Rajpal Yadav Supreme Court Relief के मामले में अभिनेता राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिली है। चेक बाउंस से जुड़े पुराने मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें दो सप्ताह का समय दिया है। अदालत ने अगली सुनवाई तक 2 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट (DD) पेश करने का निर्देश दिया है। यानी फिलहाल अभिनेता को अदालत के सामने निर्धारित राशि जमा करने के लिए समय दिया गया है।
मामला राजपाल यादव और उनकी फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण से जुड़े करीब डेढ़ दशक पुराने वित्तीय विवाद से संबंधित है। इस मामले में मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से चेक बाउंस होने के आरोपों के आधार पर कानूनी कार्रवाई की गई थी।
Rajpal Yadav Supreme Court Relief: कोर्ट ने क्या निर्देश दिया?
सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को दो सप्ताह की मोहलत देते हुए अगली सुनवाई के दौरान 2 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट पेश करने को कहा है। अदालत के इस निर्देश के बाद अभिनेता को निर्धारित समय के भीतर रकम की DD तैयार कर अदालत के समक्ष पेश करनी होगी।
मामला चेक बाउंस से संबंधित है, इसलिए इसमें भुगतान और कानूनी कार्यवाही दोनों महत्वपूर्ण पहलू हैं। सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देश से अभिनेता को फिलहाल निर्धारित राशि जमा करने के लिए समय मिला है।
अदालत के इस आदेश को मामले में राजपाल यादव के लिए फिलहाल राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि इससे पूरा कानूनी विवाद खत्म नहीं हुआ है। अगली सुनवाई में मामले की आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
‘अता पता लापता’ फिल्म से कैसे जुड़ा है विवाद?
राजपाल यादव से जुड़ा यह विवाद उनकी फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के समय से चला आ रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, साल 2010 के आसपास मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने फिल्म के निर्माण और उससे जुड़ी जरूरतों के लिए राजपाल यादव, उनकी पत्नी और उनकी फिल्म निर्माण कंपनी को करीब 5 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी थी।
फिल्म की रिलीज में देरी होने के बाद दोनों पक्षों के बीच रकम की वापसी को लेकर बातचीत और समझौते की प्रक्रिया चली। इसी दौरान भुगतान से संबंधित कई व्यवस्थाएं तय की गईं।
लेकिन बाद में विवाद उस समय कानूनी मामले में बदल गया, जब कंपनी की ओर से प्राप्त सात चेक बैंक में लगाए गए और वे कथित तौर पर बाउंस हो गए।
सात चेक बाउंस होने के बाद दर्ज हुईं शिकायतें
चेक के भुगतान में समस्या आने के बाद मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने कानूनी रास्ता अपनाया। कंपनी ने Negotiable Instruments Act की धारा 138 के तहत सात अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराईं।
धारा 138 के तहत चेक बाउंस से संबंधित मामलों में कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। इसी कानूनी विवाद के कारण राजपाल यादव लंबे समय से अदालतों में चल रही कार्यवाही का सामना कर रहे हैं।
यह मामला सिर्फ एक चेक तक सीमित नहीं था। सात अलग-अलग चेक से संबंधित शिकायतों ने विवाद को और लंबा कर दिया। इसके बाद मामला अलग-अलग न्यायिक स्तरों से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।
करीब डेढ़ दशक पुराना है मामला
राजपाल यादव से जुड़ा यह विवाद नया नहीं है। इसकी शुरुआत फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण से जुड़े वित्तीय लेन-देन से हुई थी और इसके बाद भुगतान को लेकर विवाद अदालत तक पहुंचा।
करीब 2010 से चले आ रहे इस मामले में समय-समय पर अभिनेता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और अदालतों में सुनवाई होती रही है। अब सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देश के बाद अगली सुनवाई में 2 करोड़ रुपये की DD पेश करना इस मामले का अहम चरण होगा।
फिलहाल अदालत ने अभिनेता को दो सप्ताह का समय दिया है। इसलिए अगली सुनवाई में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि निर्धारित 2 करोड़ रुपये की डिमांड ड्राफ्ट अदालत के निर्देश के मुताबिक पेश की जाती है या नहीं और इसके बाद कोर्ट मामले में क्या आदेश देता है।
Rajpal Yadav Supreme Court Relief से अभिनेता को फिलहाल दो सप्ताह की राहत जरूर मिली है, लेकिन चेक बाउंस से जुड़ा यह पुराना विवाद अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अगली सुनवाई में मामले की दिशा पर नजर रहेगी।




