काउंटिंग सुपरवाइजर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: TMC की याचिका खारिज

The Red Ink
सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को मतगणना प्रक्रिया से जुड़े एक अहम मामले में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की आपत्ति खारिज कर दी। कोर्ट ने साफ किया कि काउंटिंग सुपरवाइजर के रूप में केंद्र सरकार और PSU कर्मचारियों की नियुक्ति नियमों के खिलाफ नहीं है और चुनाव आयोग का सर्कुलर ही प्रभावी रहेगा।

कोर्ट का रुख: सर्कुलर में कोई खामी नहीं
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की विशेष पीठ ने कहा कि 13 अप्रैल 2026 को जारी चुनाव आयोग का सर्कुलर पूरी तरह लागू रहेगा। इसके लिए अलग से किसी नए आदेश की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि काउंटिंग स्टाफ की नियुक्ति चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आती है।

हाईकोर्ट के फैसले को भी मिली पुष्टि
दरअसल, TMC ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें केंद्र सरकार और PSU कर्मचारियों को काउंटिंग सुपरवाइजर बनाने को सही ठहराया गया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि केंद्रीय कर्मचारियों पर राजनीतिक प्रभाव के आरोप केवल आशंका हैं, जिनका कोई ठोस प्रमाण नहीं है। अगर किसी को आपत्ति है, तो वह चुनाव याचिका के जरिए इसे चुनौती दे सकता है।

बेंच की टिप्पणी: केंद्र और राज्य कर्मचारी समान
सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा कि यह मानना गलत है कि केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारी अलग-अलग तरह के होते हैं। दोनों ही सरकारी कर्मचारी हैं और नियमों के तहत किसी भी वर्ग से अधिकारियों की नियुक्ति की जा सकती है। जस्टिस बागची ने यह भी कहा कि काउंटिंग सुपरवाइजर और असिस्टेंट के रूप में केंद्र सरकार के अधिकारियों की नियुक्ति पूरी तरह वैध है, भले ही चयन एक ही समूह से क्यों न किया गया हो।

सुनवाई में क्या-क्या हुआ
TMC की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि मुख्य चुनाव अधिकारी के पत्र में मतगणना में गड़बड़ी की आशंका जताई गई है, जो राज्य सरकार पर सवाल उठाने जैसा है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसी आशंका है, तो इसके समर्थन में ठोस डेटा सार्वजनिक होना चाहिए। इस पर कोर्ट ने कहा कि काउंटिंग प्रक्रिया में राजनीतिक दलों की सहमति लेना जरूरी नहीं है और नियमों के तहत केंद्र या राज्य, किसी भी सरकार के अधिकारी नियुक्त किए जा सकते हैं।

चुनाव आयोग और अधिकारियों का पक्ष
पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने भी साफ किया कि किसी राजनीतिक दल को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि मतगणना में कौन शामिल होगा। यह पूरी प्रक्रिया रिटर्निंग ऑफिसर के अधिकार क्षेत्र में आती है।

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