UPI Transaction Charges को लेकर कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है। सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर लगाए गए नए Merchant Discount Rate (MDR) से डिजिटल भुगतान महंगा हो सकता है और इसका असर आम लोगों पर पड़ सकता है। हालांकि, सरकारी स्पष्टीकरण के मुताबिक यह कोई टैक्स नहीं है, बल्कि चुनिंदा Person-to-Merchant (P2M) लेन-देन पर लागू होने वाला MDR है, जिसका भुगतान व्यापारी करेगा।
सुरजेवाला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर इस फैसले की आलोचना की। उन्होंने इसे आम लोगों पर बोझ बढ़ाने वाला कदम बताया और दावा किया कि इससे डिजिटल तथा कैशलेस भारत के लक्ष्य को नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस व्यवस्था से अमेरिकी कंपनियों को फायदा होगा और आम भारतीयों पर भुगतान का बोझ आएगा।
UPI Transaction Charges पर सुरजेवाला का बड़ा हमला
रणदीप सिंह सुरजेवाला ने अपने पोस्ट में केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि 14 सितंबर 2026 को वह दिन के तौर पर याद किया जाएगा जब सरकार ने ₹2,000 से अधिक के UPI लेन-देन पर शुल्क लगाने का रास्ता खोला। उन्होंने इसे ‘विश्वासघात और आत्मसमर्पण’ से जोड़ते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।
सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि सरकार UPI को आम आदमी को निशाना बनाने वाली ‘टैक्स लगाने और वसूलने वाली मशीन’ में बदल रही है। उन्होंने कहा कि कीमतों में बढ़ोतरी की स्थिति में डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल करने वाले लोगों पर अप्रत्यक्ष रूप से अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
हालांकि, यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि सरकार और NPCI के अनुसार नया UPI Transaction Charges ढांचा टैक्स नहीं है। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि MDR सरकार या NPCI द्वारा टैक्स के रूप में नहीं लिया जाएगा। इससे मिलने वाली राशि भुगतान व्यवस्था से जुड़े अलग-अलग भागीदारों के बीच वितरित होगी।
₹2,000 से ऊपर UPI Payment पर कितना शुल्क लगेगा?
NPCI की ओर से तय नए ढांचे के तहत ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा Person-to-Merchant यानी P2M UPI लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगी। ₹75,000 या उससे अधिक के लेन-देन के लिए MDR की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन रखी गई है।
मसलन, ₹3,000 का पात्र P2M भुगतान होने पर 0.4 प्रतिशत की दर से MDR ₹12 होगा। वहीं ₹50,000 के भुगतान पर यह राशि ₹200 होगी। ₹75,000 के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत के हिसाब से ₹300 बनता है और इसके बाद अधिक राशि के भुगतान पर भी MDR ₹300 से ज्यादा नहीं होगा।
यह शुल्क सीधे हर UPI उपयोगकर्ता से वसूल किए जाने वाला चार्ज नहीं है। मौजूदा व्यवस्था के मुताबिक MDR व्यापारी पक्ष से जुड़ा शुल्क है और सरकार ने बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी है कि व्यापारी इसे ग्राहक पर न डालें।
किन UPI Payments पर नहीं लगेगा MDR?
नए नियम में सभी UPI भुगतान को शुल्क के दायरे में नहीं रखा गया है। Person-to-Person यानी P2P भुगतान पूरी तरह मुफ्त रहेंगे, चाहे ट्रांजैक्शन की राशि कितनी भी हो। इसी तरह ₹2,000 तक के P2M भुगतान भी MDR से बाहर रहेंगे। PIB के मुताबिक लगभग 96 प्रतिशत P2M UPI लेन-देन नए MDR से प्रभावित नहीं होंगे।
छोटे कारोबारियों के लिए भी अलग प्रावधान किया गया है। भारतीय एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, UPI QR के जरिये हर महीने ₹1 लाख तक प्राप्त करने वाले छोटे विक्रेताओं को नए MDR से छूट दी गई है।
कुछ विशेष क्षेत्रों के लिए भी अलग शुल्क व्यवस्था रखी गई है। रिपोर्टों के अनुसार रेलवे, टेलीकॉम, बीमा और ईंधन जैसी कुछ श्रेणियों में ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत के बजाय फ्लैट ₹5 MDR का प्रावधान है।
कांग्रेस और सरकार के दावों में क्या अंतर है?
इस पूरे मामले में कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने नए शुल्क ढांचे को आम लोगों के लिए बोझ बढ़ाने वाला कदम बताया है। उनका आरोप है कि इसका असर अंततः ग्राहकों तक पहुंच सकता है और डिजिटल भुगतान को नुकसान हो सकता है।
दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि इसे UPI पर टैक्स के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। PIB के अनुसार MDR भुगतान व्यवस्था में शामिल बैंकों और पेमेंट एप्लिकेशन प्रदाताओं समेत अलग-अलग भागीदारों के बीच वितरित होगा। सरकार ने इसे UPI इकोसिस्टम के संचालन, विस्तार और दीर्घकालिक स्थिरता से जोड़कर समझाया है।
इसलिए UPI Transaction Charges को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 15 अक्टूबर से लागू होने वाला नया MDR सभी UPI ट्रांजैक्शन पर नहीं है। यह मुख्य रूप से ₹2,000 से ऊपर के पात्र P2M भुगतान पर लागू होगा, जबकि P2P भुगतान और ₹2,000 तक के P2M भुगतान मुफ्त रहेंगे।
सुरजेवाला ने इस फैसले को लेकर सरकार पर राजनीतिक हमला बोला है, जबकि सरकार और NPCI की ओर से इसे टैक्स नहीं बल्कि MDR व्यवस्था बताया गया है। ऐसे में नए नियम का वास्तविक असर इस बात पर भी निर्भर करेगा कि व्यापारी इस शुल्क को अपने स्तर पर वहन करते हैं या वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में इसका कोई प्रभाव दिखाई देता है।




