The Red Ink
तमिलनाडु विधानसभा में मुख्यमंत्री C. Joseph Vijay की सरकार ने बहुमत साबित कर दिया है। विश्वास प्रस्ताव के दौरान सियासी समीकरण तेजी से बदले—AIADMK में बगावत खुलकर सामने आई, जबकि DMK ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
फ्लोर टेस्ट का गणित: विजय सरकार को मजबूत बढ़त
234 सदस्यीय विधानसभा में हुए फ्लोर टेस्ट के दौरान कुल 171 विधायक मौजूद रहे। इनमें से 144 विधायकों ने सरकार के पक्ष में वोट किया, जो बहुमत के आंकड़े से काफी ज्यादा है। सरकार के समर्थन में AIADMK के 25 बागी विधायक भी शामिल रहे, जिसने पूरे राजनीतिक समीकरण को बदल दिया। वहीं, 22 विधायकों ने विरोध में वोट किया, जबकि DMK के 59 विधायक मतदान से पहले ही सदन छोड़कर बाहर चले गए।
AIADMK में खुली बगावत, दो धड़ों में बंटी पार्टी
क्रॉस वोटिंग के बाद AIADMK में साफ तौर पर दरार दिखाई दी। पार्टी दो गुटों—Edappadi K. Palaniswami और C. V. Shanmugam—में बंटती नजर आई। बागी गुट के नेता S. P. Velumani ने खुले तौर पर विजय सरकार को समर्थन देने का ऐलान किया, जिससे विपक्ष की रणनीति कमजोर पड़ गई।
उदयनिधि का हमला, विजय का जवाब
विपक्ष के नेता Udhayanidhi Stalin ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि “इंस्टाग्राम Reel से नहीं, Real गवर्नेंस से राज्य चलाना होगा।” उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि AIADMK के बागी विधायकों से मुलाकात “राजनीतिक बदलाव” है या “सौदेबाजी”। इस पर मुख्यमंत्री विजय ने पलटवार करते हुए कहा कि उनकी सरकार “घोड़े की रफ्तार से काम करेगी, न कि हॉर्स ट्रेडिंग से।”
DMK का वॉकआउट, सदन में बढ़ा सियासी तनाव
विश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान DMK ने मतदान से पहले ही वॉकआउट कर दिया। इस कदम के बाद सदन में मौजूद विधायकों के बीच ही वोटिंग कराई गई, जिससे सत्ता पक्ष को स्पष्ट बढ़त मिल गई।
अन्य दलों का रुख: समर्थन, विरोध और दूरी
PMK के 4 और BJP के 1 विधायक मतदान में शामिल नहीं हुए, मनीथनेया जननायगा कच्ची (MJK) ने प्रस्ताव का विरोध किया, DMDK ने सरकार की नियुक्तियों पर सवाल उठाए। कुछ दलों ने OSD के तौर पर एक ज्योतिषी की नियुक्ति पर भी आपत्ति जताई।
NEET विवाद भी पहुंचा विधानसभा
विश्वास प्रस्ताव के बीच NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने का मुद्दा भी सदन में उठा। कुछ विधायकों ने परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठाते हुए नई सरकार से इस पर स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की।
क्या है राजनीतिक संकेत?
फ्लोर टेस्ट में मिली जीत ने विजय सरकार को फिलहाल स्थिरता जरूर दी है, लेकिन AIADMK में आई दरार और विपक्ष के आरोप आने वाले दिनों में सियासी हलचल बढ़ा सकते हैं।




