योगी कैबिनेट विस्तार: 6 नए मंत्री शामिल, 2 को प्रमोशन; कृष्णा पासवान बनीं चर्चा का केंद्र

The Red Ink
उत्तर प्रदेश में Yogi Adityanath सरकार ने रविवार को अपने मंत्रिमंडल का दूसरा विस्तार करते हुए बड़ा सियासी संदेश दिया। इस फेरबदल में 6 नए चेहरों को शामिल किया गया, जबकि 2 मौजूदा मंत्रियों को प्रमोशन देकर जिम्मेदारी बढ़ाई गई। राजभवन में आयोजित शपथ समारोह में नए मंत्रियों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली।

भूपेंद्र और मनोज पांडेय बने कैबिनेट मंत्री
शपथ ग्रहण की शुरुआत भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी से हुई, जिन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया। उनके बाद सपा से बगावत कर भाजपा में आए मनोज पांडेय ने भी कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ली। इस कदम को राजनीतिक तौर पर अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे विपक्षी खेमे में संदेश देने की कोशिश दिखी।

अजीत पाल और सोमेंद्र तोमर को प्रमोशन
कैबिनेट विस्तार में अजीत सिंह पाल और सोमेंद्र तोमर को प्रमोशन देकर राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया। इससे पहले दोनों राज्य मंत्री के तौर पर काम कर रहे थे। सरकार ने इन नेताओं पर भरोसा जताते हुए उन्हें ज्यादा जिम्मेदारी सौंपी है।

चार नए राज्यमंत्री, कृष्णा पासवान की कहानी खास
इस विस्तार में कृष्णा पासवान, कैलाश राजपूत, सुरेंद्र दिलेर और हंसराज विश्वकर्मा को राज्यमंत्री बनाया गया। इनमें कृष्णा पासवान खास चर्चा में रहीं, क्योंकि वह राजनीति में आने से पहले आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रह चुकी हैं और अब चौथी बार विधायक बनने के बाद मंत्री बनी हैं। यह उनके लंबे राजनीतिक सफर का बड़ा मुकाम माना जा रहा है।

सामाजिक संतुलन का संदेश
नए मंत्रिमंडल में जातीय संतुलन का भी ध्यान रखा गया है। इसमें 1 ब्राह्मण, 3 ओबीसी और 2 दलित वर्ग से मंत्री शामिल किए गए हैं। शपथ के बाद कई मंत्रियों ने राज्यपाल Anandiben Patel और मुख्यमंत्री के पैर छूकर आशीर्वाद लिया, जो समारोह का अहम दृश्य रहा।

अब 60 तक पहुंची मंत्रियों की संख्या
इस विस्तार के बाद उत्तर प्रदेश सरकार में मुख्यमंत्री समेत कुल मंत्रियों की संख्या 60 हो गई है, जो संवैधानिक सीमा के करीब है। इससे पहले मार्च 2024 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मंत्रिमंडल का पहला विस्तार हुआ था।

सियासी बयानबाजी भी तेज
कैबिनेट विस्तार के साथ ही सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई। मंत्री बनने के बाद मनोज पांडेय ने सपा प्रमुख Akhilesh Yadav पर निशाना साधते हुए उनके बयानों को ‘मानसिक असंतुलन’ बताया। वहीं भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि वे संगठन के कार्यकर्ता हैं और पार्टी जो जिम्मेदारी देगी, उसे पूरी निष्ठा से निभाएंगे। दूसरी ओर, मंत्री न बनाए जाने से भाजपा विधायक आशा मौर्य ने नाराजगी जताते हुए पार्टी पर अनदेखी का आरोप लगाया।

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