Nithari Case Surendra Koli Death के मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है। 2006 के चर्चित निठारी हत्याकांड में आरोपी रहे और नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट से आखिरी मामले में भी बरी किए गए सुरेंद्र कोली शुक्रवार को हरिद्वार के भूपतवाला इलाके में मृत पाए गए। पुलिस के मुताबिक, उनका शव एक चाय के खोखे के अंदर मिला, जिसे वह पिछले कुछ दिनों से चला रहे थे। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।
प्रारंभिक जांच में मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, हालांकि अंतिम स्थिति पोस्टमार्टम और जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
Nithari Case Surendra Koli Death: चाय के खोखे में मिला शव
हरिद्वार पुलिस के मुताबिक, सुरेंद्र कोली पिछले कुछ महीनों से शहर में रह रहे थे। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, वह पहले रोशनाबाद में सुरक्षा गार्ड के तौर पर काम कर चुके थे और बाद में भूपतवाला इलाके में पहुंचे। उन्होंने लाल माता मंदिर के सामने चाय का खोखा शुरू किया था। इसी जगह उनका शव मिला।
पुलिस अधिकारी शिशुपाल सिंह नेगी के मुताबिक, सप्तऋषि इलाके में एक व्यक्ति का शव मिलने की सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। प्रारंभिक तौर पर मामला आत्महत्या का लग रहा है। फॉरेंसिक टीम ने मौके पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाए हैं और शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है।
पुलिस ने सुरेंद्र कोली के परिवार को घटना की जानकारी दे दी है। उनका मूल संबंध उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के भिकियासैंण क्षेत्र से बताया जाता है।
फिलहाल पुलिस मौत की परिस्थितियों की जांच कर रही है। इसलिए आत्महत्या के पीछे की वजह को लेकर किसी तरह का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने आखिरी मामले में किया था बरी
सुरेंद्र कोली के जीवन का सबसे चर्चित अध्याय निठारी हत्याकांड से जुड़ा रहा। नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ लंबित आखिरी मामले में भी उनकी सजा को रद्द करते हुए उन्हें बरी कर दिया था।
11 नवंबर 2025 को चीफ जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ ने कोली की क्यूरेटिव याचिका पर सुनवाई करते हुए उनकी दोषसिद्धि को खत्म कर दिया और रिहाई का आदेश दिया। यह निठारी से जुड़े उनके खिलाफ बचा आखिरी मामला था। इससे पहले वह 12 अन्य मामलों में भी बरी हो चुके थे।
सुप्रीम कोर्ट ने जांच और सबूतों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए थे। अदालत के मुताबिक, अभियोजन की ओर से पेश परिस्थितिजन्य साक्ष्यों में पर्याप्त फोरेंसिक पुष्टि नहीं थी और कथित कबूलनामे की विश्वसनीयता पर भी सवाल थे।
अदालत ने यह भी कहा था कि अपराध कितने भी गंभीर क्यों न हों, किसी व्यक्ति को केवल संदेह के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता। आपराधिक मामले में दोष साबित करने के लिए कानूनी मानकों के अनुरूप ठोस सबूत जरूरी हैं।
क्या था निठारी हत्याकांड?
निठारी मामला वर्ष 2005-06 के दौरान नोएडा के सेक्टर-31 स्थित निठारी गांव में बच्चों और युवतियों के लापता होने के मामलों से सामने आया था। दिसंबर 2006 में डी-5 बंगले के आसपास मानव अवशेष मिलने के बाद पूरे मामले ने देशभर में ध्यान खींचा।
डी-5 मकान कारोबारी मोनिंदर सिंह पंधेर का था, जहां सुरेंद्र कोली घरेलू सहायक के तौर पर काम करता था। जांच के दौरान दोनों को अलग-अलग मामलों में आरोपी बनाया गया। बाद में सीबीआई ने मामले की जांच की और कई एफआईआर दर्ज हुईं।
कोली को अलग-अलग मामलों में दोषी ठहराया गया और कई मामलों में मौत की सजा भी सुनाई गई। मोनिंदर सिंह पंधेर भी कुछ मामलों में आरोपी रहे।
लेकिन वर्षों तक चली न्यायिक प्रक्रिया में निचली अदालतों के फैसलों के बाद हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में तस्वीर बदलती गई।
हाई कोर्ट ने भी जांच और सबूतों पर उठाए थे सवाल
2023 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने निठारी से जुड़े 12 मामलों में सुरेंद्र कोली को बरी कर दिया था। मोनिंदर सिंह पंधेर को भी उनके खिलाफ लंबित मामलों में राहत मिली।
हाई कोर्ट के फैसलों में जांच की प्रक्रिया और सबूत जुटाने के तरीके पर सवाल उठे थे। अदालत के सामने कथित कबूलनामे, फोरेंसिक साक्ष्य और जांच के अलग-अलग चरणों में अभियोजन के बदलते रुख जैसे मुद्दे आए।
बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। शीर्ष अदालत ने भी यह माना कि पहले के मामलों में जिन सबूतों को अविश्वसनीय या अपर्याप्त माना गया था, उन्हीं परिस्थितियों के आधार पर आखिरी मामले में दोषसिद्धि बनाए रखना कानूनी रूप से उचित नहीं था।
मोनिंदर सिंह पंधेर भी हो चुके हैं बरी
निठारी मामले में सुरेंद्र कोली के साथ मोनिंदर सिंह पंधेर भी प्रमुख आरोपी रहे। पंधेर को भी अदालतों से राहत मिल चुकी है। 2023 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ लंबित मामलों में बरी किए जाने का फैसला सुनाया था।
इस तरह वर्षों तक चले मुकदमों के बाद निठारी मामले में जिन दो प्रमुख आरोपियों के नाम सबसे ज्यादा सामने आए थे, दोनों ही अंततः अदालतों से बरी हो गए।
हालांकि, अदालतों के फैसलों का यह अर्थ नहीं है कि निठारी में हुए अपराधों से जुड़े सवालों का पूरा जवाब मिल गया। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में अपराधों की गंभीरता और पीड़ित परिवारों की पीड़ा को स्वीकार करते हुए यह भी कहा था कि उपलब्ध साक्ष्य कानूनी मानक के मुताबिक वास्तविक अपराधी की पहचान और दोष साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं थे।
अब हरिद्वार में मौत की जांच पर नजर
सुरेंद्र कोली की मौत ने निठारी मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। हालांकि इस बार मामला उनके खिलाफ किसी आपराधिक मुकदमे का नहीं, बल्कि उनकी अपनी मौत की जांच का है।
पुलिस के मुताबिक, मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। इसलिए अभी मौत की वजह और उससे जुड़े किसी संभावित कारण के बारे में आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
निठारी मामले में लगभग दो दशक तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद सुरेंद्र कोली नवंबर 2025 में सभी लंबित मामलों से बरी होकर जेल से बाहर आए थे। अब सितंबर 2026 में हरिद्वार में उनकी मौत की खबर सामने आई है। इस घटना की परिस्थितियों को लेकर पुलिस की जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आगे की तस्वीर साफ करेगी।



