CBSE Result में बड़ा झटका: 3% गिरा पास प्रतिशत, नई डिजिटल कॉपी चेकिंग पर उठे सवाल

The Red Ink
सीबीएसई 12वीं के रिज़ल्ट इस बार लाखों छात्रों के लिए उम्मीद से उलट साबित हुए। पास प्रतिशत में करीब 3 फीसदी की गिरावट ने छात्रों, अभिभावकों और स्कूलों को चौंका दिया है। बोर्ड ने पहली बार ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम से कॉपियां जांचीं, लेकिन अब इसी डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि उनके लंबे और डिटेल जवाबों का सही आकलन नहीं किया गया, जबकि शिक्षाविद इसे जल्दबाजी में लागू किया गया प्रयोग बता रहे हैं।

कोविड के बाद पहली बार इतनी बड़ी गिरावट
सीबीएसई के मुताबिक इस साल 12वीं में 85.20 फीसदी छात्र पास हुए हैं, जबकि 2025 में यह आंकड़ा 88.39 फीसदी था। यानी एक साल में करीब 3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। कोविड के बाद यह अब तक की सबसे बड़ी कमी मानी जा रही है। अगर पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2024 में पास प्रतिशत 87.98 था, जबकि 2022 में यह 92.71 फीसदी तक पहुंच गया था। कोरोना काल में 2021 में बिना बोर्ड परीक्षा के वैकल्पिक मूल्यांकन के आधार पर रिज़ल्ट जारी हुआ था और तब 99.37 फीसदी छात्र पास घोषित किए गए थे।

पहली बार लागू हुआ डिजिटल मूल्यांकन सिस्टम
इस बार सीबीएसई ने पारंपरिक कॉपी जांचने की प्रक्रिया की जगह ऑन स्क्रीन मार्किंग यानी OSM सिस्टम लागू किया। इसके तहत करीब 98 लाख से ज्यादा उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर डिजिटल तरीके से जांचा गया। बोर्ड का दावा है कि इससे प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनी। करीब 70 हजार शिक्षकों को ऑनलाइन मूल्यांकन में लगाया गया था। सीबीएसई ने फरवरी में मॉक इवेलुएशन भी कराया था ताकि शिक्षकों को नई प्रणाली की ट्रेनिंग दी जा सके।

छात्रों ने लगाए नंबर काटने के आरोप
रिज़ल्ट आने के बाद सोशल मीडिया पर छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। कई छात्रों का कहना है कि उनके लिखे हुए विस्तृत उत्तरों को ठीक से पढ़ा ही नहीं गया। बिहार के छात्र तन्मय कश्यप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि महीनों की मेहनत के बावजूद उम्मीद से बेहद कम नंबर आए हैं। गाजियाबाद के एक छात्र ने दावा किया कि वैकल्पिक प्रश्न सही करने के बावजूद नंबर नहीं मिले। छात्रों का कहना है कि डिजिटल स्क्रीन पर कॉपी जांचने के दौरान जवाबों की गहराई नजरअंदाज हुई।

शिक्षाविद बोले- जल्दबाजी में लागू हुआ सिस्टम
पूर्व एनसीईआरटी निदेशक Krishna Kumar ने भी OSM प्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बोर्ड ने बिना पर्याप्त तैयारी के नई व्यवस्था लागू कर दी। उन्होंने स्कैन की गई कॉपियों की गुणवत्ता और मूल्यांकन की विश्वसनीयता पर चिंता जताई। उनके मुताबिक बोर्ड का मुख्य फोकस जल्दी रिज़ल्ट जारी करना था, लेकिन इसका असर छात्रों के भविष्य पर पड़ सकता है।

सोशल मीडिया पर शुरू हुआ विरोध अभियान
रिज़ल्ट के बाद सोशल मीडिया पर OSM के खिलाफ अभियान शुरू हो गया है। ऑनलाइन याचिका पर 24 घंटे के भीतर 10 हजार से ज्यादा लोगों ने हस्ताक्षर किए। कई कोचिंग संस्थानों और शिक्षकों ने भी कॉपी दोबारा जांचने की मांग उठाई है। गाजियाबाद के कोचिंग संचालक अनुराग त्यागी ने कहा कि बड़ी संख्या में छात्रों को लग रहा है कि उन्हें वास्तविक प्रदर्शन से कम नंबर मिले हैं। उनका कहना है कि अगर दूसरे बोर्डों के मुकाबले CBSE छात्रों के अंक कम रहे तो कॉलेज एडमिशन में परेशानी हो सकती है।

शिक्षकों की क्षमता और चयन प्रक्रिया पर भी सवाल
उत्तर प्रदेश के एक मूल्यांकन केंद्र से जुड़े अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कॉपी जांचने वाले शिक्षकों के अनुभव की सही जांच नहीं हो रही। उन्होंने कहा कि कई कम अनुभवी शिक्षकों के हाथ में बोर्ड कॉपियां पहुंच गईं, जिसका असर रिज़ल्ट पर पड़ा हो सकता है। उनका कहना है कि सीबीएसई के ओएसिस सॉफ्टवेयर में शिक्षकों के अनुभव संबंधी डेटा का सत्यापन जरूरी है ताकि कम अनुभव वाले शिक्षकों से बोर्ड कॉपियां न जांचवाई जाएं।
बदला हुआ पेपर पैटर्न भी बना वजह?
कुछ स्कूल प्रिंसिपल्स का मानना है कि इस बार स्किल बेस्ड और केस स्टडी आधारित प्रश्नों ने भी छात्रों की मुश्किलें बढ़ाईं। उनका कहना है कि छात्र अभी इस नए पैटर्न के मुताबिक खुद को पूरी तरह तैयार नहीं कर पाए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अब सिर्फ रटकर पढ़ाई करने वाले छात्र ऐसे सवालों में संघर्ष कर रहे हैं, जहां कॉन्सेप्ट आधारित जवाब लिखने पड़ते हैं।

कोचिंग कल्चर और पढ़ाई की गुणवत्ता पर भी बहस
कुछ स्कूल प्रबंधकों का मानना है कि सिर्फ OSM को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा। उनके मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में छात्रों की बुनियादी पढ़ाई कमजोर हुई है। खासकर ग्रामीण इलाकों में विज्ञान वर्ग चुनने का दबाव बढ़ा है, जबकि कई छात्र उसकी तैयारी के स्तर तक नहीं पहुंच पाते। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में छात्र सिर्फ JEE और NEET की तैयारी में लगे रहते हैं और स्कूल की नियमित पढ़ाई पर ध्यान नहीं देते। इसका सीधा असर बोर्ड रिज़ल्ट पर दिखाई दे रहा है।

CBSE ने नहीं दिया आधिकारिक जवाब
हालांकि सीबीएसई ने अब तक OSM पर उठ रहे सवालों को लेकर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। बोर्ड का कहना है कि रीचेकिंग और जवाबदेही की व्यवस्था मौजूद है। लेकिन इस साल के रिज़ल्ट ने मूल्यांकन प्रणाली, शिक्षा की गुणवत्ता और परीक्षा पैटर्न को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

Hot this week

ममता के सबसे भरोसेमंद साथी फिरहाद हकीम का इस्तीफा, TMC संकट और गहराया

The Red Ink पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस...

Topics

ममता के सबसे भरोसेमंद साथी फिरहाद हकीम का इस्तीफा, TMC संकट और गहराया

The Red Ink पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस...

Related Articles

Popular Categories