातभर चलाए गए अभियान के दौरान आरोपियों को हिरासत में लिया गया। इस बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हमले को गंभीर राजनीतिक साजिश करार देते हुए दावा किया कि यदि अभिषेक ने हेलमेट नहीं पहना होता तो उनकी जान को खतरा हो सकता था।
अस्पताल पर दबाव डालने का आरोप
कोलकाता में मीडिया से बातचीत करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि हमले के बाद अभिषेक को चिकित्सा सहायता देने में भी बाधाएं पैदा की गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से अस्पताल प्रबंधन पर दबाव बनाया गया ताकि उन्हें जल्द डिस्चार्ज किया जा सके। मुख्यमंत्री के अनुसार, हमले के कारण अभिषेक के शरीर में गंभीर चोटें आईं और खून के थक्के बनने जैसी चिकित्सकीय स्थिति भी सामने आई थी।
चुनावी हिंसा के पीड़ितों से मिलने पहुंचे थे अभिषेक
घटना शनिवार को दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर क्षेत्र में हुई। अभिषेक बनर्जी यहां विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा में प्रभावित टीएमसी कार्यकर्ताओं और उनके परिवारों से मुलाकात करने पहुंचे थे। आरोप है कि इसी दौरान विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों के एक समूह ने उन्हें घेर लिया। मौके पर नारेबाजी हुई और कथित तौर पर उनके ऊपर अंडे, जूते तथा अन्य वस्तुएं फेंकी गईं। अफरा-तफरी के बीच उनकी शर्ट भी फट गई। सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें हेलमेट पहनाकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया।
ममता ने उठाए कई सवाल
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि यदि अभिषेक की स्थिति सामान्य थी तो उन्हें अस्पताल के विशेष निगरानी वार्ड में क्यों रखा गया था। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि चिकित्सकीय निगरानी की आवश्यकता के बावजूद उन्हें जल्द छुट्टी देने का फैसला कैसे लिया गया। फिलहाल डॉक्टरों की सलाह पर अभिषेक का उपचार घर पर जारी है, जहां आवश्यक मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
राजनीतिक तनाव का केंद्र बना सोनारपुर
सोनारपुर दक्षिण 24 परगना का एक राजनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है, जहां वर्षों से तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच कड़ी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती रही है। हाल के विधानसभा चुनावों के बाद भी यहां कई हिंसक घटनाएं सामने आई थीं। चुनाव परिणामों के बाद क्षेत्र में राजनीतिक टकराव, आगजनी और हमलों की घटनाओं ने माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया था।
बंगाल की राजनीति में बढ़ा टकराव
अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के बाद राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। टीएमसी इसे लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला बता रही है, जबकि विपक्षी दलों की ओर से भी मामले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच जारी है और वीडियो फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान तथा अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
चुनावी बदलाव के बाद बढ़ी राजनीतिक संवेदनशीलता
गौरतलब है कि हालिया पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने पहली बार स्पष्ट बहुमत हासिल कर राज्य में सरकार बनाई थी। इसके बाद से कई इलाकों में राजनीतिक तनाव और टकराव की घटनाएं चर्चा का विषय बनी हुई हैं। ऐसे माहौल में एक प्रमुख विपक्षी नेता पर हमला राज्य की राजनीति को और गर्मा सकता है।




