ST Hasan on UCC: ‘कुरान में जो हुक्म है, उसी पर चलेंगे’, UCC पर बोले पूर्व सांसद; इमरान मसूद पर भी साधा निशाना

ST Hasan on UCC को लेकर समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन का बड़ा बयान सामने आया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 2029 से पहले बीजेपी नेतृत्व वाले NDA के 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने के बयान के बाद मुरादाबाद में एसटी हसन ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वह कुरान की रोशनी में बताए गए प्रावधानों को मानेंगे और शरियत की मांग करेंगे। एसटी हसन ने कहा कि कुरान में जो हुक्म दिया गया है, वे उसी के मुताबिक चलेंगे।

अमित शाह ने 13 सितंबर को मुंबई में कहा था कि बीजेपी और NDA द्वारा शासित 21 राज्यों में 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले UCC लागू किया जाएगा। उनके इस बयान के बाद अलग-अलग राजनीतिक दलों और नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

ST Hasan on UCC: ‘शरियत की मांग करेंगे’

मुरादाबाद में UCC को लेकर पूछे गए सवाल पर एसटी हसन ने कहा कि वह कुरान में बताए गए प्रावधानों के अनुसार चलेंगे। उन्होंने कहा कि वे शरियत की मांग करेंगे और कुरान में जो हुक्म है, उसी को मानेंगे।

उन्होंने परिवार और बेटियों को दी जाने वाली संपत्ति या हिस्से को लेकर भी अपनी बात रखी। एसटी हसन ने कहा कि परिवार और बेटियों को कितना देना है, यह तय करने का अधिकार उन्हें होना चाहिए।

उनकी यह टिप्पणी UCC को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच आई है। UCC का उद्देश्य विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े मामलों के लिए धर्म के आधार पर अलग-अलग प्रावधानों की जगह एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है।

UCC को लेकर एसटी हसन ने सरकार पर लगाए आरोप

एसटी हसन ने UCC को लेकर चल रही राजनीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे मुद्दों के जरिए माहौल खराब करने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने महंगाई, बेरोजगारी, किसानों और मध्यम वर्ग से जुड़े मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार को इन विषयों पर काम करना चाहिए। एसटी हसन ने यह दावा भी किया कि UCC को लेकर NDA के घटक दलों में पूरी सहमति नहीं है।

यह उनकी राजनीतिक प्रतिक्रिया और आरोप हैं। अलग-अलग NDA सहयोगी दलों ने UCC पर अलग-अलग रुख और चिंता व्यक्त की है; उदाहरण के तौर पर जेडीयू ने इस मुद्दे पर अमित शाह से बातचीत की बात कही है, जबकि चिराग पासवान ने सभी संबंधित पक्षों की राय लेने की बात कही थी।

मस्जिदों को निशाना बनाने का भी लगाया आरोप

एसटी हसन ने UCC के संदर्भ में सहारनपुर और मुरादाबाद की मस्जिदों को कथित तौर पर निशाना बनाए जाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि UCC के जरिए माहौल खराब करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के मुद्दों से हिंदू-मुस्लिम तनाव बढ़ सकता है। एसटी हसन ने इस दौरान वंदेमातरम् को लेकर हुए विवाद का भी जिक्र किया।

हालांकि, मस्जिदों को निशाना बनाए जाने और UCC के जरिए तनाव पैदा करने के उनके आरोपों को उनके राजनीतिक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

अंतिम संस्कार की परंपराओं का दिया उदाहरण

एसटी हसन ने अलग-अलग धार्मिक परंपराओं का उदाहरण देते हुए कहा कि कोई मुसलमान नहीं चाहेगा कि उसकी बॉडी को जलाया जाए और कोई हिंदू नहीं चाहेगा कि उसकी बॉडी को दफनाया जाए।

उन्होंने इस उदाहरण के जरिए व्यक्तिगत और धार्मिक परंपराओं के महत्व की बात रखी और UCC को लेकर अपनी आपत्ति जताई।

इमरान मसूद के बयान पर भी एसटी हसन का पलटवार

UCC के मुद्दे के साथ-साथ एसटी हसन ने सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के बयानों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इमरान मसूद की सपा नेताओं से कुछ व्यक्तिगत समस्याएं हो सकती हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह सपा-कांग्रेस गठबंधन को लेकर टिप्पणी करें।

एसटी हसन ने कहा कि न तो वह और न ही कोई ‘छुटभैया नेता’ यह तय करेगा कि गठबंधन रहेगा या नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि इमरान मसूद के इस तरह के बयानों से बीजेपी को फायदा होता है।

यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में सपा और कांग्रेस के बीच रिश्ते और आगामी चुनाव को लेकर नेताओं के बयान लगातार चर्चा में हैं।

UCC पर क्यों बढ़ी राजनीतिक बहस?

UCC लंबे समय से देश की राजनीति में चर्चा का विषय रहा है। हाल में अमित शाह ने कहा कि NDA की सरकारें 2029 से पहले अपने शासन वाले सभी 21 राज्यों में UCC लागू करेंगी।

अभी देश में उत्तराखंड ऐसा राज्य है जहां UCC कानून पूरी तरह लागू हो चुका है। गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में भी UCC को लेकर विधायी प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है, जबकि कुछ अन्य राज्यों ने इसके लिए समितियां बनाई हैं।

इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में एसटी हसन का बयान सामने आया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि वह कुरान और शरियत के बताए प्रावधानों के मुताबिक चलने की बात पर कायम हैं।

ST Hasan on UCC का यह बयान अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में UCC को लेकर चल रही बहस का हिस्सा बन गया है। एक तरफ केंद्र सरकार और NDA शासित राज्यों में UCC को आगे बढ़ाने की बात हो रही है, वहीं दूसरी तरफ एसटी हसन जैसे विपक्षी नेता धार्मिक व्यक्तिगत कानूनों और अपनी परंपराओं के आधार पर इसका विरोध जता रहे हैं।

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