The Red Ink
बहुजन समाज पार्टी प्रमुख Mayawati ने समाजवादी पार्टी पर बड़ा हमला बोलते हुए ब्राह्मण समाज को लेकर हाल में दिए गए कथित आपत्तिजनक बयान को लेकर सपा नेतृत्व की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। मायावती ने कहा कि सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता की टिप्पणी से ब्राह्मण समाज की भावनाओं को ठेस पहुंची है और पार्टी प्रमुख को तत्काल संज्ञान लेकर समाज से माफी मांगनी चाहिए।
ब्राह्मण समाज पर टिप्पणी को लेकर बढ़ा विवाद
मायावती ने अपने बयान में कहा कि सपा के एक प्रमुख राष्ट्रीय प्रवक्ता द्वारा ब्राह्मण समाज को लेकर की गई अभद्र और आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद पूरे प्रदेश में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस द्वारा मुकदमा दर्ज किए जाने के बावजूद मामला शांत नहीं हो रहा है और सपा नेतृत्व की खामोशी विवाद को और ज्यादा गंभीर बना रही है।
बसपा सुप्रीमो ने कहा कि इस तरह के गैर-जिम्मेदाराना बयान से ब्राह्मण समाज के सम्मान और स्वाभिमान को ठेस पहुंची है। ऐसे में सपा मुखिया को आगे आकर सार्वजनिक रूप से क्षमा याचना करनी चाहिए।
“सपा का जातिवादी चरित्र नहीं बदला”
मायावती ने आरोप लगाया कि यह पूरा मामला सपा की कथित जातिवादी राजनीति को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि दलितों, अति पिछड़ों और मुस्लिम समाज की तरह अब ब्राह्मण समाज को लेकर भी सपा का रवैया लोगों के सामने आ चुका है।
उन्होंने कहा कि इस प्रकरण से यह साफ हो गया है कि सपा का चाल-चरित्र अभी भी जातिवादी मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाया है और समय के साथ यह और गहरा हुआ है।
वर्तमान सरकार पर भी उठाए सवाल
बसपा प्रमुख ने अपने बयान में वर्तमान सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज के भीतर मौजूदा सरकार के रवैये को लेकर भी नाराजगी देखी जा रही है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मायावती ने दावा किया कि बसपा सरकार के दौरान ब्राह्मण समाज को सम्मान और उचित भागीदारी दी गई थी। उन्होंने कहा कि बीएसपी ने हमेशा “सर्वसमाज” की राजनीति की है और पार्टी में “यूज एंड थ्रो” की नीति नहीं रही।
राजनीतिक गलियारों में तेज हुई बयानबाज़ी
ब्राह्मण समाज को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब राजनीतिक रंग पकड़ता जा रहा है। एक तरफ विपक्षी दल सपा पर हमलावर हैं तो दूसरी ओर आने वाले चुनावों को देखते हुए जातीय समीकरणों की राजनीति भी तेज होती दिखाई दे रही है।



